BREAKING| राज्यसभा उम्मीदवारी रद्द होने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची कांग्रेस सदस्य मीनाक्षी नटराजन
Shahadat
11 Jun 2026 9:52 AM IST

इंडियन नेशनल कांग्रेस (Congress) की मीनाक्षी नटराजन ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन रद्द किए जाने को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
इस मामले को आज (गुरुवार) सुबह तत्काल सुनवाई के लिए पेश किए जाने की संभावना है।
खबरों के अनुसार, रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने नटराजन का आवेदन इसलिए खारिज किया था, क्योंकि उन पर आरोप है कि उन्होंने नामांकन पत्रों में तेलंगाना में अपने खिलाफ लंबित एक आपराधिक मामले की जानकारी "छिपाई"।
यह मामला तेलंगाना की पूर्व कांग्रेस कार्यकर्ता ए. श्रीलता द्वारा हैदराबाद के IV अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दायर निजी शिकायत (संख्या 4472/2025) से जुड़ा है, जिसमें नटराजन को प्रतिवादी नंबर 4 बनाया गया।
अपनी शिकायत में उन्होंने कथित तौर पर आरोपी व्यक्ति (जिसे प्रतिवादी नंबर 1 के रूप में नामित किया गया) के खिलाफ छेड़छाड़ का आरोप लगाया। साथ ही नटराजन व अन्य पर पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी होने के बावजूद बार-बार शिकायत करने पर भी कोई कार्रवाई न करने का भी आरोप लगाया। गौरतलब है कि नटराजन तेलंगाना कांग्रेस के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की प्रभारी हैं।
खबरों के अनुसार, नटराजन को इस शिकायत पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223 के तहत नोटिस मिला। इस प्रावधान के अनुसार, पक्षकारों की बात सुने बिना निजी शिकायत पर संज्ञान नहीं लिया जा सकता है। इसे देखते हुए मजिस्ट्रेट ने नटराजन को यह बताने के लिए बुलाया था कि एक आरोपी के तौर पर उनके खिलाफ संज्ञान क्यों नहीं लिया जाना चाहिए।
INC ने X (पूर्व में ट्विटर) पर ट्वीट किया कि उन्होंने नटराजन की उम्मीदवारी रद्द किए जाने के खिलाफ चुनाव आयोग का रुख किया। कहा गया कि 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम' की धारा 33A के अनुसार, जानकारी का खुलासा केवल उन मामलों में करना आवश्यक है जहां सजा 2 साल से अधिक हो और जहां आरोप तय किए गए हों।
INC का कहना है कि नटराजन को केवल अदालत के समक्ष पेश होने का नोटिस मिला है, और मामले का संज्ञान नहीं लिया गया।
पार्टी ने कहा,
"सुश्री नटराजन को सिर्फ़ कोर्ट के सामने पेश होने और यह बताने के लिए नोटिस मिला था कि मामले का संज्ञान क्यों न लिया जाए। इसका मतलब है कि उन्हें नोटिस संज्ञान लिए जाने से पहले ही मिल गया। कानून की नज़र में संज्ञान लिए बिना कोई आपराधिक मामला नहीं बनता। अगर किसी मामले का संज्ञान नहीं लिया गया तो सिर्फ़ मेरे किसी पर आरोप लगाने से ही कोई आपराधिक मामला नहीं बन जाता।
उन्होंने सुश्री नटराजन का नामांकन तब भी खारिज किया, जब मामले का संज्ञान तक नहीं लिया गया; यानी ऐसा कोई आपराधिक मामला है ही नहीं, जिसके बारे में उन्हें जानकारी देनी पड़ती। जबकि धारा 33A कहती है कि संज्ञान लेने के बाद जांच होगी। जांच के बाद चार्जशीट दाखिल की जाएगी।"
Case Details : Meenakshi Natarajan v. Election Commission of India | Diary No.36330/2026

