मीडिया का गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार: CJI ने छात्र प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से इनकार की खबरों को गलत बताया
Shahadat
24 July 2026 12:54 PM IST

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत ने शुक्रवार को उन मीडिया रिपोर्टों को "पूरी तरह से गलत" बताया, जिनमें कहा गया कि उन्होंने छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका को लिस्ट करने से इनकार कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में कोई रिट याचिका दायर नहीं की गई।
ओपन कोर्ट में इस मुद्दे पर बात करते हुए CJI ने कहा कि उनके सामने जो बात रखी गई, वह केवल एक वकील द्वारा भेजा गया पत्र (रिप्रेजेंटेशन) था, न कि अदालत में दायर की गई कोई याचिका। यह कहते हुए कि किसी औपचारिक फाइलिंग के बिना केवल रिप्रेजेंटेशन को रिट याचिका नहीं माना जा सकता, CJI ने इस रिपोर्टिंग पर चिंता व्यक्त की और इसे "गैर-जिम्मेदाराना और लापरवाह" करार दिया।
CJI ने टिप्पणी की,
"पिछले दो दिनों में यह पूरी तरह से गलत बयान दिया गया कि कोई मामला दायर किया गया, और मीडिया ने बिना किसी जिम्मेदारी के यह गलत रिपोर्टिंग की कि चीफ जस्टिस ने मामले को लिस्ट करने से इनकार कर दिया। सुबह 10 बजे तक एक भी पन्ना दायर नहीं किया गया। यह केवल एक रिप्रेजेंटेशन था... जो उस मिश्रा या किसी और ने भेजा था। मैं उस रिप्रेजेंटेशन को रिट याचिका कैसे मान सकता हूँ? और लोग बिना सोचे-समझे इसकी रिपोर्टिंग करने लगते हैं।"
CJI ने ये टिप्पणियां तब कीं, जब सीनियर एडवोकेट शोएब आलम ने लिस्टिंग के लिए एक और मामला उठाया।
22 जुलाई को वकील नरेंद्र मिश्रा ने छात्र प्रदर्शनों पर पुलिस की कार्रवाई के संबंध में CJI को संबोधित अपनी पत्र-याचिका का मौखिक रूप से उल्लेख किया।
मामले पर विचार करने से इनकार करते हुए CJI ने उनसे कहा,
"हमारा समय बर्बाद न करें, अपना समय बर्बाद न करें।"
जब वकील ने कहा कि उनके पास पुलिस की कार्रवाई दिखाने वाले वीडियो हैं तो CJI ने जवाब दिया,
"हमें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है; हमारे पास उन्हें देखने का समय नहीं है।"


