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"खालिस्तानियों ने विरोध प्रदर्शनों में घुसपैठ की" : अटॉर्नी जनरल ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने हलफनामा मांगा

LiveLaw News Network
12 Jan 2021 9:41 AM GMT
खालिस्तानियों ने विरोध प्रदर्शनों में घुसपैठ की : अटॉर्नी जनरल ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने हलफनामा मांगा
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार से तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों के बीच प्रतिबंधित संगठनों की कथित उपस्थिति पर हलफनामा मांगा है जब अटॉर्नी जनरल ने प्रस्तुत किया कि "खालिस्तानियों ने विरोध प्रदर्शनों में घुसपैठ की है।

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने प्रस्तुत किया कि वह कल इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) से आवश्यक इनपुट के साथ हलफनामा दायर करेंगे।

भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने किसानों के विरोध प्रदर्शनों और कृषि कानूनों पर याचिकाओं के एक बैच की सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।

कंसोर्टियम ऑफ इंडियन फार्मर्स एसोसिएशन (CIFA) नामक एक एसोसिएशन की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस नरसिम्हा ने कहा कि उनके मुवक्किल कृषि कानूनों का समर्थन करने के लिए मामले में हस्तक्षेप करना चाहते हैं।

एसोसिएशन के हस्तक्षेप आवेदन में एक आरोप था कि "सिख्स फॉर जस्टिस" जैसे समूह विरोध प्रदर्शनों में शामिल हैं। नरसिम्हा ने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रतिबंधित संगठन मौजूद हैं।

इस बिंदु पर, सीजेआई ने अटॉर्नी जनरल से पूछा कि क्या ऐसे आरोपों की पुष्टि की जा सकती है।

सीजेआई ने अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल से पूछा,

"नरसिम्हा ने आरोप लगाया है कि एक प्रतिबंधित संगठन है जो विरोध प्रदर्शनों में मदद कर रहा है। क्या आप इसकी पुष्टि करेंगे?"

एजी ने जवाब दिया,

"हमने कहा है कि खालिस्तानियों ने विरोध प्रदर्शनों में घुसपैठ की है।"

सीजेआई ने एजी से कहा,

"अगर एक प्रतिबंधित संगठन द्वारा घुसपैठ की जा रही है, और कोई व्यक्ति रिकॉर्ड पर यहां आरोप लगा रहा है, तो आप इसकी पुष्टि करें। आप कल तक एक हलफनामा दायर करें।"

बाद में, सुनवाई के अंत में , सॉलिसिटर जनरल ने पीठ को बताया कि विरोध प्रदर्शनों में कुछ गैर-किसान तत्व हैं जो किसानों को गुमराह करने के लिए कानूनों के बारे में गलत जानकारी फैला रहे हैं। सोमवार को इस मामले में केंद्र सरकार द्वारा दायर हलफनामे में भी इसी तरह का बयान था। हलफनामे में कहा गया है कि "जानबूझकर गलत धारणा बनाई गई है जो विरोध स्थल पर मौजूद गैर-किसान तत्वों द्वारा व्यवस्थित रूप से बनाई गई है और ये मीडिया / सोशल मीडिया का उपयोग करके" किसानों के मन में कृषि कानूनों के बारे में गलतफहमी पैदा करने के लिए है।

सुनवाई के अंत में, सीजेआई ने कहा कि अदालत अगले आदेश तक तीनों कृषि कानूनों के कार्यान्वयन पर रोक का आदेश पारित करेगी :

• 'किसान व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम, 2020'

• किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन समझौता और कृषि सेवा अधिनियम, 2020

• आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम, 2020

पीठ ने यह भी कहा कि वह प्रदर्शनकारी किसानों और सरकार के बीच बातचीत करने के लिए एक समिति बना रही है ।

सीजेआई एसए बोबडे ने कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी, भूपिंदर सिंह मान, अध्यक्ष बीकेयू और अखिल भारतीय समन्वय समिति, प्रमोद कुमार जोशी (निदेशक दक्षिण एशिया अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति), अनिल घनवत(शेतकारी संगठन) के नामों का उल्लेख किया। उम्मीद है कि सरकार और प्रदर्शनकारी किसानों के बीच गतिरोध का समाधान होगा। दिन के अंत तक न्यायालय द्वारा एक पूर्ण आदेश जारी किया जाएगा।

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