SCBA ने CJI गवई पर हमला करने वाले वकील पर कार्रवाई पर विचार किया

Praveen Mishra

6 Oct 2025 6:17 PM IST

  • SCBA ने CJI गवई पर हमला करने वाले वकील पर कार्रवाई पर विचार किया

    सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने आज एक बयान जारी कर भारत के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई पर उसके अस्थायी सदस्य अधिवक्ता द्वारा किए गए हमले की कड़ी निंदा की है। एससीबीए ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह संबंधित अधिवक्ता राकेश किशोर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार कर रही है, जिसने अदालत की कार्यवाही के दौरान मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकने की कोशिश की थी।

    बयान में कहा गया कि यह हमला खजुराहो मंदिर श्रृंखला (मध्य प्रदेश) के जवाड़ी मंदिर में स्थित 7 फीट ऊँची विष्णु प्रतिमा के पुनर्निर्माण से जुड़ी याचिका (विष्णु मूर्ति मामला) में सीजेआई के कथित रूप से गलत तरीके से पेश किए गए बयानों की प्रतिक्रिया थी।

    एससीबीए ने इस हमले को न्यायिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताते हुए कहा —

    “यह घटना, जो खजुराहो विष्णु प्रतिमा पुनर्निर्माण मामले में माननीय मुख्य न्यायाधीश की न्यायसंगत टिप्पणियों की गलत व्याख्या के परिणामस्वरूप हुई, असहनीय है। यह न केवल न्यायिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करती है बल्कि संविधान में निहित गरिमा और अनुशासन के मूल्यों के भी विपरीत है और न्याय प्रणाली में जनता के विश्वास को गंभीर रूप से कमजोर करती है।”

    गौरतलब है कि सीजेआई ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि वे सभी धर्मों का सम्मान करते हैं और उनके बयान का संदर्भ यह था कि मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन है, इसलिए कोर्ट उस प्रकार की राहत नहीं दे सकती थी जिसकी याचिका में मांग की गई थी।

    एससीबीए ने कहा कि बार और बेंच के बीच के संबंधों को ऐसी घटनाओं से कमजोर नहीं होने दिया जा सकता। बयान में कहा गया —

    “बार और बेंच न्याय प्रणाली के दो अभिन्न स्तंभ हैं, जो पारस्परिक सम्मान और संवैधानिक जिम्मेदारी के बंधन से जुड़े हैं। इस पवित्र रिश्ते को कमजोर करने वाला कोई भी कृत्य न्याय के ताने-बाने को चोट पहुँचाता है। चूंकि इस घटना में शामिल अधिवक्ता एससीबीए के अस्थायी सदस्य हैं, एसोसिएशन उनके खिलाफ उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार कर रही है।”

    एससीबीए ने यह भी कहा कि वह न्यायपालिका को राजनीतिक या विवादास्पद रूप देने के किसी भी प्रयास का दृढ़ता से विरोध करता है।

    “एससीबीए धर्मनिरपेक्षता, बंधुत्व और कानून के शासन के सिद्धांतों के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराता है और कानूनी समुदाय से आह्वान करता है कि न्यायपालिका को बदनाम या राजनीतिक बनाने के किसी भी प्रयास के खिलाफ सतर्क रहें। ऐसा आचरण कानूनी पेशे की गरिमा के लिए कलंक है और सुप्रीम कोर्ट की स्वतंत्रता और पवित्रता पर सीधा हमला है। किसी न्यायाधीश को डराने या अपमानित करने का कोई भी प्रयास न केवल आपराधिक कृत्य है, बल्कि कानून और न्यायालय की गरिमा बनाए रखने की शपथ का भी उल्लंघन है।”

    SCBA ने CJI गवई के शांत और गरिमामय व्यवहार की भी सराहना की —

    “माननीय मुख्य न्यायाधीश ने जिस संयम, गरिमा और दृढ़ता के साथ इस गंभीर उकसावे का सामना किया, वह न्यायपालिका की उच्च परंपराओं का प्रतीक है। एसोसिएशन माननीय मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के सभी न्यायाधीशों के साथ पूर्ण एकजुटता व्यक्त करता है।”

    मीडिया की भ्रामक रिपोर्टिंग ने हमले को भड़काया

    SCBA ने कुछ मीडिया संस्थानों पर “संवेदनहीन और सनसनीखेज रिपोर्टिंग” का आरोप लगाते हुए कहा कि सीजेआई के बयानों को तोड़ा-मरोड़ा गया और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला बताकर जनता में ग़लत धारणा फैलाई गई।

    “मीडिया द्वारा इस तरह की विकृत रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया पर बढ़ाए गए भ्रामक नैरेटिव ने न्यायपालिका के प्रति जनता का विश्वास कमजोर किया है और भीड़-आधारित प्रतिक्रियाओं को भड़काया है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर ऐसी शिकारी पत्रकारिता उचित नहीं ठहराई जा सकती।”

    SCBA ने कहा —

    “इस तरह की गैर-जिम्मेदार पत्रकारिता, जो नैतिक संयम से रहित है, न्याय के शासन को खतरे में डालती है और अदालतों को भीड़ के तमाशे में बदल देती है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किसी भी संवैधानिक संस्था को बदनाम करने या न्याय प्रणाली में जनता के विश्वास को कमजोर करने का अधिकार नहीं देती।”

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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