चंबल अभयारण्य | सुप्रीम कोर्ट अवैध रेत खनन से वन्यजीवों के विनाश के लिए अधिकारियों को परोक्ष रूप से ज़िम्मेदार ठहराएगा

Shahadat

20 March 2026 7:20 PM IST

  • चंबल अभयारण्य | सुप्रीम कोर्ट अवैध रेत खनन से वन्यजीवों के विनाश के लिए अधिकारियों को परोक्ष रूप से ज़िम्मेदार ठहराएगा

    सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश राज्यों के अधिकारियों को नेशनल चंबल अभयारण्य क्षेत्र में वन्यजीवों के आवासों के विनाश के लिए परोक्ष रूप से ज़िम्मेदार ठहराने का इरादा ज़ाहिर किया। यह विनाश अवैध रेत खनन को रोकने में उनकी "लापरवाही और निष्क्रियता" के कारण हुआ।

    जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच नेशनल चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन और घड़ियालों सहित लुप्तप्राय जलीय वन्यजीवों पर मंडरा रहे खतरे को लेकर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) के आधार पर लिए गए मामले की सुनवाई कर रही थी।

    यह मामला जब सुनवाई के लिए आया तो जस्टिस मेहता ने कहा कि विभिन्न राज्य सरकारों और विभागों से जवाब मिलने के बाद सभी पहलुओं पर विस्तार से विचार किया जाएगा। हालांकि, अभी कोर्ट यह टिप्पणी कर सकता है कि, "किसी संरक्षित क्षेत्र में वन्यजीवों के आवास को नष्ट करने का हर कृत्य वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, वन संरक्षण अधिनियम, जैविक विविधता अधिनियम और भारतीय वन अधिनियम, साथ ही इनके तहत बनाए गए अन्य लागू कानूनों और नियमों के तहत अपराध और दंड को आकर्षित करेगा।"

    आदेश के अनुसार, "संबंधित विभागों - यानी वन, खनन और जल संसाधन - के अधिकारियों, साथ ही राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश राज्यों के पुलिस अधिकारियों को, अपनी लापरवाही और निष्क्रियता के कारण अवैध रेत खनन जारी रहने देकर इन कीमती आवासों के विनाश में सहायता और उकसाने के लिए परोक्ष रूप से ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा।"

    जस्टिस मेहता ने कहा कि सभी विभागों और राज्य सरकारों से जवाब मिलने के बाद इस संबंध में उचित और विस्तृत निर्देश जारी किए जाएंगे।

    कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वह राजस्थान, यूपी और एमपी राज्यों (उनके प्रधान सचिवों के माध्यम से), इन 3 राज्यों के DGP, इन 3 राज्यों के खनन और भूविज्ञान विभागों के प्रधान सचिवों, इन 3 राज्यों के वन विभागों के प्रधान सचिवों, इन 3 राज्यों के जल संसाधन विभागों के प्रधान सचिवों और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (इसके सचिव के माध्यम से) को पक्षकार बनाए और नोटिस जारी करे।

    कोर्ट ने आगे सीनियर एडवोकेट निखिल गोयल और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड रूपाली सैमुअल से एमिकस क्यूरी के रूप में सहायता करने का अनुरोध किया। कोर्ट द्वारा नियुक्त केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (जो अब पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत काम कर रही है) को भी नोटिस जारी किया गया।

    इस मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल को होगी।

    Case Title: IN RE: ILLEGAL SAND MINING IN THE NATIONAL CHAMBAL SANCTUARY AND THREAT TO ENDANGERED AQUATIC WILDLIFE Versus, SMW(C) No. 2/2026

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