CEC के खिलाफ प्रदर्शन वाले दिन दिल्ली में इंटरनेट बंद करने को सही ठहराते हुए केंद्रीय सचिव ने कहा, 'यह कदम उचित था'
Shahadat
15 Oct 2026 10:28 AM IST

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन मामले में केंद्रीय गृह सचिव ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया। इसमें उन्होंने अवमानना नोटिस (Contempt Notice) रद्द करने की मांग की और कहा कि स्थिति को देखते हुए 9 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक केवल मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद की गई थीं, और यह कदम "उचित" (Proportionate) था।
यह हलफनामा वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा दायर अवमानना याचिका के जवाब में दिया गया। उन्होंने केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन (IAS), दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार (IPS) और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) की चेयरपर्सन डी. थारा (IAS) के खिलाफ यह याचिका दायर की, जिसमें आरोप लगाया गया कि इन अधिकारियों ने जानबूझकर कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया।
हलफनामे में कहा गया कि 9 अक्टूबर को जारी अधिसूचना, शांति बनाए रखने और सार्वजनिक व्यवस्था में किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए उठाए गए कदमों में से एक थी। इसमें बताया गया कि एक संगठन ने बिना जरूरी अनुमति लिए विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया, जबकि उन्हें अनुमति देने से मना कर दिया गया। यह कदम 'मजदूर किसान शक्ति संगठन बनाम भारत संघ' (2018) मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए कानून के खिलाफ था। साथ ही, 20 जुलाई 2026 को दिल्ली पुलिस को मिले हालिया अनुभवों को देखते हुए भी यह कदम उठाना जरूरी हो गया।
हलफनामे में उल्लेख किया गया कि दिल्ली पुलिस की ओर से 1 दिन के लिए (10 अक्टूबर की रात 10 बजे तक) मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद करने का अनुरोध मिला था।
हलफनामा में कहा गया,
"इस अनुरोध पर कानून के अनुसार विचार किया गया। स्थिति की गंभीरता और राष्ट्रीय राजधानी में सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने से रोकने की जरूरत को देखते हुए इसे एक उचित कदम माना गया।"
हलफनामा दाखिल करने वाले अधिकारी ने बिना शर्त माफी मांगते हुए स्पष्ट किया कि रायसीना हिल के 4 किलोमीटर के दायरे में आने वाले इलाकों में 9 अक्टूबर की रात 10 बजे से 10 अक्टूबर की रात 10 बजे तक, यानी एक दिन के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद की गईं। यह स्पष्ट किया गया कि केवल सेल्युलर इंटरनेट सेवाएं ही निलंबित थीं; वाई-फाई और ब्रॉडबैंड जैसी गैर-सेल्युलर इंटरनेट सेवाएं या दूरसंचार सेवाएं निलंबित नहीं थीं।
अदालत की अवमानना का नोटिस रद्द करने का अनुरोध करते हुए उन्होंने कहा कि अदालत के निर्देशों का कोई भी उल्लंघन जानबूझकर या इरादतन नहीं किया गया।
उन्होंने कहा,
"कानूनी सुरक्षा उपायों का पालन करते हुए सीमित समय और तय भौगोलिक क्षेत्र के भीतर इंटरनेट सेवाओं को निलंबित करना एक स्वीकृत उपाय है, जिस पर उचित परिस्थितियों में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए विचार किया जा सकता है।"
इसके अलावा, शपथकर्ता ने अदालत के 11 अक्टूबर के आदेश में संशोधन का अनुरोध किया, ताकि जरूरत पड़ने पर, कानून के अनुसार और लागू कानूनी आवश्यकताओं तथा सुरक्षा उपायों का सख्ती से पालन करते हुए इंटरनेट सेवाओं को निलंबित करने की अनुमति मिल सके।

