गोवा सरकार ने रेप केस में तरुण तेजपाल के लिए उम्रकैद की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
Shahadat
19 Aug 2026 11:17 AM IST

गोवा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की कि 2013 के रेप केस में 'तहलका' के पूर्व एडिटर तरुण तेजपाल की सज़ा बढ़ाई जाए। सरकार चाहती है कि बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा सुनाई गई 10 साल की कठोर सज़ा के बजाय उन्हें उम्रकैद की सज़ा दी जाए।
राज्य सरकार ने साफ़ किया कि वह सिर्फ़ सज़ा की अवधि को चुनौती दे रही है, न कि हाई कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने के फ़ैसले या निष्कर्षों पर सवाल उठा रही है या उन्हें फिर से खोलना चाहती है।
बॉम्बे हाईकोर्ट की जस्टिस नीला गोखले और जस्टिस अमित जमसंडेकर की गोवा बेंच ने 6 अगस्त को ट्रायल कोर्ट द्वारा तरुण तेजपाल को बरी किए जाने के फ़ैसले को पलट दिया और उन्हें 2013 के मामले में दोषी ठहराया। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें 10 साल की कठोर सज़ा सुनाई।
हाईकोर्ट ने गौर किया कि घटना 13 साल पहले हुई और उसके बाद तरुण तेजपाल के किसी भी आपराधिक दुर्व्यवहार की कोई रिपोर्ट नहीं मिली थी। इसलिए कोर्ट ने गोवा सरकार की अधिकतम सज़ा यानी उम्रकैद की मांग को ठुकरा दिया और रेप के लिए दोषी ठहराए जाने पर तय न्यूनतम सज़ा सुनाई।
यह मामला नवंबर 2013 में गोवा के एक लग्ज़री होटल में 'तहलका' द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान लिफ़्ट के अंदर जूनियर सहयोगी के साथ तरुण तेजपाल द्वारा यौन उत्पीड़न किए जाने के आरोपों से जुड़ा है। गोवा सेशंस कोर्ट ने 2021 में उन्हें बरी कर दिया, जिसके बाद राज्य सरकार ने बरी किए जाने के फ़ैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने तरुण तेजपाल को रेप, यौन उत्पीड़न और कपड़े उतारने की नीयत से हमला करने से संबंधित भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के तहत दोषी ठहराया। रेप की जिस धारा के तहत उन्हें दोषी ठहराया गया, उसमें न्यूनतम सज़ा 10 साल है और अधिकतम सज़ा उम्रकैद तक हो सकती है।


