यह डरावना है कि 7.95 लाख से ज़्यादा एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं 6 महीने से ज़्यादा समय से लंबित हैं: सुप्रीम कोर्ट ने जल्द निपटारे के लिए व्यवस्था मांगी

Shahadat

14 April 2026 10:25 AM IST

  • यह डरावना है कि 7.95 लाख से ज़्यादा एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं 6 महीने से ज़्यादा समय से लंबित हैं: सुप्रीम कोर्ट ने जल्द निपटारे के लिए व्यवस्था मांगी

    सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पाया कि पूरे देश में लगभग 8 लाख एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं (Execution Petitions) लंबित हैं, जो छह महीने से ज़्यादा पुरानी हैं। इस स्थिति को "बहुत डरावना और निराशाजनक" बताया।

    कोर्ट ने कहा,

    "आज की तारीख़ में स्थिति बहुत डरावनी और निराशाजनक लगती है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि आज की तारीख़ में पूरे देश में 7,95,981 एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं लंबित हैं, जो छह महीने पुरानी हैं।"

    जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस पंकज मित्तल की बेंच ने सभी हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वे एग्ज़ीक्यूशन याचिकाओं के जल्द निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई व्यवस्था के बारे में उन्हें जानकारी दें।

    कोर्ट ने आदेश दिया,

    "अगली सुनवाई की तारीख़, यानी 07.10.2026 तक, हर हाईकोर्ट हमें संक्षेप में बताएगा कि एग्ज़ीक्यूशन याचिकाओं के प्रभावी और जल्द निपटारे के लिए उन्होंने क्या व्यवस्था बनाई या अपने-अपने ज़िला न्यायालयों को किस तरह के निर्देश जारी किए।"

    कोर्ट ऐसे मामलों के समय-सीमा के भीतर निपटारे के लिए दिए गए अपने निर्देशों के पालन की निगरानी कर रहा था।

    16 अक्टूबर, 2025 तक पूरे देश में 8.82 लाख से ज़्यादा एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं लंबित थीं। उस समय कोर्ट ने इन आंकड़ों को बेहद निराशाजनक और चिंताजनक बताया था। हाईकोर्ट से छह महीने के भीतर निपटारा सुनिश्चित करने और प्रभावी निगरानी व्यवस्था बनाने का आग्रह किया।

    अपने ताज़ा आदेश में कोर्ट ने पाया कि निपटारे में प्रगति के बावजूद, लंबित मामलों की संख्या अभी भी बहुत ज़्यादा है। कोर्ट ने पाया कि मौजूदा आंकड़े दिखाते हैं कि 7,95,981 एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं अभी भी छह महीने से ज़्यादा समय से लंबित हैं।

    कोर्ट ने पाया कि 6 मार्च, 2025 से जब उसने एग्ज़ीक्यूशन याचिकाओं के समय-सीमा के भीतर निपटारे का निर्देश दिया था, तब से 10 अप्रैल, 2026 तक कुल 7,69,731 एग्ज़ीक्यूशन याचिकाओं का फ़ैसला किया गया और उनका निपटारा किया गया। इसमें 6 मार्च, 2025 के निर्देशों के बाद पहले चरण में निपटाए गए 3,38,685 मामले और 16 अक्टूबर, 2025 के बाद निपटाए गए 4,31,046 अन्य मामले शामिल हैं।

    कोर्ट ने राज्य-वार आंकड़ों पर प्रकाश डाला, जो यह दिखाते हैं कि मामले अभी भी लंबित हैं। उत्तर प्रदेश में 26,943 एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं (Execution Petitions) लंबित हैं, जिनमें से 3,057 मामलों में कार्यवाही ऊपरी अदालतों द्वारा रोक दी गई।

    महाराष्ट्र में, 3,95,960 एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं लंबित हैं, जिनमें से 11,966 मामलों पर रोक लगी हुई है। पश्चिम बंगाल में 28,192 लंबित एग्ज़ीक्यूशन याचिकाओं में से 1,008 मामलों में कार्यवाही पर रोक है। मध्य प्रदेश में, 50,579 लंबित एग्ज़ीक्यूशन याचिकाओं में से 2,537 मामले रोक के अंतर्गत हैं।

    अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट, बॉम्बे हाईकोर्ट, कलकत्ता हाईकोर्ट और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से अनुरोध किया कि वे उन मामलों की जांच करें, जिनमें कार्यवाही पर रोक लगी हुई और यह सुनिश्चित करें कि ऐसे मामलों को जल्द-से-जल्द उठाया जाए ताकि एग्ज़ीक्यूशन की कार्यवाही में देरी न हो।

    सभी हाईकोर्ट से प्राप्त नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, निम्नलिखित हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में सबसे अधिक एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं लंबित हैं - बॉम्बे हाईकोर्ट में 3,95,960 एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं लंबित हैं, कर्नाटक हाईकोर्ट में 1,35,408 एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं लंबित हैं, मद्रास हाईकोर्ट में 78,934 एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं लंबित हैं, केरल हाईकोर्ट में 73,002 एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं लंबित हैं, आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में 61,380 एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं लंबित हैं, और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 50,579 एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं लंबित हैं।

    ये आंकड़े पिछले आदेश के बाद से नई एग्ज़ीक्यूशन याचिकाओं के आने की संख्या भी दिखाते हैं। निम्नलिखित हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नए मामलों की संख्या सबसे अधिक रही - बॉम्बे हाईकोर्ट में 76,019 नई एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं दायर की गईं, केरल हाईकोर्ट में 44,067 नई एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं थीं, कर्नाटक हाईकोर्ट में 27,989 नई एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं थीं, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में नई दायर याचिकाओं में पंजाब में 24,503 और हरियाणा में 26,140 याचिकाएं शामिल हैं। दिल्ली हाईकोर्ट में 20,642 नई एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं दायर की गईं। मद्रास हाईकोर्ट में 19,005 नई एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं दायर की गईं। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 18,446 नई एग्जीक्यूशन याचिकाएं दायर की गईं।

    इस मामले को आगे की कार्यवाही के लिए 7 अक्टूबर, 2026 को सूचीबद्ध किया गया। कोर्ट ने रजिस्ट्री को आदेश की एक प्रति सभी हाई कोर्ट को भेजने का निर्देश दिया।

    Case Title – Periyammal (Dead) Through LRs & Ors. v. V. Rajamani & Anr.

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