'₹370 बिरयानी' विवाद में FIR से राहत के लिए कॉमेडियन प्रणीत मोरे पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

Shahadat

16 Sept 2026 10:25 PM IST

  • ₹370 बिरयानी विवाद में FIR से राहत के लिए कॉमेडियन प्रणीत मोरे पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

    '₹370 बिरयानी' विवाद पर भारी आलोचना झेलने के बाद कॉमेडियन प्रणीत मोरे ने महाराष्ट्र और हरियाणा में अपने खिलाफ दर्ज FIR को एक साथ जोड़ने (क्लब करने) के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

    मोरे की याचिका में भारत सरकार और महाराष्ट्र व हरियाणा राज्यों को पक्षकार बनाया गया। इस मामले की सुनवाई 21 सितंबर को होने की संभावना है।

    संक्षेप में मामला

    मोरे तब लोगों की कड़ी आलोचना का शिकार हुए, जब उनके शो में मौजूद एक दर्शक, हिमांशु जांगड़ा ने महिलाओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणी की। जांगड़ा ने कहा कि डेट पर चिकन के लिए ₹370 खर्च करने के बदले में उसे यौन संबंध की उम्मीद है।

    कॉमेडियन ने भीड़ के साथ इस बात पर हँसी-मज़ाक किया और टिप्पणी का जवाब देते हुए इसे "पीक गुरुग्राम कंटेंट" (गुरुग्राम का ठेठ अंदाज़) कहा। इसके बाद यौन संबंध के लिए सहमति (कंसेंट) को हल्के में लेने के कारण उन्हें ऑनलाइन आलोचना का सामना करना पड़ा।

    जहां इस टिप्पणी के कारण जांगड़ा को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी, वहीं महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने मोरे, जांगड़ा और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज की। खबरों के अनुसार, यह FIR BNS की धारा 75 (यौन उत्पीड़न), 294 (अश्लील सामग्री की बिक्री/वितरण), 353 (सार्वजनिक उपद्रव), 354 (दैवीय नाराजगी का डर दिखाकर किसी को कुछ करने या न करने के लिए मजबूर करना) और IT Act की धारा 67 के तहत दर्ज की गई।

    राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी मोरे को समन भेजा था। इसके बाद उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर माफी के वीडियो पोस्ट किए और कहा कि वह "नफरत के हकदार" थे। हाल ही में उन्होंने 'घायल' नाम के टूर के साथ स्टैंड-अप कॉमेडी में वापसी की घोषणा की।

    इससे पहले, कॉमेडियन समय रैना को भी अपने शो "इंडियाज़ गॉट लेटेंट" (सीज़न 1) में यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया (उर्फ 'बीयरबाइसेप्स') द्वारा की गई कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियों के कारण भारी आलोचना का सामना करना पड़ा। इस विवाद में लगभग 5 कॉमेडियन शामिल थे, जिसके चलते देश भर में FIR दर्ज की गईं। मामला आखिरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जिसने इलाहाबादिया और बाद में रैना को उनकी टिप्पणियों/व्यवहार के लिए फटकार लगाई।

    इस कार्यवाही का दायरा दिव्यांग लोगों पर किए गए मज़ाक तक भी फैल गया। आखिरकार कोर्ट ने FIR रद्द कीं, लेकिन उससे पहले कॉमेडियन्स ने सोशल मीडिया पर माफ़ी मांगी और दिव्यांग लोगों पर किए गए मज़ाक के लिए सुधार के कदम उठाए।

    सुप्रीम कोर्ट में एक PIL भी दायर की गई, जिसमें स्टैंड-अप कॉमेडी, पॉडकास्ट, लाइव स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म और यूज़र-जनरेटेड डिजिटल कंटेंट के लिए एक व्यापक रेगुलेटरी फ़्रेमवर्क की मांग की गई। यह PIL "₹370 बिरयानी" विवाद का ज़िक्र करती है, जो डिजिटल युग में संवैधानिक सुरक्षा की ज़रूरत को दिखाने वाले उदाहरणों में से एक है।

    Case: Pranit More v. State of Maharashtra and Ors., WP(Crl) No. 367/2026

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