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'निचली अदालतों के लिए उचित बुनियादी ढांचा सुनिश्चित करने के लिए सरकार कदम उठा रही है': कानून मंत्री किरेन रिजिजू

LiveLaw News Network
10 Nov 2021 4:34 AM GMT
निचली अदालतों के लिए उचित बुनियादी ढांचा सुनिश्चित करने के लिए सरकार कदम उठा रही है: कानून मंत्री किरेन रिजिजू
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राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (नालसा) द्वारा "कानूनी सेवा दिवस" ​​के मौके पर आयोजित किए गए एक समारोह में बोलते हुए केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार को कहा कि यह ज्ञात है कि निचली अदालतों में चार करोड़ मामले लंबित हैं। मामलों की इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए सरकार निचली अदालतों के लिए उचित बुनियादी ढांचा सुनिश्चित करने के उपायों पर काम कर रही है।

बड़ी संख्या में लंबित मामलों का उल्लेख करते हुए रिजिजू ने कहा कि जहां सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट कुछ मानकों पर काम कर रहे हैं। इन्हें समर्थन दिए जाने की आवश्यकता है। मगर यह निचली अदालतें हैं जहां इस समय सबसे अधिक जोर दिया जाना चाहिए।

इससे पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कई सार्वजनिक अवसरों पर निचली अदालतों के लिए उचित बुनियादी ढांचे की कमी के मुद्दे को बार-बार उजागर किया है।

मंत्री ने यह भी कहा कि न्याय पाने के लिए आम आदमी को संघर्ष करते देखना एक निराशाजनक बात है, लेकिन इसमें किसी की गलती नहीं है। इसके लिए हालात जिम्मेदार हैं।

कानून मंत्री ने कहा,

"हम ऐसे कई लोगों को जानते हैं जिन्हें न्याय नहीं मिलता। यह किसी की गलती नहीं है, लेकिन मौजूदा हालात में सामान्य व्यक्ति के लिए न्याय प्राप्त करना आसान नहीं है। एक व्यक्ति न्याय पाने के लिए संपत्ति बेच सकता है लेकिन उसे तारीख नहीं मिलती है।"

सोशल मीडिया पर की जा रही टिप्पणियों और न्यायपालिका द्वारा किए जा रहे कार्यों के संबंध में विभिन्न मंचों पर की जा रही टिप्पणियों को संबोधित करते हुए रिजिजू ने कहा कि लोगों के लिए न्यायाधीशों द्वारा किए जा रहे कार्यों को समझना मुश्किल है, जिसमें गृहकार्य और उनके द्वारा किए गए अध्ययन शामिल हैं।

रिजिजू ने कहा,

"विभिन्न मंचों पर अशोभनीय टिप्पणियां की जा रही हैं। जब आप करीब से देखते हैं कि न्यायाधीशों को कैसे मंच देना है तो हम जैसे लोगों के लिए इसे समझना मुश्किल है।"

उन्होंने आगे कहा,

"हम सार्वजनिक जीवन से हैं। हम खुले हैं। न्यायाधीश उतने खुले नहीं हो सकते। न्यायाधीश के लिए अपने कोर्ट रूम से बाहर आना, पारंपरिक कर्तव्यों और कानूनी सहायता प्रदान करने जैसी सेवाओं की देखभाल करना आसान नहीं है।"

लोगों की न्याय तक पहुंच बढ़ाने के लिए नालसा द्वारा किए गए कार्यों की सराहना करते हुए रिजिजू ने आम लोगों को न्याय आसानी से उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया।

रिजिजू ने कहा,

"यह देखना निराशाजनक है कि आम व्यक्ति न्याय पाने के लिए संघर्ष कर रहा है। इस दूरी को तोड़ा जाना चाहिए और न्याय की पहुंच आसान बनानी चाहिए। नालसा ने इस संबंध में जबरदस्त कदम उठाए हैं और मुझे भारत के मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति यूयू ललित की सराहना करनी चाहिए।"

रिजिजू ने कहा,

"हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि लोगों को न्यूनतम न्याय के लिए संघर्ष न करना पड़े।"

कानून के छात्रों और देश के भविष्य के वकीलों का जिक्र करते हुए रिजिजू ने सुनिश्चित किया कि देश इन छात्रों को महान अवसर प्रदान करेगा और वे पारंपरिक वकील, अच्छे मध्यस्थ आदि बनेंगे।

उन्होंने कहा,

"भारत आपको महान अवसर प्रदान करेगा। आपको न्यायिक प्रणाली में रहना होगा और आपके माध्यम से हम मजबूत लोकतंत्र बनाने जा रहे हैं। पीएम ने प्रतिबद्ध किया है कि भारत को अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र बनाया जाना चाहिए।"

रिजिजू ने सरल भाषा में सरल कानून बनाने की आवश्यकता के बारे में भी बताया जो सभी के लिए समझने में सुविधाजनक हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं होगा कि न्यायाधीश और वकील बेरोजगार हो जाएंगे।

कानून और न्याय मंत्री ने कहा,

"न्याय को आम आदमी के दायरे में लाने का विचार वास्तव में हमारे देश में न्यायपालिका को बदल रहा है।"

किरेन रिजिजू ने यह कहते हुए निष्कर्ष निकाला कि कानून के छात्रों, न्यायाधीशों, मंत्रियों सहित सभी को एक साथ आना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि समाज के सबसे कमजोर वर्गों को कानूनी सहायता और सेवाएं दी जाएं।

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