होम लोन सबवेंशन फ्रॉड: सुप्रीम कोर्ट ने CBI की जांच तेज़ करने और बैंकरों पर मुक़दमा चलाने की मंज़ूरी देने के निर्देश दिए
Shahadat
6 Aug 2026 9:05 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने सात राज्यों को निर्देश दिया कि वे हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में बिल्डर-बैंक धोखाधड़ी की कथित मिलीभगत की जांच के लिए 10 दिनों के भीतर सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को अतिरिक्त पुलिस अधिकारी उपलब्ध कराएं।
कोर्ट ने स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया, UCO बैंक, HDFC, ICICI और सम्मान कैपिटल समेत अन्य वित्तीय संस्थानों को यह भी निर्देश दिया कि वे 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988' की धारा 19 के तहत CBI के मंज़ूरी अनुरोधों पर तेज़ी से कार्रवाई करें। यह मंज़ूरी उन अधिकारियों और कर्मचारियों पर मुक़दमा चलाने के लिए मांगी गई, जो जांच के दौरान प्रथम दृष्टया शामिल पाए गए।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने ये निर्देश तब जारी किए जब वे हाउसिंग लोन सबवेंशन स्कीमों में बैंकों, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों और सरकारी अधिकारियों की कथित प्रणालीगत विफलताओं से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे।
कोर्ट ने गौर किया कि CBI ने अब तक 50 FIR दर्ज कीं। इनमें से 18 मामलों में जांच पूरी हो चुकी है। 17 मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई, जबकि एक मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई।
CBI की पांचवीं सप्लीमेंट्री स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, जिन 17 मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई थी, उनमें से तीन मामलों में संज्ञान लिया गया।
पांच मामलों में CBI ने वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की और उन पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप लगाए। हालांकि, अधिनियम की धारा 19 के तहत उन पर मुक़दमा चलाने की मंज़ूरी का सक्षम अधिकारियों से इंतज़ार है। कोर्ट ने गौर किया कि विभिन्न बैंकों से कुल 34 मुक़दमा चलाने की मंज़ूरियों का इंतज़ार है।
CBI ने कोर्ट को यह भी बताया कि जांच का काम बढ़ने के कारण उसे उत्तर प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और कर्नाटक से अतिरिक्त पुलिस अधिकारियों या डेप्युटेशन पर अधिकारियों की ज़रूरत है। उसने कहा कि CBI डायरेक्टर के संपर्क करने के बावजूद, न तो अतिरिक्त कर्मचारी उपलब्ध कराए गए और न ही संबंधित पुलिस प्रमुखों ने कोई जवाब दिया।
इसके अनुसार, कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और कर्नाटक के पुलिस महानिदेशकों (DGP) को निर्देश दिया कि वे CBI के अनुरोधों पर विचार करें और उपयुक्त अतिरिक्त पुलिस अधिकारी उपलब्ध कराएं।
ज़रूरी अधिकारियों को जल्द-से-जल्द और 10 दिनों के भीतर नामित या डेप्युटेशन पर भेजा जाना चाहिए।
कोर्ट ने कहा,
"उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, पंजाब और कर्नाटक राज्यों के पुलिस महानिदेशक (DGP) CBI के अनुरोध पर विचार करेंगे और अतिरिक्त उपयुक्त पुलिस अधिकारी उपलब्ध कराएंगे। ज़रूरी और उपयुक्त अधिकारियों को जल्द से जल्द, लेकिन 10 दिनों के भीतर नॉमिनेट या डेप्यूट किया जाना चाहिए। अगर इसमें कोई देरी या चूक होती है तो यह कोर्ट इस मामले को गंभीरता से लेने पर मजबूर होगा।"
