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"मैं इस न्यायालय को पूर्णता की भावना के साथ छोड़ रही हूं", जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​ने सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में अपने अंतिम कार्य दिवस पर कहा

LiveLaw News Network
12 March 2021 11:43 AM GMT
मैं इस न्यायालय को पूर्णता की भावना के साथ छोड़ रही हूं, जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​ने सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में अपने अंतिम कार्य दिवस पर कहा
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"मैं खुश हूं और न्यायालय को पूर्णता की भावना के साथ छोड़ रही हूं", जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​ने सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में अपने अंतिम कार्य दिवस पर यह टिप्‍पणी की।

परंपरा के अनुरूप, जस्टिस मल्होत्रा ​जज के रूप में अंतिम कार्य दिवस पर भारत के मुख्य न्यायाधीश के साथ पीठ साझा की। सुनवाई के बाद, CJI बोबडे और बार के सदस्यों ने जस्टिस मल्होत्रा ​​के रिटायरमेंट पर मेंअपने विचार व्यक्त किए।

सेरेमोनियल बेंच द्वारा मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद, CJI बोबडे ने कहा कि बेंच तब तक नहीं उठेगी, जब तक बार को अपने विचार व्यक्त करने का मौका नहीं मिल जाता है।

अटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल ने कहा कि जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​उन बेहतरीन जजों में से एक हैं, जिन्होंने इस कोर्ट में काम किया है।

उन्होंने कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जजों को सुप्रीम कोर्ट की बेंच से 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होना पड़ता है, क्योंकि उनके पास जो भी अनुभव है और जो भी ज्ञान उन्होंने इकट्ठा किया है"।

उन्होंने कहा, "हमें एक बार के रूप में दुख है कि जस्टिस मल्होत्रा ​​मानव सेवा करने के बाद सेवानिवृत्त हो रही हैं, विशेष रूप से सबरीमाला मामले में, जहां उन्होंने संवैधानिक नैतिकता का प्रस्ताव रखा, और लोग आश्चर्यचकित कर दिया। उन्होंने ईमानदारी दिखाई, विशेष रूप से महिला न्यायाधीश के रूप में, जब उन्होंने यह फैसला दिया कि 15 से 50 साल की महिलाओं को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि अगर पूरे अनुमति दी जाती है तो पूरे समुदाय के धार्मिक विश्वास का उल्लंघन होगा"।

SCBA के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि यह देखकर खुशी हुई कि जस्टिस मल्होत्रा ​​सुनवाई में भाग ले रहे थीं, और अपने अंतिम दिन भी सुनवाई में योगदान दे रही थीं। उन्होंने मामलों को पढ़ा था और वह वास्तव में निर्णय लेने से जुड़ी थीं।

उन्होंने कहा कि यह ठीक है कि जजों को 70 तक रिटायर नहीं होना चाहिए। 65 की उम्र वह है, जब आप अपने चरम पर होते हैं, कोई कारण नहीं है कि जजों को 65 साल में रिटायर होना चाहिए।

‌सिंह ने आगे कहा कि जस्टिस मल्होत्रा के रिटायरमेंट के बाद उनकी जगह को तत्काल भरा जाना चाहिए, और एक अन्य महिला न्यायाधीश को तुरंत आना चाहिए। यही बार की ओर से मांग होगी।

वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि जस्टिस मल्होत्रा ​​के साथ उनका जुड़ाव उनके पिता की सहायता करने वाले एक जूनियर के रूप में है।

एडवोकेट शिवाजी जाधव ने कहा कि बार के लिए बहुत बड़ा नुकसान है कि जस्टिस मल्होत्रा ​​रिटायर हो रही हैं।

उन्होंने कहा, "जस्टिस मल्होत्रा ​​बहुत ही ईमानदार, मेहनती और अधिवक्ताओं के हितैषी रही हैं और उन्होंने कई अग्रणी निर्णय लिए हैं। मैं उनके शांतिपूर्ण सेवानिवृत्त जीवन की कामना करता हूं।"

वरिष्ठ अधिवक्ता नरसिम्हा ने कहा "मेरे लिए यह एक खुशी का क्षण है, क्योंकि वह हमारे पास वापस आ रही हैं। एक वकील के रूप में उन्होंने बहुत अच्छा कार्य किया है। एक जज के रूप में, उन्होंने बार को उन पर गर्व करने का मौका दिया है।"

वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन्‍ना ने कहा कि यहां उपस्थित सभी के लिए यह गर्व का क्षण है। अधिवक्ता विकास बंसल ने कहा, "मैं राष्ट्रपिता के शब्दों में कहना चाहूंगा: आप जहां भी होंगी प हमेशा हमारे दिल में रहेंगी।"

वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि जस्टिस मल्होत्रा ​​न केवल महिला वकीलों के लिए एक आइकन हैं, बल्कि हम सभी के लिए एक उदाहरण हैं।

चीफ जस्टिस बोबडे ने अपने संबोधन में कहा कि उन्हें इस बात का एहसास है कि एक सेरेमोनियल बेंच होने का रिवाज है।

सीजेआई ने एक उदाहरण दिया, जब जस्टिस मल्होत्रा ​​ने उनके सामने दलील दी थी। उन्होंने कहा कि "मैंने जस्टिस मल्होत्रा अपने सामने पेश होते देखा है। एक मौके पर, उन्होंने दलील देना बंद नहीं किया ‌था, तब मैंने अपने सहयोगी से पूछा था कि वह क्यों नहीं रुक रहीं है। मुझे बताया गया कि वह इतनी अच्छी तरह से तैयारी करती है कि वह अपनी हर बात को बताने से खुद को रोक नहीं सकती। "

जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने सभी को धन्यवाद दिया और कहा, "मेरा एकमात्र संदेश यह है कि मुझपर यह आशीर्वाद रहा कि मुझे सुप्रीम कोर्ट में सेवा करने का अवसर मिला है। इसने मुझे इस न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में योगदान करने में सक्षम बनाया है। भले ही यह 3 वर्ष का कार्यकाल रहा हो, लेकिन मैं इस न्यायालय को तृप्ति की भावना के साथ छोड़ रही हूं।"

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