'हो सकता है मेरे साथ धोखा हुआ हो': अनिल अंबानी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, याचिकाकर्ता ने बैंक धोखाधड़ी मामले में उनकी गिरफ्तारी न होने पर सवाल उठाया

Shahadat

8 May 2026 2:23 PM IST

  • हो सकता है मेरे साथ धोखा हुआ हो: अनिल अंबानी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, याचिकाकर्ता ने बैंक धोखाधड़ी मामले में उनकी गिरफ्तारी न होने पर सवाल उठाया

    सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई की, जिसमें अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप की कंपनियों द्वारा कथित तौर पर 40,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा के लोन धोखाधड़ी की जांच की मांग की गई। इस दौरान, अनिल अंबानी की ओर से पेश हुए सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट से कहा कि “हो सकता है” अधिकारियों ने उनके साथ धोखा किया हो। वहीं, याचिकाकर्ता के वकील ने सवाल उठाया कि जांच एजेंसियों की रिपोर्ट में गंभीर आरोप होने के बावजूद अंबानी को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया।

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि CBI और ED द्वारा कई जांचें चल रही हैं।

    कोर्ट के सामने एक स्टेटस नोट रखते हुए SG ने कहा कि SBI की शिकायतों पर रिलायंस टेलीकॉम के खिलाफ दो FIR दर्ज की गईं, जबकि कुल मिलाकर नौ नियमित मामले दर्ज किए गए। इनमें से सात मामलों की जांच चल रही है और दो मामलों में पहले ही चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। उन्होंने आगे बताया कि जांच के दायरे में आए सात मामलों में कुल 27,337 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

    मेहता ने कोर्ट को बताया कि कई जांच अधिकारियों को काम पर लगाया गया, तलाशी अभियान चलाए गए , 31 लुकआउट सर्कुलर जारी किए गए और 3,960 से ज़्यादा दस्तावेज़ इकट्ठा किए गए। उन्होंने आगे कहा कि दो गिरफ्तारियां पहले ही हो चुकी हैं और आने वाले दिनों में “कुछ और गिरफ्तारियां” होने की संभावना है।

    याचिकाकर्ता EAS सरमा की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने CBI की चार्जशीट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि उसमें “चौंकाने वाले” तथ्य सामने आए हैं, जिनमें अनिल अंबानी से जुड़ी कंपनियों और यस बैंक के चेयरमैन से जुड़ी निजी कंपनियों के बीच हुए लेन-देन का ज़िक्र है।

    भूषण ने अपनी दलील में कहा,

    “CBI, SEBI और ED का कहना है कि इस घोटाले में अनिल अंबानी ही मुख्य सरगना (Kingpin) हैं। फिर भी मुझे यह बात बहुत हैरान करने वाली लगती है कि न तो CBI और न ही ED उन्हें गिरफ्तार करने को तैयार है। ऐसा लगता है मानो वह कोई 'पवित्र गाय' (Holy Cow) हों, जिन पर गिरफ्तारी का कानून लागू ही नहीं होता।”

    CJI ने जवाब दिया कि कोर्ट फिलहाल सिर्फ जांच की निगरानी करने की योजना बना रहा है। हालांकि, भूषण ने यह तर्क दिया कि जहां निचले स्तर के अधिकारियों को इस आधार पर गिरफ्तार किया गया कि वे “मुख्य सरगना” के निर्देशों पर काम कर रहे थे, वहीं “मुख्य सरगना” को खुद गिरफ्तार नहीं किया गया। बेंच ने कहा कि एजेंसियों को "सक्रिय" करने के लिए उसका पहले का दखल ज़रूरी था। यह भी कहा कि अगर जाँच में कोई कमी पाई गई तो कोर्ट आगे भी दखल दे सकता है।

    जस्टिस बागची ने इस बात पर भी चिंता जताई कि कोर्ट किसी आरोपी की गिरफ्तारी का निर्देश दे रहा है।

    जस्टिस बागची ने कहा,

    "भले ही आरोप गंभीर हों, अगर सहयोग और भागीदारी है, तो हम जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाएंगे। एक तरफ हम 'एंतिल' और 'पंकज बंसल' जैसे कानूनी सिद्धांत विकसित करना चाहते हैं। दूसरी तरफ, जांच एजेंसियों को शिकारी कुत्तों की तरह सक्रिय करना, हमारे द्वारा बनाए जा रहे कानून के खिलाफ होगा।"

