'क्या हम नए चुनाव का आदेश दे सकते हैं?' बंगाल चुनाव में जीत का अंतर SIR से हटाए गए वोटों से कम होने के दावे पर सुप्रीम कोर्ट का सवाल

Shahadat

25 Aug 2026 9:23 PM IST

  • क्या हम नए चुनाव का आदेश दे सकते हैं? बंगाल चुनाव में जीत का अंतर SIR से हटाए गए वोटों से कम होने के दावे पर सुप्रीम कोर्ट का सवाल

    पश्चिम बंगाल के SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि कुछ विधानसभा क्षेत्रों में BJP उम्मीदवारों की जीत का अंतर वोटर लिस्ट से हटाए गए कुल वोटरों की संख्या की तुलना में काफी कम है।

    तृणमूल कांग्रेस के सदस्य की ओर से सीनियर एडवोकेट कल्याण बंदोपाध्याय ने बताया कि अर्ज़ी दायर की गई, जिसमें कहा गया कि 31 विधानसभा क्षेत्रों में TMC के खिलाफ BJP की जीत का अंतर हटाए गए वोटों की संख्या से कम था। उदाहरण के लिए, AC-145 में हार का अंतर 401 था, और हटाए गए वोटों की संख्या 8785 थी। एक अन्य निर्वाचन क्षेत्र में हार 316 वोटों से हुई, जबकि हटाए गए वोटों की संख्या इससे कहीं ज़्यादा थी।

    इस दलील पर प्रतिक्रिया देते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा,

    "आप [इस पर] अर्ज़ी दायर कर सकते हैं, लेकिन क्या कोर्ट इस तरह नए चुनाव का आदेश दे सकता है?"

    CJI ने आगे पूछा कि क्या चुने गए उम्मीदवारों के चुनाव को चुनौती देने के लिए उन 31 विधानसभा क्षेत्रों में कोई चुनाव याचिका दायर की गई।

    बंदोपाध्याय ने कहा कि कुछ मामलों में चुनाव याचिकाएं दायर की गईं, लेकिन सभी में नहीं।

    CJI कांत और जस्टिस वी. मोहना के साथ बेंच का हिस्सा रहे जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने तब पूछा कि हटाए गए कितने लोगों ने असल में अपने नाम हटाए जाने के खिलाफ अपील की।

    जज ने कहा कि अगर उस व्यक्ति ने नाम हटाए जाने को स्वीकार कर लिया है, तो यह कवायद केवल सैद्धांतिक रह जाएगी।

    जस्टिस बागची ने कहा,

    "तो हमें यह देखना होगा कि मान लीजिए 100 लोगों के नाम हटाए गए हैं, और जीत का अंतर 50 है। नाम हटाए जाने के खिलाफ अपील करने वाले लोगों की संख्या 60 या 70 है तो नाम हटाने के फैसले को चुनौती देना महत्वपूर्ण हो जाता है। जब चुनाव का नतीजा हमारे फैसले पर निर्भर करता है तो किसी खास मामले में यह बहुत अहम हो सकता है।"

    बंदोपाध्याय ने जवाब दिया कि ECI ने विधानसभा-वार अपीलों से जुड़ा डेटा नहीं दिया।

    उन्होंने कहा,

    "हमें जो मुश्किल आ रही है, वह यह है कि ECI पब्लिक डोमेन में डेटा नहीं दे रहा है। मुझे कोई आंकड़े नहीं मिल रहे हैं।"

    बेंच ने कहा कि वह खुद को सिर्फ़ इन 31 निर्वाचन क्षेत्रों तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि सभी लंबित अपीलों की जांच करेगी ताकि उनका समय पर निपटारा हो सके। जज ने गौर किया कि नाम हटाने या जोड़ने के खिलाफ़ लाखों अपीलें लंबित बताई गईं, इसलिए उन्होंने इन अपीलों के निपटारे के बारे में कोर्ट को जानकारी देना ज़रूरी समझा।

    Case Title: Mostari Banu v. Election Commission of India and Ors, W.P.(C) No. 1089/2025 (and connected cases)

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