भोज शाला–कमाल मौला मस्जिद विवाद: बसंत पंचमी पूजा और जुमे की नमाज़ के शांतिपूर्ण आयोजन के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश

Praveen Mishra

22 Jan 2026 1:37 PM IST

  • भोज शाला–कमाल मौला मस्जिद विवाद: बसंत पंचमी पूजा और जुमे की नमाज़ के शांतिपूर्ण आयोजन के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश

    सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मध्य प्रदेश के धार स्थित भोज शाला–कमाल मौला परिसर में बसंत पंचमी की पूजा और शुक्रवार की जुमे की नमाज़ दोनों को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए अहम दिशा-निर्देश जारी किए। यह परिसर लंबे समय से धार्मिक स्वरूप को लेकर हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच विवाद का विषय रहा है।

    चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा दायर एक आवेदन पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 23 जनवरी को पड़ने वाली बसंत पंचमी के अवसर पर पूरे दिन पूजा-अर्चना की अनुमति मांगी गई थी।

    भोज शाला एक 11वीं सदी का स्मारक है, जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित है। हिंदू समुदाय इसे देवी वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में देखता है। वर्ष 2003 में हुए एक समझौते के अनुसार, भोज शाला परिसर में मंगलवार को हिंदू पूजा करते हैं और शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय नमाज़ अदा करता है।

    आवेदकों की ओर से एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने दलील दी कि बसंत पंचमी के दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा और हवन होंगे। वहीं, मस्जिद कमेटी की ओर से सीनियर एडवोकेट सलमान खुर्शीद ने कहा कि जुमे की नमाज़ दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच होती है और इसके बाद मुस्लिम समुदाय परिसर खाली कर देगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जुमे की नमाज़ का समय बदला नहीं जा सकता।

    केंद्र सरकार और ASI की ओर से पेश के.एम. नटराज ने सुझाव दिया कि नमाज़ के लिए परिसर के भीतर एक अलग और विशिष्ट स्थान निर्धारित किया जाए, जिसमें अलग प्रवेश और निकास हो। इसके लिए जिला प्रशासन को पहले से बताया जाएगा कि कितने लोग नमाज़ के लिए आएंगे, ताकि आवश्यक पास जारी किए जा सकें। इस प्रस्ताव पर सलमान खुर्शीद ने सहमति जताते हुए कहा कि नमाज़ियों की संख्या आज ही प्रशासन को सौंप दी जाएगी।

    खंडपीठ ने अपने आदेश में दर्ज किया कि दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज़ के लिए परिसर में अलग क्षेत्र उपलब्ध कराया जाएगा और उसी तरह बसंत पंचमी के अवसर पर हिंदू समुदाय को पूजा-अर्चना के लिए पृथक स्थान दिया जाएगा। कोर्ट ने दोनों पक्षों से आपसी सम्मान बनाए रखने और कानून-व्यवस्था के लिए प्रशासन का सहयोग करने की अपील की।

    यह आवेदन वर्ष 2024 की एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) में दायर किया गया था, जो मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी, धार द्वारा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस अंतरिम आदेश को चुनौती देते हुए दाखिल की गई थी, जिसमें ASI को भोज शाला–कमाल मौला परिसर का सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया गया था। अप्रैल 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने सर्वे जारी रखने की अनुमति दी थी, लेकिन यह स्पष्ट किया था कि किसी भी प्रकार की खुदाई या संरचना के स्वरूप में बदलाव नहीं किया जाएगा और सर्वे के निष्कर्षों पर कोर्ट की अनुमति के बिना कोई कार्रवाई नहीं होगी।

    आज की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उस विशेष अनुमति याचिका को निस्तारित करते हुए निर्देश दिया कि उच्च न्यायालय में लंबित रिट याचिका को वरिष्ठतम न्यायाधीशों में से किसी एक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ द्वारा सुना जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि ASI द्वारा तैयार सर्वे रिपोर्ट को उच्च न्यायालय अनसील कर पक्षकारों को उपलब्ध करा सकता है और उन्हें उस पर आपत्तियां दाखिल करने का अधिकार होगा। यदि रिपोर्ट का कोई हिस्सा सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, तो पक्षकारों को अपने अधिवक्ताओं की मौजूदगी में उसका निरीक्षण करने की अनुमति दी जा सकती है।

    सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय अंतिम सुनवाई के दौरान सभी आपत्तियों, सुझावों और सिफारिशों पर विधिवत विचार करेगा।

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