पुलिसकर्मी ने कार की विंडस्क्रीन पर चलाई गोली, कार सवार की मौत; कोर्ट ने सुनाई पुलिसकर्मी को 10 साल की सजा

  • पुलिसकर्मी ने कार की विंडस्क्रीन पर चलाई गोली, कार सवार की मौत; कोर्ट ने सुनाई पुलिसकर्मी को 10 साल की सजा

    लखनऊ की सत्र अदालत ने वर्ष 2018 के चर्चित विवेक तिवारी हत्याकांड में पूर्व पुलिसकर्मी प्रशांत कुमार चौधरी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304 Part-II के तहत 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर ₹20,000 का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर उसे दो महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

    लखनऊ के सेशन जज मलकान सिंह ने 21 सितंबर 2026 को सजा के बिंदु पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया। मामला State of U.P. Vs. Prashant Kumar Chaudhary & Anr. से संबंधित है।

    क्या था मामला?

    अदालत के आदेश के अनुसार, 28/29 सितंबर 2018 की दरम्यानी रात कांस्टेबल प्रशांत कुमार चौधरी और सैंडीप कुमार गोमती नगर विस्तार इलाके में पुलिस मोटरसाइकिल से गश्त कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें एक XUV कार दिखाई दी। संदेह होने पर उन्होंने कार को रुकने का इशारा किया।

    अदालत के मुताबिक, कार चला रहे विवेक तिवारी ने वहां से निकलने की कोशिश की। इस दौरान कार ने पुलिस की मोटरसाइकिल को टक्कर मारी और फिर पीछे करते हुए दोबारा मोटरसाइकिल को टक्कर लगी। इसके बाद प्रशांत कुमार चौधरी ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से कार की सामने की विंडस्क्रीन पर गोली चलाई, जो विवेक तिवारी के चेहरे पर लगी और उनकी मौत हो गई।

    सजा को लेकर दोनों पक्षों की दलील

    सजा पर बहस के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत से पहले से जेल में बिताई अवधि को ही पर्याप्त सजा मानने का आग्रह किया। बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपी की कोई पूर्व आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं है और वह 29 सितंबर 2018 से जेल में है। बचाव पक्ष ने दिल्ली हाईकोर्ट के Jitan Bora v. State (Govt. of NCT) Delhi मामले का भी हवाला दिया, जिसमें धारा 304 Part-II के मामले में सात वर्ष से अधिक की हिरासत को देखते हुए सजा को पहले से भुगती अवधि तक सीमित किया गया था।

    वहीं, राज्य की ओर से आरोपी के कृत्य को गंभीर और क्रूर बताते हुए धारा 304 Part-II के तहत अधिकतम सजा देने की मांग की गई। सूचनाकर्ता की ओर से भी मामले की परिस्थितियों को सजा तय करते समय ध्यान में रखने का आग्रह किया गया। अदालत को बताया गया कि आरोपी प्रशिक्षित पुलिसकर्मी था और उसे हथियार चलाने तथा व्यवहार संबंधी प्रशिक्षण प्राप्त था।

    अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के उन फैसलों का भी उल्लेख किया जिनमें गंभीर अपराधों में अत्यधिक नरमी बरतने के खिलाफ चेताया गया है और कहा गया है कि सजा अपराध की प्रकृति तथा उसे अंजाम देने के तरीके को ध्यान में रखकर तय की जानी चाहिए। State Vs. Prashant Sentence

    कोर्ट का आदेश

    सभी परिस्थितियों पर विचार करने के बाद अदालत ने प्रशांत कुमार चौधरी को IPC की धारा 304 Part-II के तहत 10 वर्ष के कठोर कारावास और ₹20,000 जुर्माने की सजा सुनाई। जांच, पूछताछ या ट्रायल के दौरान आरोपी द्वारा पहले से बिताई गई हिरासत की अवधि को सजा में समायोजित करने का निर्देश भी दिया गया है।


    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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