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बीदर स्कूल मामलाः बच्‍चों से पूछताछ के मामले में किसी नियम का उल्लंघन नहीं, कर्नाटक हाईकोर्ट में पुलिस का बयान

LiveLaw News Network
19 Feb 2020 10:20 AM GMT
बीदर स्कूल मामलाः बच्‍चों से पूछताछ के मामले में किसी नियम का उल्लंघन नहीं, कर्नाटक हाईकोर्ट में पुलिस का बयान

कर्नाटक सरकार ने बुधवार को कर्नाटक हाईकोर्ट को बताया कि राजद्रोह के मामले की जांच कर रहे अधिकारी बीदर स्कूल मामले में बच्चों से आगे पूछताछ/परामर्श नहीं करेंगे।

उल्लेखनीय है कि शाहीन एजुकेशन सोसाइटी, बीदर में नागरिकता संशोधन ‌कानून के खिलाफ एक नाटक खेले जाने के बाद पुलिस ने स्कूल प्रबंधन और दो महिलाओं और
के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया है।

नाबालिग छात्रों से अवैध रूप से पूछताछ किए जाने के मामले में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग के लिए दायर याचिका का विरोध करते हुए महाधिवक्ता प्रभुलिंग नवादगी ने कहा, "याचिकाकर्ता ने न्यूज़ रिपोर्टों के आधार पर दावा किया है, जो सही नहीं हैं। जांच अधिकारी ने पुलिस मैनुअल और जुवेनाइल जस्टिस अधिनियम के किसी भी मानदंड, नियम या विनियम का उल्लंघन किए बिना जांच की है।

मुख्य न्यायाधीश अभय ओका और न्यायमूर्ति पीजीएम पाटिल की खंडपीठ ने महाधिवक्ता से पूछा कि,"क्या बच्चों की काउंसलिंग करना पुलिस का काम है? पुलिस को बच्‍चों की काउंसलिंग का कोई प्रशिक्षण तो दिया नहीं जाता है?"

नवदगी ने जवाब दिया "जुवेनाइल जस्टिस एक्ट में इस्तेमाल किया गया शब्द काउंसलिंग है, अधिकारी ने उसी का इस्तेमाल किया है। उसने नाटक में भाग लेने वाले सात बच्चों और इसे देखने वाले 10 स्टूडेंट्स के बयान दर्ज किए थे। उस समय वह सिविल ड्रेस में था और साथ में जिला बाल संरक्षण अधिकारी और विशेष किशोर पुलिस इकाई में, सदस्य उपस्थित थे।"

पुलिस ने अपनी आपत्ति में कहा कि "28 जनवरी, 2020 को जांच अधिकारी, बाल संरक्षण अधिकारी, जिनका नाम गौरीशंकर है, और विशेष जुवेनाइल पुलिस इकाई की सदस्य जगादेवी के साथ विजिटिंग रूम में गए थे। वहां तीन बच्चों, उनके अभिभावक और टीचर को पेश किया गया था। वीडियोग्राफर एक पुलिस कांस्टेबल था, जो यूनिफार्म में था। उसे दूसरों ने अपनी वर्दी बदलने और सिविल ड्रेस में विजिटिंग रूम में आने को कहा था।"

आपत्ति में यह भी कहा गया है कि कर्नाटक राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ जयश्री ने स्कूल का दौरा किया और छात्र और कर्मचारियों के साथ परामर्श किया। जांच अधिकारी और पुलिस अधीक्षक से भी पूछताछ की और उनकी राय थी कि मामले में किसी भी नियम या कानून का उल्लंघन नहीं हुआ है।

पीठ ने मामले को 9 मार्च तक के ‌लिए स्‍थगित करते हुए याचिकाकर्ताओं को 6 मार्च तक पुलिस की आपत्ति पर प्रतिवाद दायर करने का निर्देश दिया।

मामले में वकील नयना ज्योति झवर और साउथ इंडिया सेल फॉर ह्यूमन राइट्स एजुकेशन एंड मॉनिटरिंग की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि लगभग 85 बच्चों, जिनमें से कुछ की उम्र 9 साल से कम है, से पुलिस ने पूछताछ की थी। इस कार्यवाही ने स्कूल का वातावरण बहुत ही प्रतिकूल बना दिया, जिससे बच्चों के मनोविज्ञान पर असर पड़ा।

शाहीन एजुकेशन सोसायटी के कक्षा 4, 5 और 6 के स्टूडेंट्स ने पिछले महीने सीएए और एनआरसी पर एक नाटक का मंचन किया था, जिसके बाद बीदर न्यू टाउन पुलिस स्टेशन में, स्कूली अथॉरिटी के खिलाफ 'देश विरोधी गतिविधियों' और संसदीय कानूनों के बारे में 'नकारात्मक विचार फैलाने'के आरोप में एक्टिविस्ट नीलेश रक्शाला की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई। जिसके बाद स्कूल की हेडमिस्ट्रेस, एक बच्चे के माता-पिता को गिरफ्तार किया गया। उन्हें हाल ही में जमानत पर रिहा किया गया है।

आपत्ति का विवरण डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें



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