क्या FIR में शुरू में सिर्फ़ IPC अपराधों का ज़िक्र होने पर PC Act की धारा 17A की मंज़ूरी ज़रूरी है? सुप्रीम कोर्ट करेगा विचार

Shahadat

6 Jan 2026 10:23 AM IST

  • क्या FIR में शुरू में सिर्फ़ IPC अपराधों का ज़िक्र होने पर PC Act की धारा 17A की मंज़ूरी ज़रूरी है? सुप्रीम कोर्ट करेगा विचार

    सुप्रीम कोर्ट इस बात की जांच करेगा कि क्या सिर्फ़ IPC अपराधों के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ़ दर्ज मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) की धारा 17A के तहत पहले से मंज़ूरी लेना ज़रूरी है, जब बाद में पता चलता है कि उनमें सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं।

    यह मामला तब सामने आया, जब जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कर्नाटक सरकार की उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें एक आदेश को चुनौती दी गई थी। इस आदेश में पूर्व-MLC डी.एस. वीरैया के खिलाफ़ एक आपराधिक मामला रद्द कर दिया गया। वीरैया पर 2021 में डी देवरराज उर्स ट्रक टर्मिनल लिमिटेड (DDUTLL) के चेयरमैन रहते हुए 47.1 करोड़ रुपये के कथित गबन का आरोप था।

    संक्षेप में मामला

    यह मामला शुरू में सिर्फ़ IPC अपराधों के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ़ दर्ज किया गया। बाद में सरकारी कर्मचारियों की संलिप्तता पाए जाने पर अभियोजन पक्ष ने PC Act के तहत अपराधों को शामिल किया। दावा किया गया कि बाद में ज़रूरी मंज़ूरी ले ली गई, लेकिन हाईकोर्ट ने वीरैया के खिलाफ़ मामला रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि दोनों कानूनों [धारा 409 IPC और PC Act की धारा 13(1)(a)] के तहत अपराध मूल रूप से एक जैसे थे और अभियोजन पक्ष ने PC Act की धारा 17A की सख्ती से बचने की कोशिश की। यह माना गया कि सरकारी कर्मचारी के कर्तव्य से संबंधित कामों के लिए IPC के तहत FIR दर्ज करने के लिए PC Act की धारा 17A के तहत पहले से मंज़ूरी ज़रूरी है।

    इस आदेश को चुनौती देते हुए राज्य के वकील ने आज तर्क दिया कि हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A को समझने में गलती की, जबकि आरोप सिर्फ़ IPC से संबंधित थे। कोर्ट के एक खास सवाल पर कि क्या यह PC एक्ट का मामला है या नहीं, वकील ने बताया कि आज की तारीख में वीरैया के खिलाफ़ मामला PC Act के तहत नहीं है।

    Case Title: THE STATE OF KARNATAKA BY WILSON GARDEN P.S. Versus D.S. VEERAIAH AND ANR., Diary No. 64940-2025

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