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प्रवासी मजदूर : सुप्रीम कोर्ट में देश भर में ऐसे लोगों की पहचान कर बुनियादी सुविधाएं देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका 

LiveLaw News Network
21 May 2020 2:38 PM GMT
प्रवासी मजदूर : सुप्रीम कोर्ट में देश भर में ऐसे लोगों की पहचान कर बुनियादी सुविधाएं देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका 

सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल कर मांग की गई है कि स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया जाए कि वे विस्थापित प्रवासी कामगारों की पहचान करें और उन्हें राष्ट्रीयलॉकडाउन के दौरान बुनियादी सुविधाओं से लैस करें।

यह याचिका वकील नचिकेता वाजपेयी की ओर से वकील दीपक प्रकाश ने दायर की है। इसमें उन प्रवासी श्रमिकों के सामने आने वाली कठिनाइयों को ध्यान दिलाया गया है, देश भर में जिनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है।

इसके प्रकाश में, याचिकाकर्ता ने शीर्ष अदालत द्वारा 31 मार्च को पारित एक आदेश (अलख आलोक श्रीवास्तव बनाम भारत संघ ) को सामने रखा गया है

जिसमें पीठ ने प्रवासियों की "चिंता" और "भय" पर ध्यान देते हुए कहा था कि इसे पुलिस और अन्य अधिकारियों द्वारा समझा जाना आवश्यक है।

अदालत ने नोट किया था,

"जैसा कि भारत संघ द्वारा निर्देशित है, उन्हें प्रवासियों के साथ मानवीय तरीके से व्यवहार करना चाहिए। स्थिति को देखते हुए, हमारा विचार है कि राज्य सरकारों / संघ शासित प्रदेशों को प्रवासियों के लिए कल्याणकारी गतिविधियों की निगरानी के लिए पुलिस के साथ-साथ स्वयंसेवकों को संलग्न करने का प्रयास करना चाहिए।हम उम्मीद करते हैं कि संबंधित लोग गरीब पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की सराहना करेंगे और उनके साथ दयालु व्यवहार करेंगे। "

याचिकाकर्ता द्वारा यह दावा किया गया है कि अधिकारियों द्वारा उल्लिखित निर्देशों का अनुपालन नहीं किया गया है।

"उक्त आदेश का बहुत बड़ा उद्देश्य तब से ही पराजित हो गया जब से हजारों व्यथित प्रवासी श्रमिक रेलवे स्टेशन और बस स्टॉप पर एकत्रित हुए, अधिकारियों से राहत की मांग की। हजारों लोग नाबालिग बच्चों, वृद्धों, महिलाओं के साथ बिना भोजन या पानी और सामाजिक दूरी के दिशा निर्देशों का उल्लंघन करते हुए अपने गांवों की ओर चलते पाए गए"-

- याचिका का अंश

दलीलों में कहा गया है कि तात्कालिक दलील प्रकृति में प्रतिकूल नहीं है और जबकि इस तरह के सभी उल्लंघन "अभूतपूर्व राष्ट्रीय लॉकडाउन के अनपेक्षित परिणाम" हैं, फिर भी " नागरिकों जीवन की रक्षा और कल्याण करना सबका मौलिक कर्तव्य है।"

इस बात पर जोर दिया गया है कि ये जन सैलाब यूपी, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली राज्यों में दिखाई दे रहा है, "वर्तमान में, स्थिति कानून और व्यवस्था से बाहर हो गई है"। इसलिए याचिकाकर्ता ने संबंधित राज्य सरकार को भी मामले में शामिल किया है

इसके अलावा, प्रवासी कामगारों की दुर्दशा को उजागर करने के लिए, याचिकाकर्ता ने कई समाचार रिपोर्टों को संलग्न किया है।

याचिकाकर्ता ने कहा कि

"हिमशैल का केवल एक सिरा है औरविशाल, अनगिनत, अकल्पनीय अमानवीय उत्पीड़न की एक छोटी सी झलक प्रदान करते हैं ....जिसका लाखों प्रवासी श्रमिकों को सामना करना पड़ रहा है।"

साथ ही अन्य बातों के साथ ये प्रार्थना की गई है कि सरकार और संबंधित अधिकारी शरणार्थी शिविरों या अधिग्रहीत स्कूलों / अन्य संपत्तियों के माध्यम से स्वच्छ रहने वाले आवास स्थापित करें जो प्रवासी श्रमिकों के "पलायन को रोकने" के लिए, उन्हें पर्याप्त पोषण और स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करें।

साथ ही एक सामाजिक निगरानी समिति की स्थापना की जाए - जो पूरे भारत में जिला स्तर पर राहत प्रदान करने के लिए पूरी तरह से समर्पित हो।


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