    CJI ने आगे कहा कि हिरासत में पूछताछ का मामला "जाँच एजेंसियों के विवेक पर छोड़ दिया जाएगा।"

    अनिल अंबानी की तरफ से पेश हुए सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने इस बात पर नाराजगी जताई कि चार्जशीट पर संज्ञान लिए जाने से पहले ही कोर्ट में दलीलें दी जा रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि याचिकाकर्ता को चार्जशीट तक पहुंच कैसे मिली।

    सिब्बल ने कहा,

    "मुझे दुख है। अभी तक संज्ञान नहीं लिया गया। मेरे साथी के पास चार्जशीट कैसे है? अगर चार्जशीट दायर होती है तो मैं अपना बचाव करूंगा। मैंने अग्रिम जमानत के लिए अर्जी नहीं दी। मेरे कहीं भाग जाने का कोई सवाल ही नहीं है। मैंने इस कोर्ट को वचन दिया।"

    सिब्बल ने अंबानी द्वारा पहले दिए गए उस वचन का ज़िक्र करते हुए यह बात कही, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह कोर्ट की अनुमति के बिना देश छोड़कर नहीं जाएंगे।

    सिब्बल ने यह भी कहा,

    "हो सकता है कि मेरे साथ धोखा हुआ हो।"

    बेंच ने कहा कि वह किसी के दोषी या निर्दोष होने का फैसला नहीं कर रही है, बल्कि सिर्फ यह सुनिश्चित कर रही है कि जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही है।

    CJI ने साफ किया कि याचिकाकर्ता का कोई निजी एजेंडा नहीं लगता और आरोप जनता के पैसे की हेराफेरी से जुड़े हैं।

    CJI ने कहा,

    "हमें भरोसा है कि एजेंसियां ​​किसी तार्किक नतीजे पर पहुंचेंगी। यह समय-सीमा के अंदर होना चाहिए ताकि जनता का भरोसा बना रहे। क्या 'हेयरकट सिद्धांत' (Haircut Principle) बैंक अधिकारियों द्वारा की गई आपराधिक साज़िश को माफ़ करता है? अगर कोई बैंक 50 लेने के बजाय 8 स्वीकार कर लेता है, तो उसे जांच करने का अधिकार है।"

    इस मौके पर SG ने आगाह किया कि किसी "संभावित आरोपी" को इस मुद्दे पर कोर्ट में बोलने की इजाज़त न दी जाए, क्योंकि इससे एक नई मिसाल कायम हो सकती है।

    जस्टिस बागची ने कहा कि क्या किसी आरोपी को इस चरण में सुना जा सकता है, यह एक पेचीदा मुद्दा है।

    ADAG ग्रुप की कंपनियों की ओर से पेश हुए सीनियर वकील श्याम दीवान ने कोर्ट से गुज़ारिश की कि वह Reliance Infrastructure और Reliance Power जैसी लिस्टेड कंपनियों पर जांच और संपत्ति ज़ब्ती की कार्रवाई के असर पर विचार करे।

    दीवान ने कहा कि Reliance Infrastructure स्वतंत्र और कर्ज़-मुक्त कंपनी है, जिसकी संपत्ति 69,600 करोड़ रुपये की है। उन्होंने दलील दी कि कुछ कंपनियां "बेदाग" संस्थाएं हैं, जो सिर्फ एक बड़े ग्रुप का हिस्सा हैं। दीवान ने बताया कि इन कंपनियों को भारत सरकार से करोड़ों रुपये मिलने बाकी हैं।

    दीवान ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट्स गिरफ्तार अधिकारियों को ज़मानत देने में हिचकिचा रहे हैं, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट इस जांच की निगरानी कर रहा है। उन्होंने कोर्ट से यह साफ करने की गुज़ारिश की कि उसकी निगरानी से दूसरी अदालतों को मामले के गुण-दोष के आधार पर फैसला लेने से रोका नहीं जाएगा।

    सिब्बल ने भी कोर्ट से यह साफ करने की गुज़ारिश की कि जांच की उसकी निगरानी को आरोपों के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी न माना जाए।

    हालांकि, बेंच ने ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की और बस मामले की सुनवाई टाल दी। बेंच ने अपने आदेश में यह दर्ज किया कि CBI और ED ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कीं।

    Case Title: EAS Sarma v. Union of India and Others, W.P.(C) No. 1217/2025

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