BREAKING| पैनटरनिटी लीव को मान्यता देने वाला कानून बनाया जाए: सुप्रीम कोर्ट का केंद्र सरकार से आग्रह
Shahadat
17 March 2026 1:51 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह पितृत्व अवकाश (Paternity Leave) को सामाजिक सुरक्षा लाभ के रूप में मान्यता देने वाला कानून लाए। कोर्ट ने कहा कि इस अवकाश की अवधि ऐसी होनी चाहिए जो माता-पिता और बच्चे, दोनों की ज़रूरतों के हिसाब से तय की जाए।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने यह सिफ़ारिश एक ऐसे मामले में की, जिसमें उस प्रावधान की संवैधानिकता पर विचार किया जा रहा, जो गोद लेने वाली माताओं को मैटरनिटी लीव तभी देता है, जब गोद लिए गए बच्चे की उम्र 3 महीने से कम हो।
बेंच ने फ़ैसला दिया कि सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 60(4)—जो गोद लेने वाली माँ को 12 हफ़्ते का मातृत्व अवकाश तभी देती है, जब बच्चा 3 महीने से कम उम्र का हो—असंवैधानिक है। इस प्रावधान की व्याख्या करते हुए कोर्ट ने घोषणा की कि जिस महिला ने कानूनी तौर पर किसी बच्चे को गोद लिया है, वह गोद लिए गए बच्चे की उम्र चाहे जो भी हो, 12 महीने के मैटरनिटी की हकदार है।
जस्टिस पारदीवाला ने फ़ैसले में कहा,
"पैटरनिटी लीव की ज़रूरत को देखते हुए हम केंद्र सरकार से आग्रह करते हैं कि वह एक ऐसा प्रावधान लाए, जो पैनटरनिटी लीव को सामाजिक सुरक्षा लाभ के रूप में मान्यता दे। हम इस बात पर ज़ोर देते हैं कि इस अवकाश की अवधि इस तरह से तय की जानी चाहिए, जो माता-पिता और बच्चे, दोनों की ज़रूरतों को पूरा कर सके।"
पैटरनिटी लीव का मतलब उस सवेतन या बिना वेतन वाले अवकाश से है, जो किसी बच्चे के जन्म या गोद लेने के बाद पिता को दिया जाता है। इससे पिता बच्चे की शुरुआती देखभाल में हिस्सा ले पाता है और बच्चे के जन्म के तुरंत बाद के समय में माँ का सहारा बन पाता है। इस अवधारणा की जड़ें इस मान्यता में हैं कि बच्चों की परवरिश एक साझा ज़िम्मेदारी है और बच्चे के शुरुआती जीवन में माता-पिता, दोनों की मौजूदगी उसके बेहतर विकास में योगदान देती है।
यह एक व्यापक समानता के उद्देश्य को भी पूरा करता है, क्योंकि यह उन पारंपरिक लैंगिक भूमिकाओं को चुनौती देता है जो देखभाल की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ महिलाओं तक सीमित रखती हैं। इस तरह यह घरेलू ज़िम्मेदारियों के अधिक संतुलित बँटवारे को बढ़ावा देता है और महिलाओं को कार्यबल में अपनी भागीदारी जारी रखने में मदद करता है।
भारत में अभी तक पैटरनिटी लीव को मान्यता नहीं मिली है। हालांकि महिलाओं के लिए 26 हफ़्ते तक का सवेतन मैटरनिटी लीव मान्य है। कानून के अनुसार, जिन महिलाओं के दो से कम जीवित बच्चे हैं, उन्हें 26 हफ़्ते का सवेतन मैटरनिटी लीव मिलता है; और जिनके दो या उससे ज़्यादा बच्चे हैं, उन्हें 12 हफ़्ते का अवकाश मिलता है, जिसमें से 8 हफ़्ते तक का अवकाश प्रसव से पहले लिया जा सकता है।
Case Title – Hamsaanandini Nanduri v. Union of India

