अडानी को दिए गए टेंडर को चुनौती: सुप्रीम कोर्ट ने की COVID-19 के दौरान धारावी के लोगों की सूझ-बूझ की तारीफ

  • अडानी को दिए गए टेंडर को चुनौती: सुप्रीम कोर्ट ने की COVID-19 के दौरान धारावी के लोगों की सूझ-बूझ की तारीफ

    धारावी झुग्गी पुनर्वास परियोजना के री-डेवलपमेंट पर सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने COVID-19 महामारी के समय धारावी झुग्गी के निवासियों और कॉरपोरेशन के अधिकारियों द्वारा दिखाई गई बेहतरीन समझदारी और सूझबूझ की तारीफ़ की।

    सेकलिंक टेक्नोलॉजीज़ की याचिका पर सुनवाई करते हुए - जिसमें बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फ़ैसले को चुनौती दी गई, जिसमें सेकलिंक को दिया गया टेंडर रद्द कर दिया गया और झुग्गी पुनर्वास के लिए अडानी प्रॉपर्टीज़ को दिया गया टेंडर सही ठहराया गया - जस्टिस पीबी वराले ने मौखिक रूप से निवासियों के साहस की तारीफ़ की। उन्होंने कहा कि इतनी ज़्यादा आबादी वाले इलाके में भी लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखी।

    जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस वराले की बेंच महाराष्ट्र सरकार के सेकलिंक के पक्ष में दिए गए टेंडर को रद्द करने के फ़ैसले को सेकलिंक द्वारा चुनौती दिए जाने के मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (महाराष्ट्र राज्य की ओर से) की दलीलें सुन रही थी। याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट गोपाल सुब्रमण्यम पेश हुए।

    मेहता ने बताया कि पिछला टेंडर क्यों रद्द किया गया और दोबारा जारी किए गए टेंडर में कई पहलुओं पर दायरा कैसे बढ़ाया गया। उन्होंने इस बात का भी ज़िक्र किया कि महामारी के दौरान चीज़ें उस तरह से आगे नहीं बढ़ पाईं, जैसे बढ़नी चाहिए थीं।

    इस पर जस्टिस वराले ने कहा:

    "चूंकि COVID-19 महामारी का ज़िक्र किया गया, इसलिए मैं उन सभी धारावी निवासियों की असाधारण समझदारी और सूझबूझ की तारीफ़ करना चाहता हूं, जो उन्होंने महामारी के दौरान दिखाई। उस समय इतने बड़े इलाके में मेडिकल मदद पहुंचाना बहुत मुश्किल था, लेकिन उनकी मिली-जुली कोशिशों और समझदारी की वजह से कॉर्पोरेशन के अधिकारी कोविड से लड़ पाए और वे बाकी बॉम्बे के लिए एक मिसाल बने। उस लड़ाई में कॉरपोरेशन के कई अधिकारियों की जान चली गई। इसकी तारीफ़ होनी चाहिए। वरना मरने वालों की संख्या लाखों में होती।"

    उन्होंने कहा कि निवासी कॉर्पोरेशन के अधिकारियों के साथ खड़े रहे और अपनी मर्ज़ी से अधिकारियों की मदद की।

    इससे सहमत होते हुए एसजी मेहता ने कहा:

    "धारावी इलाके में एक घर में 10-15 लोग रहते थे और लॉकडाउन वाले इलाके में हालात का अंदाज़ा लगाइए। वे वहीं रह रहे थे। गलियां इतनी संकरी हैं कि सोशल डिस्टेंसिंग एक दूर का सपना है, लेकिन यह सब लोगों के खुद से अपनाए गए अनुशासन और कॉरपोरेशन के लोगों की निस्वार्थ सेवा की वजह से ही हो पाया।"

    यह सुनकर जस्टिस सुंदरेश ने सहमति जताई कि उन्होंने परिपक्वता दिखाई और कहा कि कभी-कभी गरीबी जैसे हालात आपको ऐसी स्थितियों में सीखना और तालमेल बिठाना सिखाते हैं।

    आगे कहा गया,

    "कभी-कभी, गरीबी और सुविधाओं की कमी आपको खुले विचारों वाला बनाती है। ऐसा संयुक्त परिवारों में भी होता है। अगर आप संयुक्त परिवार में हैं, लोगों के साथ रहते हैं तो आप जानते हैं कि कैसे तालमेल बिठाना है और समस्याओं का सामना कैसे करना है। चरित्र में त्याग की भावना आती है। वे समस्याओं से निपटने के लिए बेहतर स्थिति में होते हैं।"

    इस मामले में सेशेल्स में रजिस्टर्ड याचिकाकर्ता कंपनी पहले टेंडर प्रोसेस में सबसे ऊंची बोली लगाने वाली कंपनी थी। पहले टेंडर की फाइनेंशियल बिड में SecLink ने 7200 करोड़ रुपये की बोली लगाई, जबकि Adani Properties ने 4529 करोड़ रुपये की बोली लगाई।

    SecLink ने महाराष्ट्र सरकार (GoM) की सेक्रेटरीज़ की कमेटी (CoS) के 27 अगस्त 2020 के उस फैसले को चुनौती दी, जिसमें धारावी इलाके के रीडेवलपमेंट के लिए 28 नवंबर 2018 को शुरू की गई टेंडर प्रोसेस रद्द कर दिया गया।

    CoS ने प्रोजेक्ट के लिए फिर से टेंडर (री-टेंडरिंग) की प्रोसेस अपनाने का फैसला किया ताकि रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट में रेलवे की 45 एकड़ ज़मीन को शामिल किया जा सके। महाराष्ट्र सरकार के हाउसिंग डिपार्टमेंट द्वारा 5 नवंबर 2020 को जारी सरकारी आदेश (GR) के तहत, बदली हुई शर्तों और नियमों के साथ नया टेंडर निकाला गया।

    नए टेंडर प्रोसेस में Adani Properties को 5069 करोड़ रुपये की बोली के साथ टेंडर मिला। SecLink ने तर्क दिया कि नया टेंडर उसे और दूसरे संभावित बोली लगाने वालों के अधिकारों को खत्म करने और किसी खास बोली लगाने वाले को फायदा पहुंचाने के मकसद से जारी किया गया। उसने कहा कि नया टेंडर खास तौर पर किसी एक बोली लगाने वाले के हिसाब से तैयार किया गया।

    इसे बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, जिसने माना कि CoS द्वारा पहले की टेंडर प्रोसेस रद्द करने के लिए दिए गए कारण सही थे। कोर्ट ने पाया कि CoS ने इस बात पर चर्चा की कि रेलवे की ज़मीन को शामिल करने से प्रोजेक्ट ज़्यादा व्यावहारिक (viable) हो जाता है और ऐसा करना जनहित में है। कोर्ट ने कहा कि नया टेंडर इसी बात को ध्यान में रखकर जारी किया गया।

    Case Details: SECLINK TECHNOLOGIES CORPORATION Vs THE STATE OF MAHARASHTRA|SLP(C) No. 6090/2025

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