CEC Protest: एससी आदेश के बावजूद मेट्रो, ट्रेन पर रोक को लेकर केंद्र और दिल्ली पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका पर नोटिस जारी
Shahadat
11 Oct 2026 3:04 PM IST

दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना याचिका पर नोटिस जारी किया। याचिका में आरोप लगाया गया कि 10 अक्टूबर को दिल्ली में मेट्रो सेवाएं काफी हद तक बंद रहीं, जबकि कोर्ट का पहले का आदेश था कि राजधानी में मेट्रो और रेल सेवाओं को रेगुलेट तो किया जा सकता है, लेकिन रोका नहीं जा सकता।
जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने रविवार को एक विशेष सुनवाई में वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की अवमानना याचिका पर विचार किया। याचिका में आरोप लगाया गया कि कोर्ट के शुक्रवार के आदेश का उल्लंघन किया गया।
कोर्ट ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ CJP और विपक्षी दलों द्वारा घोषित 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन से निपटने के लिए ट्रांसपोर्ट सेवाओं पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जानी चाहिए।
वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी (जो जुलाई में जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की स्वतंत्र जांच की मांग करने वाले याचिकाकर्ताओं में से एक थे) द्वारा दायर याचिका में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन (IAS), दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार (IPS) और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) की चेयरपर्सन डी. थारा (IAS) के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई। उन पर कोर्ट के निर्देशों की जानबूझकर अनदेखी करने का आरोप है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि अधिकारियों ने मेट्रो स्टेशनों को मनमाने ढंग से बंद करना और ट्रेन सेवाओं को बिना वजह रद्द करना जारी रखा, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि दिल्ली के निवासियों को परेशानी से बचाने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट को रेगुलेटेड तरीके से चलने दिया जाए।
याचिका में कहा गया कि लगातार लगी पाबंदियों ने राष्ट्रीय राजधानी में "जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित" किया और यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा है।
यह अवमानना याचिका सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के 'एम.ए. बेबी बनाम भारत संघ' मामले में दिए गए आदेश से जुड़ी है। इस मामले में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए मेट्रो और रेलवे सेवाओं पर लगाई गई पाबंदियों पर विचार किया था।
कोर्ट ने दिल्ली पुलिस द्वारा जारी उन निर्देशों पर संज्ञान लिया था, जिनमें DMRC को 57 मेट्रो स्टेशन बंद करने के लिए कहा गया। साथ ही नई दिल्ली और हज़रत निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर आने वाली मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द करने से संबंधित निर्देश पर भी ध्यान दिया।
अदालत ने कहा कि ये नोटिफ़िकेशन "सीमा से ज़्यादा" (Overreaching) लग रहे थे, क्योंकि इनसे ज़रूरी पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर पूरी तरह रोक लग रही थी।
अदालत ने साफ़ किया कि मेट्रो ट्रेनों के चलने पर पूरी तरह रोक नहीं होनी चाहिए, लेकिन अधिकारियों को यह इजाज़त दी कि वे 'आनुपातिकता के सिद्धांत' (Principle of Proportionality) को ध्यान में रखते हुए सही तरीके से इनके संचालन को रेगुलेट कर सकते हैं।
Case Title : SHAILENDRA MANI TRIPATHI v. GOVIND MOHAN

