NEET-PG में परसेंटाइल की जगह रैंक-आधारित सिस्टम लागू होगा: एक्सपर्ट कमिटी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया
Shahadat
3 Nov 2026 7:52 PM IST

सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने NEET-PG और NEET SS के लिए रैंक-आधारित मेरिट सिस्टम अपनाने का प्रस्ताव दिया। इससे अभी चल रहे परसेंटाइल फॉर्मेट को हटा दिया जाएगा।
यह जानकारी जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच को दी गई। यह मामला NEET-PG 2025-26 के लिए कट-ऑफ परसेंटाइल कम करने को चुनौती देने वाली एक रिट याचिका से जुड़ा है। यह प्रस्ताव केंद्र सरकार की उस एक्सपर्ट कमिटी की ओर से आया है, जिसे कोर्ट की सिफारिश पर गठित किया गया। कोर्ट ने रिपोर्ट का अध्ययन करने और संबंधित पक्षों को कमिटी के सुझावों पर अपना जवाब दाखिल करने का समय देने के लिए मामले की सुनवाई टाल दी।
इस प्रस्ताव पर बताया गया कि नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने परसेंटाइल-आधारित क्वालिफाइंग थ्रेशोल्ड (योग्यता सीमा) को हटाकर रैंक-आधारित मेरिट सिस्टम अपनाने को सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दी। संबंधित पक्षों (स्टेकहोल्डर्स) की राय लेने के बाद इस संबंध में ड्राफ्ट रेगुलेशन जारी किया जाएगा। NMC के सचिव ने इस प्रस्ताव के बारे में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज को एक पत्र भी लिखा है।
यह भी कहा गया कि रैंक-आधारित मेरिट सिस्टम लागू होने से PG काउंसलिंग के राउंड 2 और राउंड 3 के बीच का समय अंतराल कम हो जाएगा।
साथ ही यह भी सुझाव दिया गया कि परसेंटाइल में इतनी कमी नहीं की जानी चाहिए, जिससे NEET परीक्षा की शुचिता (पवित्रता) पर आंच आए—यानी ऐसे उम्मीदवारों को प्रवेश के योग्य न माना जाए, जिनका प्रदर्शन 'बेहद खराब या नकारात्मक' रहा हो।
इस बड़े बदलाव के अलावा, यह भी प्रस्ताव दिया गया कि मेडिकल कॉलेजों में नए कोर्स शुरू करने, सीटों के नवीनीकरण या उन्हें बढ़ाने, NEET परीक्षा और काउंसलिंग प्रक्रिया के लिए निश्चित समय-सीमा (टाइमलाइन) होनी चाहिए।
इसके अलावा, MCC पूरी काउंसलिंग प्रक्रिया को डिजिटल बनाने पर काम कर रही है, जिसमें इंसानी दखल कम से कम हो, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
अन्य प्रस्तावित बदलाव
MCC पोर्टल पर बदलाव: कुछ प्रस्तावित बदलाव मेडिकल काउंसलिंग कमिटी (MCC) के पोर्टल से जुड़े हैं। इसके तहत इस शैक्षणिक वर्ष से उम्मीदवारों को 'फ्रीज' (Freeze) और 'फ्लोट' (Float) श्रेणियों में बांटा जाएगा। 'फ्रीज' (Freeze) कैटेगरी में, उम्मीदवारों को एडमिशन या अपग्रेडेशन के लिए आवंटित संस्थानों में जाकर खुद उपस्थित होना होगा। वहीं, 'फ्लोट' (Float) कैटेगरी में उम्मीदवारों को ऑनलाइन ही सीट स्वीकार करनी होगी। अपग्रेडेशन होने पर पिछली सीट से रिलीव होने की प्रक्रिया भी ऑनलाइन ही पूरी की जाएगी।
इस पूरी प्रक्रिया में उम्मीदवारों को केवल एक बार ही फीस का भुगतान करना होगा - जब वे अंतिम रूप से एडमिशन लेने का फैसला करेंगे।
सीट मैट्रिक्स योगदान: पहले, संस्थान सीधे तौर पर सीट मैट्रिक्स की जानकारी देते थे, जिसे NMC सत्यापित नहीं कर पाता था। अब, NMC को काउंसलिंग सॉफ्टवेयर में स्टेकहोल्डर (हितधारक) के रूप में शामिल किया गया। चूंकि अब सीट मैट्रिक्स को NMC के जरिए व्यवस्थित किया जाएगा, इसलिए MCC काउंसलिंग के लिए एक तय समय-सारणी का पालन करेगा।
