Freebies To Doctors | सुप्रीम कोर्ट ने फार्मास्युटिकल मार्केटिंग के तरीकों को रेगुलेट करने की मांग वाली याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा
Shahadat
9 Sept 2026 9:19 AM IST

सुप्रीम कोर्ट ने फार्मास्युटिकल मार्केटिंग के तरीकों को कानूनी रूप से रेगुलेट करने की मांग वाली याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार एक तीन-सदस्यीय कमेटी बनाएगी जो यह जांच करेगी कि क्या फार्मास्युटिकल कंपनियों के अनैतिक तरीकों को रेगुलेट करने के लिए किसी कानूनी ढांचे की ज़रूरत है।
मेहता ने कोर्ट से कहा,
"हालांकि, यह पक्का करने के लिए सिस्टम को मज़बूत करने की ज़रूरत है कि फार्मास्युटिकल कंपनियां किसी भी तरह के अनैतिक तरीकों में शामिल न हों। विस्तृत चर्चा के बाद और संभावित समाधान खोजने के मकसद से एक 3-सदस्यीय कमेटी बनाने का फ़ैसला किया गया है। उनसे इन मुद्दों पर रिपोर्ट देने को कहा जाएगा कि क्या कोई कानूनी ढांचा बनाया जा सकता है (और अगर हां, तो कैसा) ताकि यह पक्का किया जा सके कि फार्मास्युटिकल कंपनियां ऐसे अनैतिक तरीकों में शामिल न हों।"
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें फार्मास्युटिकल कंपनियों और डॉक्टरों के बीच अनैतिक लेन-देन को रोकने के लिए फार्मास्युटिकल मार्केटिंग के तरीकों को कानूनी रूप से रेगुलेट करने की मांग की गई।
कोर्ट ने पहले सवाल किया कि क्या 'यूनिफ़ॉर्म कोड फ़ॉर फार्मास्युटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिसेज़ (UCPMP), 2024' में इसे लागू करने के लिए पर्याप्त सिस्टम मौजूद हैं। कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या केंद्र सरकार इस कोड को कानूनी मान्यता देने का इरादा रखती है, क्योंकि सरकारी नियंत्रण न होने पर यह अनिवार्य नियम लगभग स्वैच्छिक (मर्ज़ी पर निर्भर) हो सकता है।
उस सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने यह भी कहा कि ग्राहकों और मरीज़ों के पास फार्मास्युटिकल मार्केटिंग के अनैतिक तरीकों के ख़िलाफ़ कोई कानूनी उपाय नहीं है। कोर्ट ने सवाल किया कि एक आम ग्राहक 'ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट' का इस्तेमाल कैसे कर सकता है, जबकि इस एक्ट के तहत मुक़दमे ड्रग इंस्पेक्टरों के ज़रिए शुरू किए जाते हैं।
SG मेहता ने केंद्र सरकार द्वारा 17 अगस्त, 2026 को दायर हलफ़नामे का ज़िक्र किया और बताया कि डिपार्टमेंट ऑफ़ फार्मास्युटिकल्स, डिपार्टमेंट ऑफ़ हेल्थ एंड फ़ैमिली वेलफ़ेयर और डिपार्टमेंट ऑफ़ लीगल अफ़ेयर्स के बीच विस्तृत चर्चा हुई।
उन्होंने कहा कि सरकार ने दो पहलुओं पर विचार किया - यह पक्का करना कि डॉक्टर अनैतिक तरीकों में शामिल न हों और यह पक्का करना कि फार्मास्युटिकल कंपनियां डॉक्टरों को लुभाने के लिए अनैतिक तरीकों का इस्तेमाल न करें।
पहले पहलू पर मेहता ने कहा कि मौजूदा कानूनी और रेगुलेटरी ढांचे में पहले से ही रजिस्टर्ड डॉक्टरों के ख़िलाफ़ पेशेवर कदाचार (प्रोफ़ेशनल मिसकंडक्ट) के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।
उन्होंने 'इंडियन मेडिकल काउंसिल रेगुलेशन्स' का ज़िक्र किया, जो हेल्थकेयर पेशेवरों के लिए फार्मास्युटिकल और उससे जुड़ी हेल्थकेयर इंडस्ट्रीज़ के साथ उनके संबंधों के लिए आचार संहिता (कोड ऑफ़ कंडक्ट) तय करते हैं। ये नियम डॉक्टरों को दवा बनाने वाली और उससे जुड़ी हेल्थकेयर कंपनियों से तोहफ़े, यात्रा की सुविधाएँ, मेहमाननवाज़ी और नकद या पैसे के रूप में मदद लेने से रोकते हैं।
ये नियम डॉक्टरों को ऐसे अनैतिक काम करने या उनमें मदद करने से भी रोकते हैं। साथ ही इनमें डॉक्टरों की पेशेवर आज़ादी, दवाओं की सिफारिश करने और दवा कंपनियों के साथ अन्य तरह के रिश्तों से जुड़े नियम भी शामिल हैं।
Case Title – Federation of Medical and Sales Representatives Associations of India and Ors. v. Union of India and Ors.


