अनधिकृत निर्माण के अधिकतर मामले दिल्ली और मुंबई से ही आते हैं: जस्टिस पारदीवाला

Praveen Mishra

5 Dec 2025 9:26 PM IST

  • अनधिकृत निर्माण के अधिकतर मामले दिल्ली और मुंबई से ही आते हैं: जस्टिस पारदीवाला

    सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे.बी. पारडीवाला ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि अनधिकृत निर्माण और भवन-नक्शा उल्लंघन से जुड़े विवाद सबसे अधिक दिल्ली और मुंबई से सामने आते हैं, जबकि अन्य राज्यों में ऐसे मामले बहुत कम दिखाई देते हैं। यह टिप्पणी उस मामले की सुनवाई के दौरान की गई, जिसमें एक बिल्डर ने मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के पास बिना संशोधित स्वीकृत योजना लिए अतिरिक्त मंजिलें बना दी थीं।

    जस्टिस जे.बी. पारडीवाला और जस्टिस पी.बी. वराले की खंडपीठ एयरपोर्ट अथॉरिटी की आपत्तियों से जुड़े विवाद पर विचार कर रही थी। कोर्ट ने पक्षकारों को हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया और वहां मामले की शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। आदेश में कहा गया,

    “चूंकि बिल्डर ने बिना संशोधित योजना स्वीकृत कराए चार अतिरिक्त मंजिलें बना दी हैं और एयरपोर्ट प्राधिकरण ने कड़ी आपत्ति जताई है, इसलिए हाईकोर्ट सभी पक्षों को सुनकर मामले का जल्द निपटारा करे।”

    आदेश लिखवाने के बाद जस्टिस पारडीवाला ने दिल्ली और मुंबई में ऐसे मामलों की लगातार बढ़ती संख्या पर चिंता जताई। उन्होंने कहा,

    “आप बिना संशोधित प्लान के चार मंजिलें बना देते हैं। दिल्ली में हजारों होमबायर्स पीड़ित हैं और मुंबई में तो रीडेवलपमेंट के नाम पर ऐसी समस्याएँ आम हैं। दिल्ली और मुंबई के अलावा किसी भी राज्य में इस तरह की लिटिगेशन नहीं दिखती। गुजरात में ऐसा एक भी मामला देखा है? एक भी नहीं! वहां बिल्डर्स और डेवलपर्स की प्रतिष्ठा देखिए। लेकिन मुंबई में बिना प्लान के निर्माण कर देते हैं!”

    जस्टिस पारडीवाला ने एयरपोर्ट प्राधिकरण की ओर भी सवाल उठाया कि निर्माण होते समय वह सक्रिय क्यों नहीं हुए। उन्होंने पूछा,

    “जब 13वीं, 14वीं, या 16वीं मंजिल बन रही थी, तब आप कहाँ थे?”

    एयरपोर्ट प्राधिकरण ने उत्तर दिया कि उन्होंने अवैध निर्माण को तोड़ने का प्रयास किया था, लेकिन वे सफल नहीं हो पाए।


    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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