उम्मीद है बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया में महिलाओं का प्रतिनिधित्व होगा: सुप्रीम कोर्ट
Shahadat
23 Sept 2026 6:28 PM IST

बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया (BCI) में महिलाओं के लिए 30% प्रतिनिधित्व की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह BCI की ओर से ही स्वेच्छा से लिए जाने वाले किसी फ़ैसले का इंतज़ार कर रहा है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत ने कहा,
"हम बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं कि वे (BCI) इस मामले को सुलझाने के लिए कोई प्रस्ताव लाएँ।"
यह देखते हुए कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं का 30% प्रतिनिधित्व लागू किया गया, CJI ने कहा कि शीर्ष संस्था होने के नाते BCI से भी इसकी उम्मीद की जाती है।
CJI ने हल्के-फुल्के अंदाज़ में टिप्पणी की,
"ऐसा नहीं हो सकता कि राज्य विधानसभा में तो महिला सदस्य हो, लेकिन संसद में कोई न हो।"
याचिकाकर्ता-वकील योगमाया एमजी की ओर से पेश सीनियर वकील शोभा गुप्ता ने सुझाव दिया कि इस बार (जब BCI की चुनी हुई संस्था का पुनर्गठन हो) BCI अध्यक्ष का पद किसी महिला के लिए आरक्षित किया जाए।
CJI सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच राज्य बार काउंसिलों के चुनाव से जुड़े मामले में योगमाया एमजी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है।
30% आरक्षण के अलावा, याचिका में BCI के तेज़ी से पुनर्गठन और शीर्ष नियामक संस्था के कामकाज में लैंगिक समावेश सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई। याचिकाकर्ता का तर्क है कि राज्य बार काउंसिलों के लिए कोर्ट द्वारा निर्देशित लैंगिक प्रतिनिधित्व सुधारों को कानूनी पेशे को नियंत्रित करने वाली शीर्ष वैधानिक संस्था (BCI) तक भी बढ़ाया जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान, गुप्ता ने आग्रह किया कि इस साल जब चुनी हुई संस्था का पुनर्गठन हो तो BCI को अपनी पहली महिला अध्यक्ष मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा,
"इस बार, [यह ऊपर से होना चाहिए]... BCI की पहली महिला अध्यक्ष होनी चाहिए। ज़्यादातर समस्याएं हल हो जाएंगी... किसी महिला जज को नामित किया जाए... बार काउंसिल [ऑफ़ इंडिया] को यह उदाहरण पेश करना चाहिए। शुरुआत के लिए एक महिला अध्यक्ष होनी चाहिए। शायद 2 साल, 1 साल, 1.5 साल के लिए... फिर रोटेशन के आधार पर कोई पुरुष पद संभाल सकता है।"
सीनियर वकील ने BCI और सभी राज्य बार काउंसिलों में सचिव और कोषाध्यक्ष के पद महिलाओं के लिए आरक्षित करने की मांग पर भी ज़ोर दिया (शुरुआती कदम के तौर पर)।
CJI की इस बात पर कि कोर्ट को इस मामले को सुलझाने के लिए BCI से किसी समाधान की उम्मीद है, उन्होंने कहा कि मामले की शुरुआत से ही कोर्ट की यही उम्मीद रही है।
सीनियर एडवोकेट संजय हेगड़े ने यूनाइटेड किंगडम की पूर्व PM मार्गरेट थैचर का ज़िक्र किया, जिन्होंने कहा कि जब उन्हें कोई भाषण चाहिए होता था, तो वह किसी पुरुष के पास जाती थीं, लेकिन जब उन्हें कोई काम करवाना होता था, तो वह किसी महिला के पास जाती थीं।
इन बातों के जवाब में CJI कांत ने कहा कि (स्टेट बार काउंसिल और बार एसोसिएशन में) महिलाओं के प्रतिनिधित्व के मामले में जो प्रगति हुई है, वह सभी स्टेकहोल्डर्स के सहयोग और समर्थन की वजह से हुई है। उन्होंने भरोसा जताया कि BCI भी इसी रास्ते पर चलेगा।
CJI ने कहा,
"हमें पूरा भरोसा है कि BCI भी... नए चुने गए सदस्य यह पक्का करेंगे कि एक महिला हो..."
खास बात यह है कि गुप्ता ने यह उम्मीद और इच्छा भी जताई कि पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस जयश्री ठाकुर, जिन्हें पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल का सदस्य बनाया गया, BCI की पहली महिला चेयरपर्सन बनें।
गुप्ता ने कहा,
"[वह] सबसे मज़बूत लोगों में से एक हैं..."
सुनवाई के दौरान, जस्टिस ठाकुर को सदस्य बनाने पर भी आपत्ति जताई गई। यह आपत्ति इस आधार पर थी कि वह पहले स्टेट बार काउंसिल चुनावों के लिए रिटर्निंग ऑफिसर रह चुकी हैं और चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी चुनाव याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस हिमा कोहली की अध्यक्षता वाले इलेक्शन ट्रिब्यूनल के पास पेंडिंग हैं। हालांकि, CJI की बेंच ने इसे तुरंत खारिज किया। CJI ने जस्टिस ठाकुर को सबसे बेहतरीन और मज़बूत जजों में से एक बताया।
उन्होंने कहा,
"आप लोगों को क्या दिक्कत है? लोग बहुत खुश हैं कि वह वहां हैं। लोग उनसे डरते हैं।"
सीनियर एडवोकेट गुरु कृष्ण कुमार BCI की तरफ से पेश हुए। योगमाया एमजी की अर्ज़ी AoR दीपक प्रकाश के ज़रिए दाखिल की गई।
Case: YOGAMAYA M.G. Versus UNION OF INDIA AND ORS., Misc. Application in WP(C) No. 581/2024

