हेल्थ-टेक कंपनी ने साइबर अटैक और डेटा चोरी की CBI जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

Shahadat

6 Aug 2026 9:09 PM IST

  • हेल्थ-टेक कंपनी ने साइबर अटैक और डेटा चोरी की CBI जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

    सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी किया। इस याचिका में एक हेल्थ-टेक कंपनी के पास जमा नागरिकों के पर्सनल और मेडिकल डेटा की कथित हैकिंग और चोरी की CBI या कोर्ट की निगरानी वाली SIT से जांच कराने की मांग की गई।

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने 'विट्राया टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड' की याचिका पर यह आदेश दिया। इस कंपनी का हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम के रियल-टाइम सेटलमेंट के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है। याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट के. परमेश्वर पेश हुए।

    उन्होंने बताया कि डेटा में सेंध छह राज्यों में लगी।

    उन्होंने कहा,

    "मैं पहले दिन से ही अधिकारियों को जानकारी दे रहा हूं। मैंने मार्च 2025 में अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। FIR दर्ज करने में भी उन्हें अगस्त 2025 तक का समय लग गया।"

    उन्होंने आगे कहा कि FIR में केवल इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट की धारा 66 लगाई गई, जो नाकाफी थी।

    उन्होंने कहा,

    "मैंने उन्हें उस सिंगापुर सर्वर की जानकारी दी, जहां लगभग 1.5 लाख भारतीय नागरिकों के मेडिकल रिकॉर्ड चले गए। आज भी, FIR अज्ञात लोगों के खिलाफ है। मैं इस जांच पर कैसे भरोसा करूं?"

    कंपनी का कहना है कि उसके कॉम्पिटिटर्स या उनसे जुड़ी संस्थाओं ने डेटा चुराने की कोशिश में उसके सर्वर पर हमला किया। बहुत कोशिशों के बाद FIR दर्ज की गई, लेकिन एजेंसी ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। अधिकारियों की निष्पक्षता पर शक जताते हुए याचिकाकर्ता CBI या SIT से खास जांच की मांग कर रहा है।

    आर्टिकल 21 के अधिकारों के आधार पर याचिका में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि ये मुद्दे नागरिकों के गोपनीय डेटा और प्राइवेसी से जुड़े हैं। इसमें कहा गया कि लोगों के बेहद गोपनीय डेटा - जिसमें आधार से जुड़ी जानकारी, इंश्योरेंस क्लेम और मेडिकल रिकॉर्ड शामिल हैं - तक अनधिकृत पहुंच का खतरा है।

    दावों के अनुसार, फरवरी 2025 में एक सोफिस्टिकेटेड साइबर घुसपैठ का पता चला था। इसमें ब्रूट-फोर्स लॉगिन की कोशिशें, गोपनीय रिकॉर्ड्स को बड़े पैमाने पर डाउनलोड करना और याचिकाकर्ता के इंफ्रास्ट्रक्चर से संवेदनशील कस्टमर डेटा निकालना शामिल था। आंतरिक जांच के बाद याचिकाकर्ता ने संदिग्ध गतिविधियों का पता 'M/s बेसेमर वेंचर पार्टनर्स' नाम के विदेशी फंड के मालिकाना हक वाली संस्थाओं तक लगाया।

    आरोप है कि इन संस्थाओं ने याचिकाकर्ता के कॉम्पिटिटर्स के साथ मिलकर हमलों को अंजाम दिया। कहा गया कि मार्च 2025 में ही शिकायत के ज़रिए पुलिस अधिकारियों को टेक्निकल लॉग, सर्वर डेटा, IP डिटेल्स, शामिल लोगों के नाम और सपोर्टिंग मटीरियल दिए गए। हालांकि, अधिकारी 6 महीने तक FIR दर्ज करने में नाकाम रहे। आखिरकार, FIR दर्ज की गई, लेकिन वह भी IT Act की धारा 66 और 66B के तहत, और वह भी 'अज्ञात लोगों' के खिलाफ।

    याचिका में कहा गया,

    "जांच एजेंसी इस FIR के संबंध में कोई भी सार्थक, तत्पर या प्रभावी जांच कदम उठाने में नाकाम रही है और याचिकाकर्ता द्वारा फॉलो-अप और रिप्रेजेंटेशन के बावजूद इस मामले में पूरी तरह से निष्क्रियता बरत रही है। ऐसी लगातार निष्क्रियता और भी गंभीर हो जाती है, जब हम इन आरोपों की गंभीरता पर विचार करते हैं, जिनमें देश भर में डेटा प्राइवेसी से जुड़ी चिंताएं और आम नागरिकों की संवेदनशील निजी जानकारी के खतरे में पड़ने की संभावना शामिल है।"

    यह याचिका AoR अभिनव अग्रवाल के ज़रिए दायर की गई।

    Case Title: VITRAYA TECHNOLOGIES PVT. LTD Versus UNION OF INDIA AND ORS. Diary No. 31408-2026

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