NEET-PG 2025 कट-ऑफ घटने से 95,913 अतिरिक्त अभ्यर्थी हुए पात्र : NBEMS ने सुप्रीम कोर्ट को बताया

Praveen Mishra

17 Feb 2026 3:42 PM IST

  • NEET-PG 2025 कट-ऑफ घटने से 95,913 अतिरिक्त अभ्यर्थी हुए पात्र : NBEMS ने सुप्रीम कोर्ट को बताया

    नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि NEET-PG 2025 के क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल में कमी करने के निर्णय में उसकी कोई भूमिका नहीं है। कट-ऑफ घटाए जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दायर अपने जवाबी हलफनामे में NBEMS ने कहा कि यह निर्णय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत महानिदेशालय स्वास्थ्य सेवाएँ (DGHS) और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के अधिकार क्षेत्र में आता है।

    NBEMS ने स्पष्ट किया कि उसकी भूमिका केवल NEET-PG परीक्षा आयोजित करने, परिणामों का मूल्यांकन करने और उन्हें संबंधित प्राधिकरण को सौंपने तक सीमित है। बोर्ड के अनुसार, 9 जनवरी 2026 को मंत्रालय ने तीसरे राउंड की काउंसलिंग के लिए क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल घटाने का निर्णय NBEMS को सूचित किया, जिसके अनुपालन में 13 जनवरी को संशोधित कट-ऑफ के साथ परिणाम जारी किए गए।

    हलफनामे में यह भी कहा गया कि NEET-PG परीक्षा के बाद अंतिम परिणाम मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) सहित संबंधित काउंसलिंग प्राधिकरण को सौंप दिए जाते हैं और कट-ऑफ कम करने जैसे नीतिगत निर्णयों में NBEMS की कोई भूमिका नहीं होती।

    NBEMS ने अदालत को यह भी बताया कि कट-ऑफ घटाए जाने के बाद 95,913 अतिरिक्त अभ्यर्थी NEET-PG 2025 की काउंसलिंग में भाग लेने के पात्र हो गए हैं। इसलिए अदालत का कोई भी निर्णय इन उम्मीदवारों को प्रभावित करेगा और उन्हें सुने बिना निर्णय लेना उचित नहीं होगा। हलफनामे में विभिन्न श्रेणियों के उन अभ्यर्थियों का विवरण भी प्रस्तुत किया गया है, जो कट-ऑफ घटने के बाद अतिरिक्त रूप से पात्र बने।




    NBEMS ने अपने हलफनामे में दिल्ली हाईकोर्ट के हालिया निर्णय संचित सेठ बनाम नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज एवं अन्य (W.P. (C) No. 848/2026) का भी उल्लेख किया, जिसमें NEET-PG कट-ऑफ पर्सेंटाइल घटाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी गई थी।

    गौरतलब है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और NBEMS को निर्देश दिया था कि वे कट-ऑफ पर्सेंटाइल कम करने के पीछे का कारण स्पष्ट करें। न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ आज इस मामले पर सुनवाई करने वाली है।


    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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