सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस कमिश्नर का तर्क: जंतर-मंतर सार्वजनिक सड़क, इसे कभी भी विरोध-प्रदर्शन की जगह नहीं बनाया जाना चाहिए

  • सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस कमिश्नर का तर्क: जंतर-मंतर सार्वजनिक सड़क, इसे कभी भी विरोध-प्रदर्शन की जगह नहीं बनाया जाना चाहिए

    दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया, जिसमें जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की जगह (प्रोटेस्ट साइट) के रूप में हटाए जाने के फैसले का बचाव किया गया। उन्होंने कहा कि यह फैसला जनहित को ध्यान में रखते हुए लिया गया था। साथ ही सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के अनुसार, कोई भी व्यक्ति किसी खास जगह पर विरोध-प्रदर्शन करने के अपने 'पूर्ण अधिकार' का दावा नहीं कर सकता।

    दिल्ली पुलिस कमिश्नर का कहना है कि जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की जगह के रूप में हटाए जाने के बाद प्रदर्शनों के लिए 3 अन्य जगहों को तय किया गया है - रामलीला मैदान (सेंट्रल दिल्ली), सीबीडी ग्राउंड (ईस्ट दिल्ली) और बुराड़ी ग्राउंड (नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली)।

    स्वाति सिंह द्वारा दायर याचिका के जवाब में कमिश्नर अनुराग कुमार ने कहा,

    "सबसे पहले यह बताना जरूरी है कि जंतर-मंतर कोई 'विरोध-प्रदर्शन की जगह' नहीं है, बल्कि असल में सार्वजनिक सड़क है। चूंकि यह एक सार्वजनिक सड़क है, इसलिए इसे कभी भी विरोध-प्रदर्शन की जगह घोषित नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इसका इस्तेमाल आज भी (भले ही कुछ कठिनाई के साथ) एक सार्वजनिक सड़क के रूप में हो रहा है।"

    हलफनामे के अनुसार, तकनीक और सोशल मीडिया के आने के बाद विरोध-प्रदर्शन की जगह का सरकार के केंद्र (सत्ता के केंद्र) के करीब होना अब "प्रासंगिक नहीं रहा और इसका कोई मतलब नहीं रह गया"।

    हलफनामे में कहा गया कि जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की जगह के रूप में हटाने का फैसला दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने "सभी जरूरी पहलुओं और मानदंडों पर विचार करने के बाद" लिया है। साथ ही, भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा गठित समिति की सिफारिशों पर भी गौर किया गया। बताया गया कि यह फैसला सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए लिया गया।

    दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने इस दावे को पूरी तरह से "गलत" बताया कि जंतर-मंतर को 9 अक्टूबर के कोर्ट के आदेश के बाद विरोध-प्रदर्शन की जगह से हटाया गया (जिस आदेश में जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की जगह से हटाने को चुनौती देने वाली याचिका पर अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया और उनसे अन्य जगहों पर विचार करने के लिए कहा गया)।

    आगे आगे कहा गया,

    "यह बताया जाता है कि बदली हुई परिस्थितियों को देखते हुए विरोध प्रदर्शनों के लिए तय की गई जगह में बदलाव का प्रस्ताव काफी समय से शपथकर्ता और केंद्र सरकार के विचाराधीन था। पिछले 6 वर्षों में ज़मीनी हालात काफी बदल गए हैं... जंतर-मंतर के आस-पास के इलाके में सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा, ट्रैफ़िक नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन, कानून-व्यवस्था, संवेदनशील और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा, तथा स्थानीय निवासियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सुविधा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। नए संसद भवन के नज़दीक होने के कारण, आस-पास के इलाकों में गतिविधियों को विनियमित (रेगुलेट) करने का महत्व और भी बढ़ गया है।"

    शपथ-पत्र में कहा गया कि यह निर्णय लेने से पहले, 26.08.2026 के एक कार्यालय ज्ञापन (ऑफ़िस मेमोरेंडम) के ज़रिए एक समिति का गठन किया गया था। इसका उद्देश्य "जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए एक निर्धारित स्थल के रूप में बनाए रखने की उपयुक्तता की जांच करना और इस काम के लिए अन्य वैकल्पिक जगहों का सुझाव देना" है।

    इस समिति ने सर्वसम्मति से यह सिफारिश की कि जंतर-मंतर अब विरोध प्रदर्शनों और धरनों के लिए एक उपयुक्त जगह नहीं रह गई है।

    Case Title : SWATY SINGH V. UNION OF INDIA

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