Civil Service Exam : CIC ने UPSC और DoPT के सफल उम्मीदवारों के पेपर-वार नंबर प्रकाशित करना बंद करने की आलोचना की

Shahadat

24 May 2026 8:35 PM IST

  • Civil Service Exam : CIC ने UPSC और DoPT के सफल उम्मीदवारों के पेपर-वार नंबर प्रकाशित करना बंद करने की आलोचना की

    केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) की सिविल सेवा परीक्षा (CSE) के सफल उम्मीदवारों के पेपर-वार नंबरों को सार्वजनिक करने के मामले में उनके "विरोधाभासी रवैये" की आलोचना की। आयोग ने कहा कि CSE 2017 के बाद इस प्रक्रिया को बंद करने के पीछे का तर्क संतोषजनक ढंग से नहीं समझाया गया।

    UPSC के उम्मीदवार अनिकेत कुमार गुप्ता द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act) के तहत दायर दूसरी अपील की सुनवाई करते हुए सूचना आयुक्त आनंदी रामलिंगम की पीठ ने DoPT को निर्देश दिया कि वह सहायक रिकॉर्ड के साथ विस्तृत लिखित जवाब दाखिल करे। इस जवाब में यह समझाया जाना चाहिए कि अलग-अलग विषयों के नंबरों को प्रकाशित करना क्यों बंद किया गया और आयोग को पुरानी प्रक्रिया को फिर से शुरू करने की सिफ़ारिश क्यों नहीं करनी चाहिए।

    यह विवाद CSE 2014 से CSE 2023 तक सफल उम्मीदवारों द्वारा सामान्य अध्ययन के प्रत्येक पेपर, वैकल्पिक विषय के पेपर, निबंध और व्यक्तित्व परीक्षण (इंटरव्यू) में प्राप्त विस्तृत नंबरों को सार्वजनिक न करने के इर्द-गिर्द केंद्रित है।

    अपीलकर्ता ने तर्क दिया कि CSE 2017 तक UPSC सफल उम्मीदवारों के पेपर-वार नंबर सार्वजनिक रूप से जारी करता था। हालांकि, CSE 2018 से केवल लिखित परीक्षा के कुल नंबर और इंटरव्यू के नंबर ही प्रकाशित किए गए, जिसमें विषयों के अनुसार कोई अलग-अलग विवरण नहीं दिया गया।

    व्यक्तिगत रूप से पेश होते हुए अपीलकर्ता-उम्मीदवार ने तर्क दिया कि UPSC CSE 2017 तक पेपर-वार नंबर सार्वजनिक करता था, लेकिन 2018 से उसने यह प्रक्रिया बंद की और केवल लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के कुल नंबर ही प्रकाशित किए। उन्होंने कहा कि आधिकारिक डेटा की कमी के कारण कोचिंग संस्थान "ज़्यादा नंबर दिलाने वाले" वैकल्पिक विषयों और टॉपर्स के प्रदर्शन के बारे में गुमराह करने वाले दावे करने लगते हैं।

    अपीलकर्ता ने ज़ोर देकर कहा कि उम्मीदवार, विशेष रूप से वंचित पृष्ठभूमि से आने वाले उम्मीदवार, वैकल्पिक विषयों का चयन करते समय कोचिंग संस्थानों के ऐसे विज्ञापनों पर निर्भर रहने को मजबूर हो जाते हैं, जिनकी सत्यता की जाँच नहीं की जा सकती।

    UPSC ने यह दावा करते हुए नंबरों को सार्वजनिक न करने के अपने फ़ैसले का बचाव किया कि विषयों के अनुसार विस्तृत नंबर "व्यक्तिगत जानकारी" की श्रेणी में आते हैं। DoPT ने भी यह तर्क दिया कि इन नंबरों को सार्वजनिक करने से कोचिंग संस्थान इनका दुरुपयोग कर सकते हैं और उम्मीदवारों के मन में गुमराह करने वाली धारणाएँ पैदा हो सकती हैं।

