July Student Protests: हाई-पावर्ड जांच समिति ने सुप्रीम कोर्ट को बताया- शिकायत पोर्टल लॉन्च के लिए तैयार
Shahadat
14 Oct 2026 9:37 AM IST

NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में अन्य गड़बड़ियों को लेकर जुलाई में हुए 'जेन ज़ेड' (Gen Z) विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा के आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई हाई-पावर्ड जांच समिति ने कोर्ट को बताया कि शिकायत पोर्टल लॉन्च के लिए तैयार है।
समिति ने कहा कि पोर्टल लॉन्च होने के बाद इसके बारे में बड़े पैमाने पर जानकारी देने के लिए प्रमुख समाचार पत्रों में सार्वजनिक सूचनाएं प्रकाशित की जाएंगी।
HPEC ने कोर्ट के सामने एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की, जिसमें बताया गया कि पोर्टल को डिज़ाइन और विकसित करने के लिए नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) को काम पर लगाया गया। इस काम के लिए दो टेम्प्लेट दिए गए - एक पीड़ित प्रदर्शनकारियों के लिए और दूसरा पीड़ित पुलिसकर्मियों के लिए।
लेकिन HPEC के सुचारू कामकाज के लिए कुछ बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) की मदद की ज़रूरत थी, जिसके लिए गृह मंत्रालय (MHA) से कुछ अनुरोध किए गए।
स्टेटस रिपोर्ट देखने के बाद चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने गृह मंत्रालय के माध्यम से NIC को निर्देश दिया कि वह HPEC की ज़रूरतों के अनुसार पोर्टल विकसित करे और यह सुनिश्चित करे कि गवाहों की सुरक्षा के लिए तय सभी उपाय इसमें शामिल हों।
सुनवाई के दौरान, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भरोसा दिलाया कि अगर कोई सुविधा देनी बाकी रह गई है तो उसे बिना किसी देरी के उपलब्ध कराया जाएगा। कोर्ट ने अपनी ओर से गृह मंत्रालय को सभी ज़रूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
उल्लेखनीय है कि समिति की स्टेटस रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि शिकायत पोर्टल विकसित करने के लिए NIC को निर्देश दिया गया कि वह संवेदनशील गवाहों की सुरक्षा के लिए शिकायतों, सबूतों और बयानों की गोपनीयता और पहचान गुप्त रखने (एनॉनिमिटी) को सुनिश्चित करे।
बता दें, कोर्ट ने जुलाई में नई दिल्ली के जंतर-मंतर और देश भर की अन्य जगहों पर छात्रों के प्रदर्शनों के दौरान हिंसा के आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच करने के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया था।
समिति से कहा गया कि वह प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस और अर्धसैनिक बलों द्वारा अत्यधिक और ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग के आरोपों, और साथ ही सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ प्रदर्शनकारियों द्वारा कथित हिंसा और उन्हें लगी चोटों, दोनों की जांच करे।
HPEC की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी को करनी थी। इसके अन्य सदस्यों में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस शलिंदर कौर, CBI के पूर्व डायरेक्टर ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के रिटायर्ड डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस डॉ. एल.आर. बिश्नोई शामिल हैं।
Case Title : Shailendra Mani Tripathi v Union of India and others

