नगर आयुक्त का वेतन रोकने के आदेश के बाद BMC ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- अतिक्रमण हटाए गए

  • नगर आयुक्त का वेतन रोकने के आदेश के बाद BMC ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- अतिक्रमण हटाए गए

    बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि मुंबई के बोरीवली में 'बेस्ट' (BEST) बस स्टैंड के लिए तय की गई जमीन से सभी अतिक्रमण हटा दिए गए। इससे एक दिन पहले ही कोर्ट ने BMC और महाराष्ट्र सरकार को नगर आयुक्त अश्विनी भिड़े का वेतन जारी करने से रोक दिया, क्योंकि कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया गया।

    BMC की ओर से सीनियर एडवोकेट आरपी भट्ट ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष यह मामला रखा और बताया कि सभी अवैध ढांचे गिरा दिए गए।

    भट्ट ने कहा,

    "उन्होंने निर्देशों का पालन किया और अब सभी ढांचे हटा दिए गए।"

    CJI ने भट्ट को धन्यवाद देते हुए कहा,

    "धन्यवाद। आपके हस्तक्षेप के बिना ऐसा संभव नहीं हो पाता!"

    भट्ट ने मंगलवार की सुनवाई के दौरान BMC के बर्ताव का बचाव करने के लिए भी पीठ से माफी मांगी। उस सुनवाई में कोर्ट ने नगर आयुक्त को अपने पिछले निर्देशों की जानबूझकर अवहेलना करने के लिए अवमानना ​​का नोटिस जारी किया।

    भट्ट ने कहा,

    "व्यक्तिगत रूप से मैं माफी मांगना चाहता हूं। मैं उनका बचाव कर रहा था, लेकिन अब उन्हें एहसास हो गया है कि यह गलत था। मैं आप सभी से माफी मांगता हूं। मैं आज या कल में अनुपालन (Compliance) का हलफनामा दाखिल कर दूंगा।"

    मंगलवार को कोर्ट ने BMC की उस अर्जी को खारिज किया था, जिसमें अतिक्रमण वाली जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ बेदखली का आदेश पारित करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया। कोर्ट ने BMC पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया और निर्देशों का पालन होने तक नगर आयुक्त का वेतन जारी करने पर रोक लगाई थी।

    मंगलवार की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने BMC की कड़ी आलोचना की थी, क्योंकि वह 13 नवंबर 2025 और 28 जुलाई 2026 को दिए गए समयबद्ध निर्देशों का पालन करने में बार-बार विफल रही थी।

    कोर्ट ने कहा कि BMC का बर्ताव प्रथम दृष्टया उसके आदेशों की जानबूझकर और शरारतपूर्ण अवहेलना के समान है। कोर्ट को संदेह था कि BMC के अधिकारी अतिक्रमण करने वालों के साथ मिलीभगत करके उन्हें बचा रहे हैं और उनसे 'हफ्ता' (वसूली) ले रहे हैं।

    जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने बेदखली का आदेश जारी करने के लिए समय बढ़ाने की BMC की मांग के पीछे दिए गए कारण पर अविश्वास जताया। BMC का तर्क था कि संबंधित अधिकारी, डॉ. प्रफुल्ल दिनेश तांबे को मराठी नहीं आती है और उन्हें दस्तावेजों के अनुवाद की आवश्यकता है।

    अदालत ने एक दिन का भी अतिरिक्त समय देने से इनकार किया और कहा कि BMC को आदेश का पालन करने के लिए पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका था।

    Case Title : M/s Parag Construction (now Dube Constructions) v. Sandhya Nandedkar

    अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

    Next Story