लिकर लाइसेंस में जवाबदेही जरूरी: सुप्रीम कोर्ट ने यूपी को शराब कारोबारी के खिलाफ दोबारा कार्रवाई की अनुमति दी
Praveen Mishra
21 April 2026 4:24 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने उत्तर प्रदेश में देशी शराब के थोक लाइसेंस से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि बिना उचित प्रक्रिया अपनाए लाइसेंस रद्द करना कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है। हालांकि, अदालत ने राज्य सरकार को नियमों के अनुसार दोबारा कार्रवाई करने की अनुमति भी दे दी है।
जस्टिस पामिडिघंटम श्री नरसिम्हा और जस्टिस अलोक अराधे की खंडपीठ ने कहा कि शराब व्यापार के नियमन के लिए लाइसेंसिंग में जवाबदेही जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और विधिक प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।
मामले का विवरण
यह मामला लाइसेंस धारक मयूर आहूजा से जुड़ा है, जिनके पास वर्ष 2020-21 के लिए बदायूं और संभल जिलों में देशी शराब के थोक विक्रय का सीएल-2 लाइसेंस था।
4 मार्च 2021 को आबकारी विभाग ने उनके परिसर का निरीक्षण किया, जिसमें कई कथित उल्लंघन पाए गए, जैसे साइनबोर्ड का अभाव, 1980 पैकेट की कमी, सीसीटीवी कैमरों की अनुपस्थिति और अग्नि सुरक्षा उपकरणों की कमी। इसके बाद 5 मार्च 2021 को उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
आरोपों से इनकार करने के बावजूद, 27 मार्च 2021 को आबकारी आयुक्त ने उनका लाइसेंस रद्द कर दिया और सुरक्षा जमा राशि जब्त कर ली। आदेश में ट्रक की जब्ती, ड्राइवर के बयान, प्राथमिकी और नकली बारकोड से राज्य को नुकसान पहुंचाने के आरोपों का भी उल्लेख किया गया।
हाईकोर्ट का फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 23 अप्रैल 2025 को लाइसेंस रद्द करने के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने पाया कि कारण बताओ नोटिस में केवल मामूली और समायोज्य उल्लंघनों का उल्लेख था, जबकि अंतिम आदेश में अतिरिक्त आरोप जोड़े गए, जिन पर लाइसेंस धारक को सुनवाई का मौका नहीं दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस निष्कर्ष से सहमति जताई कि लाइसेंस रद्द करने का आदेश कारण बताओ नोटिस के दायरे से बाहर जाकर पारित किया गया था, जिससे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ। इसलिए यह आदेश कानूनी रूप से टिक नहीं सकता।
राज्य सरकार को अनुमति
हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के आदेश से राज्य सरकार की आगे की कार्रवाई पर रोक नहीं लगनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में संशोधन करते हुए राज्य को यह अनुमति दी कि वह नए सिरे से कारण बताओ नोटिस जारी कर उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए कार्रवाई कर सकती है।
कोर्ट के निर्देश
अदालत ने निर्देश दिया कि मयूर आहूजा को अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया जाए, और उसके बाद ही कोई नया निर्णय लिया जाए।

