प्रदर्शनों की कवरेज के दौरान पुलिस पर मारपीट का आरोप: MHA सचिव और दिल्ली पुलिस कमिश्नर के खिलाफ अवमानना याचिका
Shahadat
13 Oct 2026 9:30 AM IST

डिजिटल समाचार प्लेटफॉर्म 'मोलिटिक्स' (Molitics) के 26 वर्षीय पत्रकार अमान रस्तोगी ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की।
याचिका में 'शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी बनाम गोविंद मोहन व अन्य' (W.P.(C) डायरी नंबर 63560/2026 में अवमानना याचिका (C) डायरी नंबर 63801/2026) मामले में 11.10.2026 के कोर्ट के आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने का आरोप लगाया गया। रस्तोगी अपने लिए 'दे/देम' (they/them) सर्वनाम का इस्तेमाल करते हैं।
उस आदेश में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने सॉलिसिटर जनरल के उस आश्वासन को दर्ज किया कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों के काम में कोई बाधा नहीं डाली जाएगी।
पैराग्राफ 16(f) में कोर्ट ने निर्देश दिया,
"उनके पेशेवर कर्तव्यों के निर्वहन में किसी भी तरह से बाधा नहीं डाली जाएगी।"
याचिका में कहा गया कि रस्तोगी को सबसे पहले 10.10.2026 को कनॉट प्लेस / बाबा खड़क सिंह मार्ग के पास विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग करते समय हिरासत में लिया गया। उन्होंने अपना 'मोलिटिक्स' प्रेस आईडी स्पष्ट रूप से लगाया हुआ। नागरिकों (जिनमें एक 16 वर्षीय नाबालिग भी शामिल था) को हिरासत में लिए जाने के बारे में पुलिस से सवाल पूछने के बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया; आरोप है कि उनके साथ बदसलूकी की गई और उन्हें DTC बस में बिठा दिया गया। हिरासत का एक वीडियो, जिसमें रस्तोगी बस की खिड़की से अपना प्रेस आईडी दिखाते हुए दिख रहे हैं, सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया था; इसे पत्रकार राधिका बोरडिया ने भी शेयर किया।
याचिका में आगे आरोप लगाया गया कि 11.10.2026 को, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, रस्तोगी को दोपहर लगभग 3:30 बजे मिंटो रोड के पास फिर से हिरासत में लिया गया। उस समय वे बस अपनी मोटरसाइकिल से कनॉट प्लेस की ओर जा रहे थे। आरोप है कि पुलिस ने उन्हें पिछले दिन की घटना के कारण पहचान लिया, उन्हें रिकॉर्डिंग करने से रोका और उनका फोन ले लिया। आरोप है कि फोन को बिना किसी ज़ब्ती मेमो (seizure memo) के लगभग तीन घंटे तक अपने पास रखा गया और बाद में क्षतिग्रस्त हालत में लौटाया गया।
आरोप है कि रस्तोगी का प्रेस ID कार्ड सीवर में फेंक दिया गया। याचिका में कहा गया कि किसी भी दिन हिरासत में लेने का कोई मेमो नहीं बनाया गया।
याचिका में तर्क दिया गया कि रस्तोगी ने दिल्ली पुलिस की 05.10.2026 की "पत्रकारों के लिए गाइडलाइंस" का पूरी तरह पालन किया था, जिसमें पत्रकारों से ID कार्ड को साफ़ तौर पर दिखाने के लिए कहा गया। इसमें कहा गया कि हिरासत में लेने की कार्रवाई ने पैराग्राफ 16(f) और पैराग्राफ 15 में दर्ज सॉलिसिटर जनरल के आश्वासन, दोनों का उल्लंघन किया और साथ ही अनुच्छेद 14, 19(1)(a), 19(1)(g) और 21 का भी उल्लंघन किया।
जिन लोगों पर अवमानना का आरोप है, उनमें केंद्रीय गृह सचिव, दिल्ली पुलिस कमिश्नर, DCP (नई दिल्ली जिला) और कमला मार्केट पुलिस स्टेशन के SHO शामिल हैं।
याचिका में ये मांगें की गईं:
- अवमानना की कार्यवाही शुरू करना
- दिल्ली पुलिस कमिश्नर से एक व्यक्तिगत हलफनामा, जिसमें हिरासत में लेने के कानूनी अधिकार, शामिल कर्मियों के नाम और बेल्ट नंबर, DD/GD एंट्री, हिरासत या ज़ब्ती का मेमो न बनाने के कारण, और यह जानकारी हो कि क्या मिंटो रोड BNSS की धारा 163 के तहत किसी निषेधाज्ञा (prohibitory order) के दायरे में आता था
- 13.10.2026 को लिस्टेड मुख्य मामले के साथ इसे जोड़ना

