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CJAR ने मेडिकल कॉलेज घोटाले मामले में सुप्रीम कोर्ट में 25 लाख का जुर्माना जमा किया, कानूनी बिरादरी के लिए SCBA के पास देने का आग्रह किया

LiveLaw News Network
4 Nov 2020 5:03 AM GMT
CJAR ने मेडिकल कॉलेज घोटाले मामले में सुप्रीम कोर्ट में 25 लाख का जुर्माना जमा किया, कानूनी बिरादरी के लिए SCBA के पास देने का आग्रह किया
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सुप्रीम कोर्ट द्वारा कैंपेन फॉर ज्यूडिशियल अकाउंटेबलिटी एंड रिफॉर्म्स (CJAR) की उस अर्जी पर जल्द ही सुनवाई करने की उम्मीद है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2017 में लगाए गए 25 लाख रुपये के जुर्माने के भुगतान में देरी के लिए माफी की मांग की गई है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा CJAR की याचिका[ज्यूडिशियल अकाउंटेबलिटी एंड रिफॉर्म्स बनाम भारत संघ और अन्य रिट पिटीशन ( आपराधिक ) संख्या 169/ 2017] खारिज करते हुए जुर्माना लगाया था जिसमें इसने मेडिकल कॉलेज घोटाले में एक विशेष जांच दल द्वारा जांच की मांग की थी।

सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक मामले के परिणाम को प्रभावित करने के लिए आपराधिक साजिश के बारे में सितंबर 2017 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा एक प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद ये याचिका दायर की गई थी। CJAR ने देरी को माफ करने के आवेदन में कहा कि इसके पास बैंक खाता नहीं है और यह सदस्यों के योगदान से काम करता है। इसमें कुल 11 लाख रुपये की राशि जमा हुई थी। इसके बाद, संगठन की कार्य समिति की बैठक में बची हुई राशि भुगतान के बारे में निर्णय लिया गया।

"इस माननीय न्यायालय के आदेश के बाद आवेदक ने इस जुर्माने के भुगतान के लिए दान के लिए एक ऑनलाइन अभियान चलाया, जिसके माध्यम से लगभग 11 लाख रुपये एकत्र किए गए। चूंकि आवेदक एक कानूनी इकाई नहीं है और उसके पास कोई बैंक खाता या पैन कार्ड या आधार नहीं है। (याचिका के पैरा 1 ए में विधिवत उल्लेख किया गया है) यह एक संबद्ध संगठन के बैंक में रखा गया था। हालांकि, चूंकि यह एकत्रित धन 25 रुपये से काफी कम था, इसलिए उस समय इसका भुगतान नहीं किया गया था।"

आवेदन में कहा गया है कि याचिकाकर्ता के विवेक के अनुसार, इस तरह का जुर्माना कभी भी किसी याचिकाकर्ता पर सार्वजनिक हित में या न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए दायर की गई याचिका पर नहीं लगाया गया है और इस प्रकार, इसके खिलाफ एक पुनर्विचार याचिका दायर की गई थी, जिसे खारिज कर दिया गया था।

इस संदर्भ में, याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी कहा है कि,

"अनुकरणीय लागत का आदेश वापस लें" जो एनजीओ पर लगाया गया है क्योंकि यह कुछ बहुत ही प्रतिष्ठित लोगों की प्रतिष्ठा को बाधित करता है जोहर तरह से बेदाग हैं।"

आवेदन में कहा गया है कि भले ही CJAR की याचिका को खारिज कर दिया गया था, लेकिन सीबीआई ने मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों और सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, न्यायमूर्ति आईएम कुद्दुसी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया और आरोप पत्र के आधार पर विशेष सीबीआई अदालत ने जुलाई 2019 में मामले का संज्ञान लिया।

"साजिश जिसमें याचिकाकर्ता संगठन ने जांच की मांग की, बाद में सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और मेडिकल कॉलेज के मालिकों और बिचौलियों की गिरफ्तारी और चार्जशीट दाखिल की गई। इन विभिन्न घटनाओं के बावजूद, आवेदक के पास कोई धन या बैंक खाता नहीं था, फिर भी 25 लाख अनुकरणीय जुर्माना देने के लिए कहा गया था।"

साथ ही आवेदन में याचिकाकर्ता संगठन पर लगाए गए जुर्माने का भुगतान करने में देरी को माफ करने को कहा है और आगे 25 लाख रुपये को बरकरार रखा जा सकता है और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन को दिया जा सकता है, लेकिन अनुकरणीय लागत के आदेश को वापस लेना चाहिए क्योंकि यह कुछ बहुत ही प्रतिष्ठित लोगों की प्रतिष्ठा को गलत तरीके से प्रभावित करता है।

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