    हालांकि, CIC ने UPSC और DoPT द्वारा दिए गए जवाबों में विसंगतियों को नोट किया। जहाँ एक ओर DoPT ने दावा किया कि विषयों के अनुसार नंबरों का रिकॉर्ड केवल UPSC ही रखता है, वहीं दूसरी ओर UPSC ने कहा कि यह जानकारी DoPT के साथ साझा की जाती है।

    आयोग ने टिप्पणी की,

    "CPIO ने कथित प्रथा को बंद करने के निर्णय के समर्थन में कोई भी पुष्टिकारी रिकॉर्ड, सर्कुलर, नीति या फ़ाइल नोटिंग पेश नहीं किया। साथ ही अपनी दलीलों का आधार पूरी तरह से 'संस्थागत स्मृति' (Institutional Memory) को बनाया। वास्तव में, UPSC के CPIO ने सुनवाई के दौरान इस बात की पुष्टि की कि उनकी ओर से DoPT को अनुशंसित उम्मीदवारों के अलग-अलग अंकों को प्रकाशित करने की प्रथा को बंद करने के संबंध में कोई आदेश या निर्देश नहीं दिए गए। इसके अलावा, DoPT के CPIO द्वारा 07.05.2026 को दायर लिखित प्रस्तुतियों के अनुसार, पैरा 5 में यह कहा गया कि विषय-वार अंक केवल UPSC द्वारा ही तैयार किए जाते हैं, उनका रखरखाव किया जाता है और उन्हें अपने पास सुरक्षित रखा जाता है। इसके विपरीत, UPSC के CPIO ने 30.01.2026 को अपनी प्रस्तुतियों के पैरा 5 में यह कहा कि विषय-वार अंकों सहित समस्त जानकारी DoPT को सौंप दी जाती है।”

    आयोग ने यह भी पाया कि प्रतिवादी यह समझाने में विफल रहे कि 2017 के बाद अलग-अलग अंकों को प्रकाशित करने की प्रथा को क्यों बंद कर दिया गया। यह भी नोट किया कि “व्यक्तिगत जानकारी” (Personal Information) से संबंधित छूट के चयनात्मक अनुप्रयोग के संबंध में अपीलकर्ता के तर्कों का कोई उत्तर नहीं दिया गया।

    तदनुसार, CIC ने DoPT को निर्देश दिया कि वह विस्तृत लिखित प्रस्तुतियां, साथ ही सहायक दस्तावेज़ (जिनमें इस प्रथा को बंद करने के पीछे के किसी भी नीतिगत निर्णय या सर्कुलर शामिल हों) दायर करे, और यह स्पष्ट करे कि आयोग को पेपर-वार अंकों के प्रकाशन को पुनः शुरू करने की अनुशंसा क्यों नहीं करनी चाहिए।

    आयोग ने कहा,

    “यह देखते हुए कि इस प्रथा को बंद करने का आधार संतोषजनक ढंग से स्पष्ट नहीं किया गया, DoPT के CPIO को इस आयोग के समक्ष व्यापक, स्पष्ट और स्वतः-व्याख्यात्मक लिखित प्रस्तुतियां प्रस्तुत करने का अंतिम अवसर दिया जाता है। इन प्रस्तुतियों में सभी अनुशंसित उम्मीदवारों की मुख्य परीक्षा के अंकों के विवरण को प्रकाशित करने की प्रथा को बंद करने के कारणों का उल्लेख होना चाहिए। साथ ही ये कारण प्रासंगिक रिकॉर्ड, फ़ाइल नोटिंग, सर्कुलर, नीतिगत निर्णयों, या रिकॉर्ड पर उपलब्ध किसी भी अन्य दस्तावेजी साक्ष्य द्वारा विधिवत समर्थित होने चाहिए। इसके अलावा, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि आयोग सिविल सेवा परीक्षाओं में अनुशंसित उम्मीदवारों के अंकों के विवरण को प्रकाशित करने की प्रथा को पुनः शुरू करने की अनुशंसा क्यों न करे। यह कार्य इस आदेश की प्राप्ति की तारीख से छह सप्ताह के भीतर पूरा किया जाना है।”

    Cause Title: Aniket Kumar Gupta VERSUS CPIO, UPSC & Anr.

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