युवाओं पर की गई टिप्पणियों पर CJI की सफ़ाई: फ़र्ज़ी डिग्री लेकर पेशे में आने वालों को कहा था 'कॉकरोच'

Shahadat

16 May 2026 4:06 PM IST

  • युवाओं पर की गई टिप्पणियों पर CJI की सफ़ाई: फ़र्ज़ी डिग्री लेकर पेशे में आने वालों को कहा था कॉकरोच

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने शनिवार को अदालती सुनवाई के दौरान अपनी मौखिक टिप्पणियों पर सफ़ाई जारी करते हुए कहा कि मीडिया के एक हिस्से ने उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया और उनकी टिप्पणियों को देश के युवाओं की आलोचना के तौर पर गलत ढंग से दिखाया।

    ऑनलाइन विवाद खड़ा होने के बाद जारी एक बयान में CJI ने कहा कि उनकी टिप्पणियाँ केवल उन लोगों के ख़िलाफ़ थीं, जिन्होंने फ़र्ज़ी या नकली डिग्री का इस्तेमाल करके क़ानूनी क्षेत्र जैसे पेशों में प्रवेश किया है, न कि आम तौर पर युवाओं के ख़िलाफ़।

    CJI ने कहा,

    "मुझे यह पढ़कर दुख हुआ कि मीडिया के एक हिस्से ने कल एक मामूली मामले की सुनवाई के दौरान मेरी मौखिक टिप्पणियों को किस तरह गलत तरीके से पेश किया। मैंने विशेष रूप से उन लोगों की आलोचना की थी, जिन्होंने फ़र्ज़ी और नकली डिग्री की मदद से बार (क़ानूनी पेशा) जैसे पेशों में प्रवेश किया। ऐसे ही लोग मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य प्रतिष्ठित पेशों में भी घुसपैठ कर चुके हैं। इसलिए वे परजीवी (Parasites) की तरह हैं।"

    उन्होंने आगे कहा कि यह कहना पूरी तरह से बेबुनियाद है कि उन्होंने देश के युवाओं की आलोचना की।

    उन्होंने कहा,

    "यह कहना पूरी तरह से बेबुनियाद है कि मैंने हमारे देश के युवाओं की आलोचना की। मुझे न केवल हमारे वर्तमान और भविष्य के मानव संसाधन पर गर्व है, बल्कि भारत का हर युवा मुझे प्रेरित करता है। यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि भारतीय युवाओं के मन में मेरे लिए बहुत आदर और सम्मान है, और मैं भी उन्हें एक विकसित भारत के स्तंभों के रूप में देखता हूँ।"

    दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा 'सीनियर एडवोकेट' का दर्जा दिए जाने की माँग करने वाले एक वकील की याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस ने टिप्पणी की थी कि उन्हें कई वकीलों, विशेष रूप से दिल्ली में सक्रिय वकीलों की क़ानून की डिग्रियों की प्रामाणिकता पर संदेह है, और वे CBI से उनकी डिग्रियों की जांच करवाने पर विचार कर रहे हैं।

    सुनवाई के दौरान, CJI ने टिप्पणी की थी कि व्यवस्था पर हमला करने वाले कुछ "परजीवी" (Parasites) मौजूद हैं, और उन्होंने उन बेरोज़गार युवाओं के बारे में भी टिप्पणियां की थीं, जो मीडिया, सोशल मीडिया और सामाजिक सक्रियता (Activism) के क्षेत्रों में अपनी जगह बना लेते हैं।

    CJI ने कहा था,

    "कुछ युवा कॉकरोच की तरह होते हैं, जिन्हें कहीं कोई रोज़गार नहीं मिलता और पेशे में उनके लिए कोई जगह नहीं होती। उनमें से कुछ मीडिया में चले जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया में कुछ RTI एक्टिविस्ट बन जाते हैं, कुछ अन्य तरह के कार्यकर्ता बन जाते हैं। फिर वे हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं।"

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