कोर्ट ने संबंधित बैंकों और वित्तीय संस्थानों - जिनमें स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया, UCO बैंक, HDFC, ICICI और सम्मान कैपिटल शामिल हैं - के सक्षम अधिकारियों को यह निर्देश भी दिया कि वे CBI द्वारा प्रथम दृष्टया (prima facie) दोषी पाए गए अपने अधिकारियों और कर्मचारियों पर मुकदमा चलाने के लिए 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम' (Prevention of Corruption Act) की धारा 19 के तहत ज़रूरी मंज़ूरी देने की प्रक्रिया तेज़ी से पूरी करें।
यह काम दो हफ़्तों के भीतर पूरा किया जाना है। ऐसा न होने पर सक्षम अधिकारी को सुप्रीम कोर्ट में स्पष्टीकरण देना होगा।
कोर्ट ने CBI को यह भी निर्देश दिया कि वह प्रवर्तन निदेशालय (ED) को उन मामलों की जानकारी दे, जिनमें ED को अपराध से हुई कमाई से जुड़े मामलों पर संज्ञान लेने की ज़रूरत पड़ सकती है।
कोर्ट ने CBI को यह भी निर्देश दिया कि वह एमिक्स क्यूरी राजीव जैन द्वारा भेजी गई शिकायतों, दस्तावेज़ी सबूतों और अन्य सामग्रियों की जांच करे और उन पर संज्ञान ले।
कोर्ट ने एजेंसी से यह भी कहा कि वह तीन चार्जशीट पर एमिक्स की टिप्पणियों में बताए गए पहलुओं की गहन जांच करे।
CBI को बैंकों, हाउसिंग अथॉरिटी और बिल्डरों द्वारा कथित अपराधों से जुड़ी छह शिकायतों और उनमें मौजूद दस्तावेज़ों की भी गहन जांच करने का निर्देश दिया गया। इन शिकायतों में कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में ओज़ोन ग्रुप, बेंगलुरु में विवांशा, ग्रेटर नोएडा में रुद्र बिल्डवेल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और चंडीगढ़ में ओमैक्स ग्रुप से जुड़े आरोप शामिल हैं।
कोर्ट ने CBI को निर्देश दिया कि वह इन शिकायतों में शामिल बिल्डरों और बैंकिंग संस्थानों के संबंध में अपनी जांच की एक अलग स्टेटस रिपोर्ट पेश करे।
CBI को यह भी निर्देश दिया गया कि वह त्रिपक्षीय समझौतों (Tripartite Agreements) वाले अन्य मामलों की जांच करे, जिनमें पट्टेदार (Lessee) और बिल्डर अलग-अलग थे। उसे यह जांचना है कि क्या बैंकों या हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों ने जानबूझकर या अनजाने में ऐसे समझौते किए जिनमें बंधक (Mortgage) बनाया गया, जबकि उस पट्टेदार को समझौते में शामिल नहीं किया गया जिसे असल में ज़मीन पट्टे पर दी गई।
CBI को यह भी जांचना है कि क्या समझौतों से ऐसे पट्टेदारों को बाहर रखने के कारण बैंकों या हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों को कोई गलत नुकसान हुआ।
ये निर्देश कोर्ट द्वारा CBI की पांचवीं सप्लीमेंट्री स्टेटस रिपोर्ट और एमिक्स क्यूरी राजीव जैन द्वारा 6 अगस्त, 2026 को दाखिल किए गए नोटों पर विचार करने के बाद दिए गए। एमिक्स के नोटों में प्रोजेक्ट्स और बिल्डरों की मौजूदा स्थिति के बारे में बताया गया और बिल्डरों व प्रोजेक्ट्स के संबंध में बैंकों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के एक्सपोज़र (जोखिम) का ब्योरा दिया गया।
वित्तीय संस्थानों द्वारा 315 आवेदन दाखिल किए गए, जिनमें कार्यवाही से उन्हें हटाने की मांग की गई, क्योंकि उन्होंने संबंधित घर खरीदारों को लोन नहीं दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं से जवाब मिलने के बाद इन आवेदनों पर फिर से विचार किया जा सकता है।
कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे दो सप्ताह के भीतर एमिक्स को अपना जवाब सौंपें। यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं तो उन्हें कोई और मौका नहीं दिया जाएगा और सुनवाई की अगली तारीख पर वित्तीय संस्थानों द्वारा दाखिल आवेदनों को स्वीकार कर लिया जाएगा।
Case Title – Himanshu Singh and Ors. v. Union of India and Ors.