समिति 'सीट ब्लॉकिंग' को रोकने के लिए भी कदम उठाने पर विचार कर रही है। इसमें प्रवेश परीक्षाओं के लिए KYC या बायोमेट्रिक्स का इस्तेमाल शामिल हो सकता है, ताकि कोई उम्मीदवार दोबारा परीक्षा में न बैठ सके।
इसके अलावा, समिति परिणामों को ऑनलाइन तरीके से DME (मेडिकल शिक्षा निदेशालय) और राज्य काउंसलिंग प्राधिकरणों के साथ साझा करने की संभावना पर भी काम कर रही है। राज्यों को अपने कंप्यूटर नेटवर्क को अपग्रेड करने की सलाह दी गई।
यह मुद्दा 13 जनवरी, 2026 को 'नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज' द्वारा जारी एक नोटिस से खड़ा हुआ है। इस नोटिस में NEET-PG 2025-26 के तीसरे राउंड की काउंसलिंग के लिए न्यूनतम क्वालिफाइंग परसेंटाइल कट-ऑफ को कम कर दिया गया।
नोटिस के अनुसार, जनरल/EWS उम्मीदवारों के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ को 50वें परसेंटाइल (800 में से 276 अंक) से घटाकर 7वें परसेंटाइल (103 अंक) कर दिया गया। जनरल PwBD उम्मीदवारों के लिए इसे 45वें परसेंटाइल (255 अंक) से घटाकर 5वें परसेंटाइल (90 अंक) कर दिया गया। SC/ST/OBC उम्मीदवारों (इन श्रेणियों के PwBD उम्मीदवारों सहित) के लिए इसे 40वें परसेंटाइल (235 अंक) से घटाकर 0वें परसेंटाइल (माइनस 40 अंक) कर दिया गया।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि कट-ऑफ को घटाकर शून्य या नकारात्मक अंकों तक ले जाना मनमाना है और यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन करता है। उनका यह भी कहना है कि पोस्टग्रेजुएट स्तर पर मानकों में इस तरह की ढील देने से मरीजों की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य (Public Health) के लिए खतरा पैदा हो सकता है।
6 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने 'नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज' से एक हलफनामा दायर करने को कहा, जिसमें NEET-PG 2025-26 के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ परसेंटाइल को कम करने का कारण बताया जाए। उस समय जस्टिस नरसिम्हा ने कहा था कि इस मामले में अलग-अलग तरह के विचार शामिल हैं। उन्होंने आगे कहा कि एक तर्क यह हो सकता है कि इससे मानक (स्टैंडर्ड) कम हो रहे हैं, जबकि दूसरा तर्क यह है कि सीटें बेकार जा रही हैं, इसलिए कहीं न कहीं एक संतुलन बनाना जरूरी है।
भारत सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि NEET-PG का उद्देश्य न्यूनतम योग्यता को प्रमाणित करना नहीं है - क्योंकि यह MBBS की डिग्री से पहले ही साबित हो जाती है - बल्कि इसका मकसद सीमित पोस्टग्रेजुएट सीटों के आवंटन के लिए उम्मीदवारों के बीच एक मेरिट लिस्ट तैयार करना है।
इसमें कहा गया कि सभी उम्मीदवार पहले से ही लाइसेंस प्राप्त MBBS डॉक्टर हैं। पोस्टग्रेजुएट शिक्षा तीन साल का एक व्यवस्थित और निगरानी वाला प्रोग्राम है, जिसमें अंतिम योग्यता का आकलन MD/MS परीक्षाओं के जरिए किया जाता है। इन परीक्षाओं में उम्मीदवारों को थ्योरी और प्रैक्टिकल, दोनों में अलग-अलग कम-से-कम 50 प्रतिशत अंक लाने होते हैं।
'नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज' ने अलग हलफनामा दायर करके बताया कि क्वालिफाइंग परसेंटाइल को कम करने के फैसले में उसकी कोई भूमिका नहीं थी। बोर्ड का काम केवल परीक्षा आयोजित करना और परिणाम को काउंसलिंग अथॉरिटी को सौंपना है।
Case Title : HARISHARAN DEVGAN & ORS v UNION OF INDIA & ORS

