सीएम पर ही आरोप हो तो क्या ED राज्य पुलिस के पास जाए? सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल से पूछा

Praveen Mishra

24 March 2026 5:52 PM IST

  • सीएम पर ही आरोप हो तो क्या ED राज्य पुलिस के पास जाए? सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल से पूछा

    सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण मौखिक टिप्पणी की है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब आरोप स्वयं राज्य सरकार और मुख्यमंत्री पर हों, तो क्या जांच एजेंसी को राहत के लिए उसी राज्य सरकार के पास जाना उचित होगा।

    जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। यह याचिका ED और उसके अधिकारियों द्वारा अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई है, जिसमें I-PAC कार्यालय पर की गई छापेमारी के दौरान कथित बाधा को लेकर CBI जांच की मांग की गई है।

    सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने राज्य सरकार की ओर से प्रारंभिक आपत्तियां उठाते हुए कहा कि ED अनुच्छेद 32 का सहारा नहीं ले सकता और यदि किसी अधिकारी को अपने कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा आती है, तो वह भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति में राज्य पुलिस ही मामले की जांच कर सकती है।

    इस पर कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री स्वयं जांच में हस्तक्षेप करने के आरोपी हैं, तो क्या ED उसी राज्य सरकार से शिकायत कर राहत मांगे। कोर्ट ने यह भी कहा कि ED अधिकारी नागरिक होने के नाते अपने मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दाखिल कर सकते हैं।

    सिब्बल ने दलील दी कि जांच एजेंसियों का कोई मौलिक अधिकार नहीं होता और वे केवल अपने वैधानिक अधिकारों के तहत कार्य करती हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि यह मामला दो अलग-अलग पहलुओं से जुड़ा है—एक PMLA के तहत जांच और दूसरा जांच के दौरान कथित रूप से किए गए अपराध।

    मामले की पृष्ठभूमि में ED का आरोप है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, कुछ राजनीतिक नेताओं और पुलिस अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचीं और छापेमारी में बाधा डाली। वहीं राज्य सरकार ने इन आरोपों का विरोध करते हुए कहा कि पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ लोग केंद्रीय एजेंसी के अधिकारी बनकर परिसर में दाखिल हुए हैं, जिसके बाद हस्तक्षेप किया गया।

    इस बीच, पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही रोक लगा चुका है और राज्य को CCTV फुटेज व अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है।

    मामले में आगे की सुनवाई अप्रैल में होगी, जहां अनुच्छेद 32 के तहत याचिका की ग्राह्यता (maintainability) पर विस्तृत बहस जारी रहेगी।

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