भोपालशाला विवाद: जुमे की नमाज के लिए तय स्थान पर मुस्लिम पक्ष की आपत्ति, सुप्रीम कोर्ट ने एमपी सरकार से मांगा नजदीकी स्थल
Praveen Mishra
22 July 2026 12:39 PM IST

भोजशाला विवाद में जुमे की नमाज के लिए मध्य प्रदेश प्रशासन द्वारा आवंटित स्थान को लेकर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है। मुस्लिम पक्ष ने अदालत में आवेदन दाखिल कर कहा है कि प्रशासन ने जिस स्थान पर नमाज की अनुमति दी है, वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप नहीं है क्योंकि वह भोजशाला परिसर से लगभग 2 किलोमीटर दूर स्थित है।
बुधवार को वरिष्ठ अधिवक्ता हुज़ैफ़ा अहमदी ने इस आवेदन का चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत के समक्ष उल्लेख (mentioning) करते हुए मामले की गुरुवार को तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया।
इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जो मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए, ने मुस्लिम पक्ष के इस दावे का विरोध किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा आवंटित स्थान 2 किलोमीटर नहीं बल्कि लगभग 900 मीटर की दूरी पर है।
हालांकि, उन्होंने अदालत को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार प्रशासन से बातचीत कर रही है और भोजशाला के अधिक निकट स्थित वैकल्पिक स्थान की पहचान की जा रही है।
सॉलिसिटर जनरल ने अदालत से कहा,
"मैंने अधिकारियों से निकट का स्थान तलाशने को कहा है और इस दिशा में प्रक्रिया जारी है।"
इस दौरान जस्टिस संजय कुमार बागची ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले आदेश में स्पष्ट किया था कि भोजशाला परिसर के समीप स्थित स्थान पर जुमे की नमाज की व्यवस्था की जाए और पहले भी ऐसा ही किया जाता था।
इस पर सॉलिसिटर जनरल ने जवाब दिया कि प्रशासन इस मुद्दे का समाधान निकालने में लगा हुआ है और उन्हें थोड़ा समय दिया जाए।
मुस्लिम पक्ष की ओर से सीनियर एडवोकेट हुज़ैफ़ा अहमदी ने अदालत को बताया कि प्रशासन की ओर से उपयुक्त स्थान उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण लगातार दो जुमे की नमाज अदा नहीं हो सकी है।
इस पर सॉलिसिटर जनरल ने भरोसा दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का "letter and spirit" यानी पूर्ण रूप से पालन किया जाएगा।
इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने कहा,
"हम मामले को शुक्रवार को सूचीबद्ध करेंगे। तब तक आप भोजशाला परिसर के निकट कोई वैकल्पिक स्थान तलाशिए।"
क्या है पूरा मामला?
यह आवेदन उन याचिकाओं में दायर किया गया है जिनमें मुस्लिम पक्ष ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें ऐतिहासिक भोजशाला को मंदिर घोषित किया गया था और परिसर में इस्लामी नमाज पर रोक लगा दी गई थी।
पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था। हालांकि, अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि मुस्लिम समुदाय की धार्मिक परंपरा को देखते हुए भोजशाला परिसर से सटे (adjacent) किसी स्थान पर जुमे की नमाज की व्यवस्था की जाए।
मुस्लिम पक्ष का कहना था कि सदियों से इस क्षेत्र में जुमे की नमाज अदा की जाती रही है और इसलिए निकटवर्ती स्थान उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है।
अब विवाद इस बात पर केंद्रित हो गया है कि प्रशासन द्वारा आवंटित स्थान क्या वास्तव में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप "adjacent" (समीपवर्ती) है या नहीं। सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को इस मुद्दे पर आगे सुनवाई करेगा।


