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"उच्च न्यायालय संकट की स्थिति में हैं " : सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालयों में जजों की नियुक्ति के लिए समय- सीमा तैयार की

LiveLaw News Network
20 April 2021 12:21 PM GMT
उच्च न्यायालय संकट की स्थिति में हैं  : सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालयों में जजों की नियुक्ति के लिए समय- सीमा तैयार की
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उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की बढ़ते रिक्तियों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जोर दिया कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा नामों को मंज़ूरी देने के तुरंत बाद केंद्र सरकार को नियुक्तियां करने के लिए आगे बढ़ना चाहिए।

यदि सरकार को कॉलेजियम की सिफारिशों पर कोई आपत्ति है, तो उसे आपत्ति के विशिष्ट कारणों के साथ नामों को वापस भेजना चाहिए।

एक बार सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने नामों को दोहराया है, तो केंद्र को इस तरह की पुन : प्रक्रिया के 3-4 सप्ताह के भीतर नियुक्ति करनी चाहिए।

अदालत ने समय- सीमा को निम्नानुसार रखा है:

1. इंटेलिजेंस ब्यूरो ( आईबी) को उच्च न्यायालय कॉलेजियम की सिफारिश की तारीख से 4 से 6 सप्ताह में अपनी रिपोर्ट / इनपुट केंद्र सरकार को सौंपने चाहिए।

2. यह वांछनीय होगा कि केंद्र सरकार राज्य सरकार से विचारों की प्राप्ति की तारीख और आईबी से रिपोर्ट / इनपुट से 8 से 12 सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट में फाइलों / सिफारिशों को भेजे।

3. इसके बाद सरकार के लिए यह उपर्युक्त होगा कि इन पर तुरंत नियुक्ति करने के लिए आगे बढ़े और निस्संदेह अगर सरकार के पास उपयुक्तता या सार्वजनिक हित में कोई आपत्ति है, तो इसी समय की अवधि के भीतर आपत्ति के विशिष्ट कारणों को दर्ज कर इसे उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम के पास वापस भेजा जा सकता है।

यदि सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम ने पूर्वोक्त इनपुटों पर विचार करने के बाद भी अभी भी सिफारिश ( खंड 24.1) को दोहराया है, तो ऐसी नियुक्ति के लिए पुन: प्रक्रिया की जानी चाहिए और नियुक्ति 3 से 4 हफ्तों के भीतर की जानी चाहिए।

भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि उपरोक्त समय-सीमा का पालन करना 'उचित' होगा।

पीठ ने आदेश में उल्लेख किया,

"उच्च न्यायालय एक संकट की स्थिति में हैं। उच्च न्यायालयों में लगभग 40% रिक्तियां हैं, जिनमें से कई बड़े उच्च न्यायालय अपनी स्वीकृत शक्ति के 50% के साथ काम कर रहे हैं।"

अदालत ने कहा कि हम सचेत हैं कि उक्त कवायद प्रकृति में सहयोगी है और हम इस प्रक्रिया में शीघ्रता बरतने से न्याय के समय से निस्तारण के बड़े कारण को सुविधाजनक बनाने की उम्मीद करेंगे।

पीठ ने पीएलआर प्रोजेक्ट्स लिमिटेड बनाम महानदी कोलफील्ड्स प्राइवेट लिमिटेड के मामले में आदेश जारी किया, जो कि 2019 की ट्रांसफर याचिका है जिसमें वकीलों की हड़ताल के कारण सुप्रीम कोर्ट से उड़ीसा उच्च न्यायालय के एक मामले को स्थानांतरित करने की मांग की गई है।

इस मामले पर विचार करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने मंत्रालय स्तर पर कॉलेजियम की सिफारिशों के लंबित रहने के मुद्दे पर छानबीन की थी।

दिसंबर 2019 में जस्टिस एसके कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ ने मामले में एक आदेश पारित किया था जिसमें कहा गया था कि उच्च न्यायालय कॉलेजियम द्वारा अनुशंसित व्यक्ति, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम और सरकार द्वारा अनुमोदित किया जाता है, उन्हें 6 महीने के भीतर नियुक्त किया जाना चाहिए।

2019 में मामले की पहले की सुनवाई में, पीठ ने टिप्पणी की थी कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के लगभग 40% स्वीकृत पद खाली पड़े हैं, और अटार्नी जनरल से नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कदम उठाने का आग्रह किया।

पीठ ने नवंबर 2019 में पारित एक आदेश में कहा था,

"... परंपरा यह निर्धारित की गई है कि एक प्रयास किया जाना चाहिए कि रिक्तियों के लिए सिफारिशें छह महीने पहले भेजी जाएं। यह एक ऐसा पहलू है जिस पर उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की नज़र होगी। छह महीने की यह अवधि इस अपेक्षा से उत्पन्न होती है कि उक्त अवधि सिफारिश के चरण से नियुक्ति तक नामों को संसाधित करने के लिए पर्याप्त होगी। इस प्रकार, छह महीने पहले नाम भेजना तभी सार्थक होगा, जब तक नियुक्ति की प्रक्रिया छह महीने के भीतर पूरी न हो जाए, जो एक काम है जिसे सरकार को करना चाहिए।"

25 मार्च को आखिरी सुनवाई में सीजेआई बोबडे, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि केंद्रीय कानून मंत्रालय को उचित समय अवधि के भीतर कॉलेजियम की सिफारिशों को स्पष्ट करना चाहिए।

पिछले महीने, पीठ ने अटॉर्नी जनरल को कानून मंत्रालय के पास लंबित कॉलेजियम की सिफारिशों को स्पष्ट करने के लिए आवश्यक समय के बारे में एक बयान देने की आवश्यकता जताई थी।

उसके बाद, एजी ने 15 अप्रैल को अदालत को बताया कि मंत्रालय 3 महीने के भीतर कॉलेजियम की सिफारिशों पर फैसला करेगा, जो 6 महीने से लंबित थी।

केस : पीएलआर प्रोजेक्ट्स लिमिटेड बनाम महानदी कोलफील्ड्स प्राइवेट लिमिटेड

पीठ: सीजेआई एसए बोबडे, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस सूर्यकांत

उद्धरण: LL 2021 SC 223

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