NCERT Textbook Row : विशेषज्ञ समिति के सदस्य न्यायपालिका पर आधारित अध्याय की करेंगे समीक्षा- केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा

Shahadat

20 March 2026 2:54 PM IST

  • NCERT Textbook Row : विशेषज्ञ समिति के सदस्य न्यायपालिका पर आधारित अध्याय की करेंगे समीक्षा- केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा

    सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सीनियर एडवोकेट और पूर्व अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल, सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस इंदु मल्होत्रा, और राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी के निदेशक तथा सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अनिरुद्ध बोस, उस विशेषज्ञ समिति के सदस्य होंगे, जिसे केंद्र सरकार द्वारा NCERT के न्यायिक भ्रष्टाचार पर आधारित विवादित अध्याय की समीक्षा के लिए गठित करने का प्रस्ताव है।

    एसजी मेहता ने यह बयान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ के समक्ष एक अन्य याचिका की सुनवाई के दौरान दिया। इस याचिका में NCERT की पुरानी सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक से सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से संबंधित कुछ अन्य टिप्पणियों को हटाने की मांग की गई।

    एसजी मेहता ने कहा,

    "हमने एक समिति नियुक्त की है; एक विधिवेत्ता के तौर पर हमने अनुरोध किया और उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया - मिस्टर वेणुगोपाल। वे अध्याय का मसौदा तैयार करने वाली समिति के सदस्य होंगे। जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​जज के तौर पर शामिल होंगी। हमने जस्टिस अनिरुद्ध बोस से न्यायिक निदेशक के तौर पर कृपया इस कार्य से जुड़ने का अनुरोध किया है। इसमें एक कुलपति भी शामिल होंगे।"

    बता दें, पिछले महीने NCERT की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान के लिए प्रस्तावित पुस्तक में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' पर आधारित एक अध्याय को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस अध्याय पर स्वतः संज्ञान लेते हुए एक मामला दर्ज किया और पुस्तक पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया। बाद में NCERT ने इस अध्याय को प्रकाशित करने के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी और इसे वापस ले लिया।

    पिछले सप्ताह, अदालत ने यह देखकर नाराजगी व्यक्त की थी कि NCERT इस अध्याय को फिर से लिखकर आगामी शैक्षणिक सत्र में शामिल करने का प्रस्ताव दे रहा था। अदालत ने निर्देश दिया कि इस फिर से लिखे गए अध्याय को केंद्र सरकार द्वारा गठित की जाने वाली विशेषज्ञ समिति द्वारा समीक्षा किए बिना पाठ्यक्रम में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।

    अदालत ने निर्देश दिया कि विशेषज्ञ समिति में अधिमानतः एक पूर्व सीनियर जज, एक प्रख्यात शिक्षाविद और कानून के क्षेत्र का एक प्रतिष्ठित पेशेवर शामिल होना चाहिए। अदालत ने उन तीन शिक्षाविदों पर भी रोक लगाई, जो इस अध्याय को लिखने में शामिल थे, कि वे सार्वजनिक संस्थानों की अन्य शैक्षणिक परियोजनाओं से न जुड़ें।

    शुक्रवार की जनहित याचिका (PIL) कक्षा 8 की पुरानी सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में की गई एक टिप्पणी के संबंध में दायर की गई, जिसमें कहा गया कि "हाल के फैसले झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों को शहर में अतिक्रमणकारी के रूप में देखने की प्रवृत्ति रखते हैं।"

    अदालत ने इस मामले में दखल देने से इनकार करते हुए कहा कि यह किसी फैसले के बारे में महज़ एक दृष्टिकोण है।

    चीफ जस्टिस ने कहा कि अदालत के किसी भी फैसले के बारे में अपना दृष्टिकोण रखने का अधिकार हर किसी को है। अदालत ने यह भी कहा कि यह मुद्दा अब बेमानी हो गया, क्योंकि संबंधित पाठ्यपुस्तक को वैसे भी एक नई किताब से बदला जा रहा है।

    तदनुसार, याचिका का निपटारा कर दिया गया।

    Case Title: Dr Pankaj Pushkar v. Union of India and Anr., Diary No.13060/2026

    Next Story