NCR Pollution | 'दिल्ली में बच्चों के फेफड़े भी गुलाबी नहीं': एमिक्स क्यूरी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा
Shahadat
8 Nov 2026 7:04 PM IST

Delhi-NCR में वायु प्रदूषण से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि इस मुद्दे पर कोर्ट का दखल सीमित होना चाहिए, वरना लोग कानूनों को तोड़ने के लिए प्रेरित हो सकते हैं। इसके बजाय, प्रदूषण के प्रति जागरूकता कार्यक्रमों को दिवाली के कार्यक्रमों का हिस्सा बनाया जा सकता है।
सुनवाई के दौरान, कोर्ट को गंगा राम अस्पताल के चेस्ट सर्जन की रिपोर्ट के बारे में बताया गया कि दिल्ली में बच्चों के फेफड़े भी गुलाबी नहीं हैं। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि वह ऐसी "व्यक्तिगत राय" (Anecdotal Opinion) पर ध्यान नहीं देना चाहता। कोर्ट ने कहा कि वह विशेषज्ञों की राय और GRAP (ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान) के सुझावों को ही आधार मानेगा, जब तक कि किसी पीयर-रिव्यू जर्नल (विशेषज्ञों द्वारा जांची गई पत्रिका) से इसके विपरीत कोई शोध सामने न आए।
जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा,
"हमें विश्वास है कि CAQM (वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग) स्वास्थ्य विशेषज्ञों सहित सभी विशेषज्ञों की राय पर विचार करता है... छोटे बच्चों के फेफड़े हालात के हिसाब से खुद को बेहतर ढाल पाते हैं या नहीं, इस बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है। GRAP जो भी कहता है, उसे आप पीयर-रिव्यू रिसर्च पेपर के जरिए गलत साबित नहीं कर सकते, तो हम इन दलीलों पर विचार नहीं करेंगे।"
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने शुरुआत में कहा कि वे कुछ निर्देश जारी करेंगे और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से उनका पालन करने को कहेंगे। बाद में उन्होंने कहा कि वे संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट और अपडेट मांगेंगे।
शुरुआत में, CJI ने टिप्पणी की,
"हमें उम्मीद है कि आप सभी दिल्ली के मौसम का आनंद ले रहे होंगे।"
सीनियर एडवोकेट अपराजिता सिंह (एमिक्स क्यूरी) ने बताया कि हवा की गुणवत्ता पहले से ही 'गंभीर' (Severe) श्रेणी के आसपास बनी हुई है।
उन्होंने कहा,
"हमारी आवाज भी जा रही है। यह रोज 30 सिगरेट पीने जैसा है।"
Case: In Re: Curbing Air Pollution in the National Capital Region, SMW(C) No. 11/2026

