दिल्ली मेट्रो 10 अक्टूबर को पूरी तरह चालू थी, लेकिन प्रदर्शन के कारण यात्रियों की संख्या घटी: DMRC ने सुप्रीम कोर्ट को बताया
Praveen Mishra
14 Oct 2026 3:59 PM IST

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के दौरान मेट्रो सेवाएं पूरी तरह संचालित रहीं। हालांकि, प्रदर्शन के कारण आम नागरिकों की दैनिक गतिविधियां प्रभावित हुईं और कई लोगों ने यात्रा नहीं करने का फैसला किया।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अनुपालन हलफनामे में DMRC ने बताया कि 10 अक्टूबर को मेट्रो नेटवर्क पर लगभग 32 लाख यात्रियों ने सफर किया, जबकि महीने के दूसरे शनिवार को सामान्यतः करीब 58 लाख यात्री मेट्रो से यात्रा करते हैं।
DMRC के अनुसार, यात्रियों की संख्या में आई कमी से संकेत मिलता है कि प्रदर्शन का आम लोगों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा और कई लोगों को अपनी सामान्य गतिविधियां छोड़नी पड़ीं।
सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के आदेश के अनुपालन में हलफनामा
DMRC ने यह हलफनामा सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के आदेश के अनुपालन में दाखिल किया है। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शनों के मद्देनजर मेट्रो और अन्य रेल सेवाओं को पूरी तरह बंद करने के बजाय उचित और नियंत्रित तरीके से संचालित किया जाए, ताकि आम जनता को अनावश्यक परेशानी न हो।
गौरतलब है कि जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने रविवार को विशेष सुनवाई के दौरान उस अवमानना याचिका में प्रथम दृष्टया मामला पाया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद 10 अक्टूबर को दिल्ली में मेट्रो सेवाएं बड़े पैमाने पर बंद रहीं। इस मामले में DMRC को नोटिस जारी किया गया है।
4,157 निर्धारित मेट्रो ट्रिप संचालित की गईं
DMRC ने हलफनामे में कहा कि 10 अक्टूबर को मेट्रो ट्रेनों की निर्धारित यात्राओं की संख्या में कोई कटौती नहीं की गई। उस दिन कुल 271 ट्रेनों को सेवा में लगाया गया और पूरे नेटवर्क में निर्धारित सभी 4,157 ट्रेन ट्रिप संचालित की गईं।
हालांकि, दिल्ली पुलिस के निर्देशों के बाद दिल्ली मेट्रो के 303 स्टेशनों में से 45 स्टेशनों पर यात्रियों के प्रवेश और निकास पर प्रतिबंध लगाया गया था।
DMRC के अनुसार, शुरुआत में 57 स्टेशनों पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने सुरक्षा आवश्यकताओं का दोबारा आकलन किया और प्रतिबंधित स्टेशनों की संख्या घटाकर 45 कर दी।
258 स्टेशन पूरी तरह चालू रहे
DMRC ने बताया कि मेट्रो नेटवर्क के 85 प्रतिशत से अधिक हिस्से में सेवाएं पूरी तरह चालू और यात्रियों के लिए सुलभ रहीं। कुल 303 स्टेशनों में से 258 स्टेशन सामान्य रूप से संचालित हुए।
हलफनामे के अनुसार, प्रतिबंधों से प्रभावित 45 स्टेशनों में से 14 पर इंटरचेंज की सुविधा भी बिना किसी रुकावट के जारी रही।
DMRC ने यह भी बताया कि पुलिस अधिकारियों से सूचना मिलने के बाद 10 अक्टूबर को रात 10 बजे से इन 45 स्टेशनों पर लगाए गए प्रतिबंध हटा दिए गए।
यात्रियों को सोशल मीडिया और घोषणाओं के जरिए दी गई जानकारी
DMRC ने कोर्ट को बताया कि प्रतिबंधों के संबंध में यात्रियों को जानकारी देने के लिए उसके सोशल मीडिया अकाउंट, वेबसाइट और सारथी ऐप के माध्यम से नियमित अपडेट जारी किए गए। इसके अलावा, मेट्रो ट्रेनों और स्टेशनों के भीतर घोषणाएं भी की गईं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
सुप्रीम कोर्ट ने 9 अक्टूबर को यह आदेश 10 अक्टूबर के प्रदर्शनों से पहले लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया था।
कोर्ट ने कहा था कि संबंधित अधिसूचनाएं आवश्यक सार्वजनिक परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने जैसी प्रतीत होती हैं। पीठ ने मेट्रो और रेल सेवाओं के संचालन को नियंत्रित करने तथा उन्हें पूरी तरह प्रतिबंधित करने के बीच अंतर पर जोर दिया था।
कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि आनुपातिकता के सिद्धांत का पालन करते हुए मेट्रो और अन्य रेल सेवाओं को उचित एवं नियंत्रित तरीके से चलाने की अनुमति दी जाए, ताकि आम जनता को असुविधा का सामना न करना पड़े।

