विधानसभा में उदयनिधि स्टालिन की सनातन धर्म के खिलाफ टिप्पणियों का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
Shahadat
16 May 2026 7:08 PM IST

वकील ने एक अर्जी दाखिल की, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के ध्यान में तमिलनाडु के नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन की सनातन धर्म के खिलाफ हाल ही में की गई टिप्पणियों को लाया गया, जिसमें उन्होंने सनातन धर्म को खत्म करने की मांग की थी।
बता दें, DMK के उदयनिधि तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के बेटे हैं। वह सितंबर 2023 में अपनी उन टिप्पणियों के कारण विवादों में घिर गए थे, जिनमें उन्होंने 'सनातन धर्म' की तुलना 'मलेरिया' और 'डेंगू' जैसी बीमारियों से की थी और इसे खत्म करने की वकालत की थी। उन्होंने इसके पीछे यह तर्क दिया था कि सनातन धर्म जाति व्यवस्था और ऐतिहासिक भेदभाव पर आधारित है। इससे न केवल एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ, बल्कि उदयनिधि के खिलाफ कई आपराधिक शिकायतें भी दर्ज की गईं और सुप्रीम कोर्ट में उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कई याचिकाएं भी दाखिल की गईं।
यह IA (अंतर्वर्ती अर्जी) अवमानना याचिका के संदर्भ में दाखिल की गई। यह अवमानना याचिका 'शाहीन अब्दुल्ला बनाम भारत संघ' मामले में दाखिल रिट याचिका से जुड़ी है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने 'हेट स्पीच' (द्वेषपूर्ण भाषण) से जुड़े मामलों में स्वतः संज्ञान लेते हुए FIR दर्ज करने का निर्देश दिया था। यह अवमानना याचिका वकील अमिता सचदेवा ने दाखिल की थी, जिसमें उन्होंने यह आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पुलिस ने स्टालिन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
इस अवमानना याचिका को 29 अप्रैल को जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया था। इसी मामले में अब एक नई अर्जी दाखिल की गई, जिसमें कुछ नए तथ्य पेश करते हुए यह आरोप लगाया गया कि 12 मई को तमिलनाडु विधानसभा के पहले सत्र की कार्यवाही के दौरान स्टालिन ने एक बार फिर सनातन धर्म को खत्म करने या उसका उन्मूलन करने की मांग की थी।
कथित तौर पर उन्होंने कहा था:
"सनातन धर्म, जो लोगों को आपस में बांटता है, उसे निश्चित रूप से खत्म कर देना चाहिए।"
याचिकाकर्ता/आवेदक का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई जारी होने और कोर्ट द्वारा पहले भी उनकी टिप्पणियों पर अपनी नाराजगी जाहिर किए जाने के बावजूद, स्टालिन ने कथित तौर पर इसी तरह के बयान देना जारी रखा। याचिकाकर्ता का कहना है कि स्टालिन का यह रवैया न्यायिक प्रक्रिया की जानबूझकर की गई अवहेलना के समान है।
इस मामले पर 19 मई को विचार किया जाएगा।
स्टालिन ने अपने खिलाफ दर्ज सभी FIR को एक ही जगह (एक साथ) सुनवाई के लिए इकट्ठा करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट ने स्टालिन को निचली अदालतों में चल रही सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से (खुद) पेश होने से छूट प्रदान की थी। 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि उसकी अनुमति के बिना उनके खिलाफ कोई और FIR/शिकायत दर्ज नहीं की जाएगी।
मद्रास हाईकोर्ट में याचिकाएं भी दायर की गईं, जिनमें इस बात को चुनौती दी गई कि अपने विवादित बयानों के बावजूद स्टालिन किस आधार पर सार्वजनिक पद पर बने हुए हैं। मद्रास हाईकोर्ट ने स्टालिन से पूछा था कि 'सनातन धर्म' के खिलाफ विवादित बयान देने से पहले उसे समझने के लिए उन्होंने क्या शोध किया था।
Case : Amita Sachdeva v Udhayanidhi Stalin | Contempt Petition (c) 1235/2023

