क्या पेट्रोल पंप खोलने के लिए CPCB के दिशानिर्देश अनिवार्य हैं? सुप्रीम कोर्ट ने मामला बड़ी बेंच को सौंपा
Shahadat
4 April 2026 9:17 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक बड़ी बेंच को यह मामला सौंपा कि क्या पेट्रोल पंप खोलने के लिए सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) द्वारा तय किए गए जगह चुनने के नियम अनिवार्य हैं, क्योंकि इन नियमों का स्थानीय ज़ोनिंग नियमों से टकराव हो रहा है।
जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की एक बेंच सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा 7 जनवरी, 2020 को जारी ऑफिस मेमोरेंडम में नए पेट्रोल पंप खोलने के लिए दिए गए दिशानिर्देशों से जुड़ी अपीलों पर सुनवाई कर रही थी।
ये दिशानिर्देश नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निर्देशों के बाद बनाए गए, ताकि पेट्रोल पंपों से पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को नियंत्रित किया जा सके।
इन दिशानिर्देशों में पर्यावरण की सुरक्षा के लिए कई उपाय बताए गए हैं। इनके अनुसार, नए पेट्रोल पंप रिहायशी इलाकों, स्कूलों और अस्पतालों से कम-से-कम 50 मीटर की दूरी पर बनाए जाने चाहिए। अगर जगह की कमी हो तो भी यह दूरी कम से कम 30 मीटर होनी चाहिए।
इनमें प्रदूषण नियंत्रण के उपाय भी अनिवार्य किए गए, जैसे कि लीक का पता लगाने वाले सिस्टम के साथ ज़मीन के नीचे बने स्टोरेज टैंक, तेल फैलने पर उसे रोकने के तरीके और मिट्टी व भूजल में होने वाले प्रदूषण की निगरानी करना।
दिशानिर्देशों में यह भी कहा गया कि ज़्यादा बिक्री वाले आउटलेट्स में उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए 'वेपर रिकवरी सिस्टम' लगाए जाएं। साथ ही सुरक्षा के उपाय भी किए जाएं, जैसे कि ऑटो कट-ऑफ नोज़ल, आपातकालीन स्थिति में बंद करने वाले सिस्टम और डिवाइसेज की नियमित जांच (ऑडिट)।
यह विवाद देहरादून के रिहायशी इलाकों में पेट्रोल पंप खोलने की अनुमति दिए जाने से शुरू हुआ। NGT ने फैसला दिया कि CPCB के दिशानिर्देश तब भी लागू होंगे, भले ही पेट्रोल पंप खोलने की प्रक्रिया इन दिशानिर्देशों के जारी होने से पहले ही शुरू हो गई हो। NGT ने इस दलील को खारिज कर दिया कि पहले से मिली मंज़ूरी के आधार पर इन नियमों का पालन करना ज़रूरी नहीं है।
ट्रिब्यूनल ने पाया कि जिन जगहों पर पेट्रोल पंप खोलने की बात थी, वे जगह चुनने के नियमों को पूरा नहीं करती थीं, क्योंकि रिहायशी इलाके तय की गई प्रतिबंधित दूरी के अंदर ही पड़ रहे थे। इसलिए ट्रिब्यूनल ने अधिकारियों को इस मामले में कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।
सुप्रीम कोर्ट ने 'इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड बनाम वी.बी.आर. मेनन' मामले में CPCB के दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया था और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों से कहा कि वे नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें।
हालांकि, मौजूदा मामले में कोर्ट ने पाया कि राज्य के ज़ोनिंग नियम रिहायशी इलाकों में भी पेट्रोल पंप खोलने की अनुमति देते हैं, बशर्ते उसके लिए ज़रूरी मंज़ूरी ले ली गई हो। कोर्ट ने यह भी पाया कि जब CPCB के दिशानिर्देश बनाए जा रहे थे, तब इस पहलू पर विचार नहीं किया गया। इसी वजह से CPCB के दिशानिर्देशों और स्थानीय नियमों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई।
कोर्ट ने कहा कि इस टकराव की वजह से रिहायशी इलाकों में पेट्रोल पंप खोलने के लिए तय किए गए नियमों को लागू करना मुश्किल हो जाता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि चूंकि इन गाइडलाइंस में किसी तरह की छूट का प्रावधान नहीं है, इसलिए इन्हें सिर्फ़ सलाह मानने के बजाय अनिवार्य मानना मुश्किल है।
यह देखते हुए कि उसका पिछला फ़ैसला इसके विपरीत संकेत देता है, कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस मामले को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) के सामने रखा जाए, ताकि एक बड़ी बेंच का गठन किया जा सके।
कोर्ट ने कहा,
"CPCB की गाइडलाइंस में कही गई बातों और स्थानीय निकायों पर लागू मौजूदा ज़ोनिंग नियमों के बीच विरोधाभास को देखते हुए रिहायशी इलाकों में CPCB की गाइडलाइंस के अनुसार 'साइटिंग क्राइटेरिया' (जगह चुनने के मानदंड) को लागू करना मुश्किल होगा। चूंकि गाइडलाइंस में किसी तरह की छूट की अनुमति नहीं है, इसलिए यह मानना मुश्किल होगा कि ये गाइडलाइंस अनिवार्य प्रकृति कीं, न कि सिर्फ़ सलाह के तौर पर। चूंकि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (उपर्युक्त) मामले में आया फ़ैसला इसके विपरीत संकेत देता है, इसलिए हमारी राय है कि यह उचित होगा कि एक बड़ी बेंच इस मुद्दे पर विस्तार से और निर्णायक रूप से विचार करे।"
Case Title – Shakuntala Devi v. Roshan Joshi & Ors.

