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बॉम्बे हाईकोर्ट COVID के कारण कामकाज के घंटे घटाए, सर्कुलर के खिलाफ वकील ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

LiveLaw News Network
15 Jan 2022 12:35 PM GMT
बॉम्बे हाईकोर्ट COVID के कारण कामकाज के घंटे घटाए, सर्कुलर के खिलाफ वकील ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
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मुंबई के एक वकील ने बॉम्बे हाई कोर्ट के एक सर्कुलर को रद्द करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

सर्कुलर में शहर और राज्य में COVID-19 मामलों में वृद्धि के कारण मुंबई में कामकाज को केवल तीन घंटे तक सीमित कर दिया गया है। राज्य की सभी अदालतों में वर्चुअल सुनवाई को लागू करने की बात की गई है।

10 जनवरी, 2022 के मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार, हाईकोर्ट सोमवार से शुक्रवार तक दोपहर 12 बजे से दोपहर 3 बजे तक बिना लंच ब्रेक के काम करेगा। यह व्यवस्था 11 जनवरी से 28 जनवरी तक लागू होगी। बॉम्बे हाईकोर्ट की प्रशासनिक कमेटी ने अन्य हितधारकों जैसे नागरिक निकाय प्रमुख के साथ बैठक के बाद निर्देश जारी किया।

भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत अधिवक्ता घनश्याम उपाध्याय द्वारा दायर जनहित याचिका में एसओपी को "अवास्तविक" और "अनुचित" कहा गया है। उन्होंने कहा कि अदालतों को काम के घंटों को कम किए बिना वर्चुअल सुनवाई के माध्यम से कामकाजी बनाया जा सकता है।

याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट के काम के घंटे कम होने के कारण वकीलों और वादियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। याचिका में कहा गया है, "उनके मौलिक अधिकारों को खतरे में डाला गया और उनका उल्लंघन किया गया, जो बहुत चिंता का विषय है और सार्वजनिक महत्व का है।"

इसलिए, उन्होंने 3 और 10 जनवरी, 2022 के एसओपी को रद्द करने की मांग की है और बॉम्बे हाईकोर्ट को दिशा-निर्देश बनाने और राज्य में सभी अदालतों के वर्चुअल कामकाज को सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की है।

याचिका में कहा गया है कि वर्चुअल सुनवाई से मामलों के निपटान की दर में वृद्धि हो सकती है और यह अदालती कार्यवाही का भविष्य है।

एसओपी के अनुसार, 3 जनवरी से, मुंबई, पुणे, रायगढ़ और अलीबाग की अधीनस्थ अदालतों को 50% कर्मचारियों के साथ सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच काम करने और फिजिकल सुनवाई के माध्यम से रिमांड, जमानत और जरूरी मामलों की सुनवाई करने का निर्देश दिया गया है। अधीनस्थ न्यायालयों के पास वस्तुतः साक्ष्य दर्ज करने का विवेकाधिकार है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि इस तरह के वर्चुअल कामकाज के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा उनके पास उपलब्ध नहीं है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि यह शर्मनाक है कि देश की वित्तीय राजधानी और इसके आसपास के शहरों की अधीनस्थ अदालतों में सुनवाई के लिए बुनियादी ढांचे की कमी है.."

याचिका में कहा गया है कि एसओपी जारी होने के बाद अदालत में सुनवाई ठप पड़ी है। वह हाल ही में सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश का उदाहरण देते हैं जो वकीलों को अदालत में प्रवेश किए बिना मामलों पर बहस करने के लिए कहते हैं।

‌हाईकोर्ट के कामकाज के घंटे घटाए

याचिकाकर्ता ने जोर देकर कहा कि हाईकोर्ट के जज और कर्मचारी ऑनलाइन सुनवाई से अच्छी तरह परिचित हैं, जो सभी संबंधितों के लिए प्रभावी और फायदेमंद साबित हुए हैं। इसके अलावा, COVID-19 के नए वेरिएंट का हल्का प्रभाव पड़ता है, और इसके मरनो वालों की संख्या नगण्य है

य‌ाचिका में कहा गया है, जब आम चुनाव/विधानसभा चुनाव के लिए रैलियां आयोजित की जा सकती हैं और जो वास्तव में, "वर्चुअल प्लेटफॉर्म" के माध्यम से आयोजित की जा रही हैं, तो इसका कोई कारण नहीं है कि वर्चुअल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अदालत की कार्यवाही क्यों नहीं की जा सकती है।

याचिका पढ़ने/डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें

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