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जजों के वेतन में संशोधन: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अगर राज्य सरकारे वेतन आयोग की रिपोर्ट का जवाब नहीं देंगी तो मुख्य सचिवों को किया जाएगा समन

LiveLaw News Network
4 Nov 2020 11:42 AM GMT
जजों के वेतन में संशोधन: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अगर राज्य सरकारे वेतन आयोग की रिपोर्ट का जवाब नहीं देंगी तो मुख्य सचिवों को किया जाएगा समन
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक आज्ञासूचक आदेश पारित किया कि राज्य सरकारों को दूसरे राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग की सिफारिशों पर को पांच सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करना चाहिए।

भारत के मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ ने आदेश दिया कि यदि राज्य उक्त समय के भीतर जवाब दाखिल नहीं करते हैं, तो मुख्य सचिवों को व्यक्तिगत रूप से अधिसूचित तिथि पर अदालत में पेश होना होगा।

पीठ ने इस तथ्य पर आश्चर्य व्यक्त किया कि 20 राज्य फरवरी 2020 में वेतन आयोग द्वारा प्रस्तुत अंतिम रिपोर्ट का जवाब देने में विफल रहे हैं, जिसने देशभर के न्यायिक अधिकारियों को वेतन, पेंशन और भत्तों में बढ़ोतरी की सिफारिश की थी।

"हम आश्चर्यचकित हैं कि 20 राज्यों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दर्ज नहीं की हैं। यह मामला देश की अधीनस्थ न्यायपालिका के लिए महत्वपूर्ण है।", सीजेआई एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और वी रामासुब्रमनियन की खंडपीठ ने ऑल इंडिया जजेज एसोश‌िएशन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य में पारित आदेश में ये टिप्पणियां की।

पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति पीवी रेड्डी की अध्यक्षता में आयोग का कार्यकाल भी 31 जनवरी, 2021 तक बढ़ा दिया।

पीठ ने आगे निर्देश दिया कि विशेषज्ञों और सलाहकारों को भुगतान के लिए राशि की मंजूरी के लिए आयोग द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों पर कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही, जस्टिस वी रेड्डी और वरिष्ठ अधिवक्ता आर बसंत (आयोग के सदस्य) को उचित मानदेय का भुगतान किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने आयोग के सदस्य-सचिव विनय कुमार गुप्ता का कार्यकाल भी बढ़ा दिया, जो दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा से प्रतिनियुक्ति पर 31 जनवरी, 2021 तक है।

इसके अलावा, एमिकस क्यूरिया सीनियर एडवोकेट पीएस नरसिम्हा के अनुरोध के आधार पर, पीठ ने मामले के महत्व को देखते हुए अटॉर्नी जनरल को नोटिस जारी किया। आयोग ने न्यायिक अधिकारियों के वेतन, पेंशन और भत्तों में वृद्धि में सिफारिश की अपनी अंतिम रिपोर्ट 29 जनवरी, 2020 को प्रस्तुत की थी।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा ऑल इंडिया जजेज एसोश‌िएशन के मामले में दिए गए आदेशों के अनुसार आयोग का गठन किया गया था। 16 नवंबर, 2017 को कानून और न्याय मंत्रालय ने उस संबंध में अधिसूचना जारी की थी।

आयोग द्वारा की गई सिफारिशें पूरे देश में न्यायिक अधिकारियों पर लागू होती हैं।

आयोग की प्रमुख सिफारिशें इस प्रकार हैं-

वेतन

आयोग द्वारा विकसित संशोधित वेतन संरचना के अनुसार, जूनियर सिविल जज / फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट जिसका आरंभिक वेतन रु 27,700 रुपए है, अब 77,840 रुपए होगा।

वरिष्ठ सिविल जज के अगले उच्च पद के लिए वेतन 1,10,000 से शुरु होता है और जिला जज के लिए 1,44, 000 रुपए होगा।

एक जिला न्यायाधीश (एसटीएस) को जो उच्चतम वेतन मिलेगा वह 2,24,100 रुपए है।

इसमें पे मैट्रिक्स को अपनाने की सिफारिश की गई है, जो मौजूदा वेतन में 2.81 के गुणक को लागू करके तैयार किया गया है, जो उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन के प्रतिशत में वृद्धि के साथ है।

पेंशन

प्रस्तावित संशोधित वेतनमान के आधार पर अंतिम आहरित वेतन का 50% पेंशन की सिफारिश की जाती है, जो एक जनवरी 2016 से प्रभावी होगी। फेमिली पेंशन अंतिम आहरित वेतन का 30% होगी। 75 वर्ष की आयु (80 वर्ष के बजाय) पूरा होने पर पेंशन की अतिरिक्त मात्रा शुरू होती है और उसके बाद विभिन्न चरणों में प्रतिशत में वृद्धि की जाती है।

सेवानिवृत्ति की ग्रेच्युटी और डेथ ग्रेच्युटी की मौजूदा सीमा 25% बढ़ा दी जाए, जब डीए 50% तक पहुंच जाए।

पेंशनरों / पारिवारिक पेंशनरों की सहायता के लिए जिला न्यायाधीशों द्वारा नोडल अधिकारी नामित किए जाएं।

नई पेंशन योजना (एनपीएस) को बंद करने की सिफारिश की गई है, जो 2004 के दौरान या उसके बाद सेवा में प्रवेश करने वालों के लिए लागू की जा रही है। पुरानी पेंशन प्रणाली, जिसे पुनर्जीवित किया जाना अधिक लाभदायक है।

भत्ता

मौजूदा भत्तों में पर्याप्त वृद्धि की गई है और कुछ नई सुविधाएं जोड़ी गई हैं। हालांकि, CCA को बंद करने का प्रस्ताव है। चिकित्सा सुविधाओं में सुधार और प्रतिपूर्ति प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सिफारिशें की जाती हैं। पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनरों को भी चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जाती है।

कुछ नए भत्ते जैसे बच्चों की शिक्षा भत्ता, घर के लिए व्यवस्थित भत्ता, कार पूल सुविधा के बदले में परिवहन भत्ता प्रस्तावित किया गया है। HRA ने सभी राज्यों में समान रूप से वृद्धि का प्रस्ताव दिया गया है। अनुशंसित सरकारी क्वार्टरों का उचित रखरखाव सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।

सुप्रीम कोर्ट को हितधारकों की सुनवाई के बाद सिफारिशों के कार्यान्वयन के बारे में निर्देश जारी करना होगा।

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