SIR के सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए, फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया: ECI ने सुप्रीम कोर्टमें बताया

  • SIR के सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए, फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया: ECI ने सुप्रीम कोर्टमें बताया

    भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (Special Intensive Revision - SIR) से जुड़े सभी फैसले आयोग द्वारा सर्वसम्मति से लिए गए।

    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञान कुमार के कामकाज और ECI के कुछ फैसलों की वैधता को चुनौती देने वाली रिट याचिका के जवाब में आयोग ने उन आरोपों को खारिज किया, जिनमें कहा गया कि अन्य दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ने SIR से जुड़े फैसले एकतरफा तरीके से लिए।

    यह हलफनामा राकेश कुमार सिंह द्वारा दायर एक रिट याचिका के जवाब में दाखिल किया गया, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने ECI, CEC और अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी किया था। यह याचिका 'इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के बाद दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा दर्ज की गई आपत्तियों के बावजूद, SIR प्रक्रिया से जुड़े 14 महत्वपूर्ण फैसले ECI के नाम पर लिए गए थे।

    इन आरोपों को खारिज करते हुए ECI ने कहा कि SIR से संबंधित तीनों आदेश - 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 के - आयोग के सर्वसम्मत फैसले थे।

    उप चुनाव आयुक्त भानु प्रकाश येतुरु द्वारा दायर हलफनामे में कहा गया कि इन फैसलों को CEC और दोनों चुनाव आयुक्तों द्वारा सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई।

    आयोग ने तर्क दिया कि यह याचिका पूरी तरह से एक अखबार की रिपोर्ट पर आधारित है और याचिकाकर्ता ने प्रतिवादियों से इन तथ्यों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है। इसलिए, यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने कभी भी किसी आंतरिक नोट या फाइल को मीडिया में जारी नहीं किया और न ही ऐसा करने की अनुमति दी।

    आंतरिक नोट आयोग के फैसले नहीं होते

    ECI ने स्पष्ट किया कि किसी फाइल पर काम करते समय CEC या चुनाव आयुक्तों द्वारा दर्ज किए गए नोट, सवाल, सुझाव या टिप्पणियां अपने आप में आयोग के फैसले नहीं माने जा सकते।

    निर्णय लेने की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए आयोग ने कहा कि फाइलें आमतौर पर पहले एक चुनाव आयुक्त के पास जाती हैं, फिर दूसरे चुनाव आयुक्त के पास और अंत में CEC के पास पहुंचती हैं। ECI ने दावा किया कि संबंधित फैसले 'मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023' की धारा 18 के कानूनी ढांचे के अनुरूप हैं। इस कानून के अनुसार, ECI के फैसले जहाँ तक संभव हो, सर्वसम्मति से होने चाहिए; और यदि ऐसा न हो, तो बहुमत से लिए जाने चाहिए।

    फॉर्म 6 में कोई संशोधन नहीं

    आयोग ने इस बात से इनकार किया कि उसने अपने SIR (सघन मतदाता सूची पुनरीक्षण) आदेशों के जरिए 'फॉर्म 6' में कोई संशोधन किया। आयोग का कहना है कि 'मतदाता पंजीकरण नियम, 1960' (Registration of Electors Rules, 1960) के तहत निर्धारित फॉर्म में केवल केंद्र सरकार ही संशोधन कर सकती है।

    आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान मांगी जाने वाली घोषणा (Declaration) एक अलग दस्तावेज है, और इसे 'फॉर्म 6' में संशोधन नहीं माना जा सकता।

    यह विवाद तब शुरू हुआ, जब 'इंडियन एक्सप्रेस' ने रिपोर्ट दी कि दो चुनाव आयुक्तों ने उन बदलावों पर आपत्ति जताई थी, जिनके तहत आवेदकों को खुद को, या अपने माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी को पिछली सघन मतदाता सूचियों (intensive electoral rolls) से जोड़ने वाले विवरण देने के लिए कहा गया।

    ECI ने माना कि ऑनलाइन आवेदन प्लेटफॉर्म पर जिस तरह से यह घोषणा प्रदर्शित की गई थी, उससे ऐसा लग सकता था कि 'फॉर्म 6' में संशोधन किया गया।

    इस समस्या को दूर करने के लिए आयोग ने कहा कि 21 अक्टूबर 2026 से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को दो अलग-अलग हिस्सों में बांटा जाएगा: 'फॉर्म 6' और 'SIR घोषणा'। यह व्यवस्था उसी प्रक्रिया के अनुरूप होगी जो फिजिकल (कागजी) आवेदनों के लिए अपनाई जाती है।

    आयोग ने दोहराया कि यह घोषणा इसलिए लाई गई ताकि आवेदकों का मिलान पिछली मतदाता सूचियों से आसानी से किया जा सके, और इन बदलावों को कानूनी रूप से निर्धारित फॉर्म में संशोधन नहीं माना जा सकता।

    Case Title : Rakesh Kumar Singh v. Union of India, Shailendra Mani Tripathi v. Union of India

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