सुप्रीम कोर्ट के दबाव के बाद कैंसर की दवाओं के मार्जिन को 30% तक सीमित करेगी केंद्र सरकार
Shahadat
12 Oct 2026 7:57 PM IST

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार ने कैंसर की दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को उनकी अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) के 30% तक सीमित करने का फैसला किया है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच को तुषार मेहता ने बताया कि सरकार उन कैंसर दवाओं की एक लिस्ट जारी करेगी जिन पर यह सीमा लागू होगी। बाज़ार में बदलाव और सार्वजनिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए इस लिस्ट को समय-समय पर अपडेट किया जाएगा ताकि इसमें और एंटी-कैंसर दवाएं शामिल की जा सकें।
केंद्र सरकार का यह फैसला कोर्ट की उन सख्त टिप्पणियों के बाद आया, जो पिछली सुनवाई के दौरान कैंसर की दवाओं को रिटेलर्स को बेची जाने वाली कीमत (PTR) से दस गुना तक ज़्यादा MRP पर बेचे जाने को लेकर की गईं।
लंबित कार्यवाही में डिपार्टमेंट ऑफ़ फार्मास्यूटिकल्स द्वारा दायर हलफनामे के अनुसार, यह फैसला 8 अक्टूबर को नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) की बैठक में लिया गया।
सरकार ने प्रस्तावित ट्रेड मार्जिन नियमन के तहत शामिल करने के लिए कैंसर दवाओं की एक लिस्ट की सिफारिश करने के लिए डायरेक्टर जनरल ऑफ़ हेल्थ सर्विसेज़ के तहत एक एक्सपर्ट कमेटी भी बनाई। हलफनामे में कहा गया कि कमेटी से 10 से 15 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशें सौंपने को कहा गया।
हलफनामे में कहा गया कि प्रस्तावित सीमा से कैंसर की दवाओं की MRP में अनुमानित 20% से 70% की कमी आने की उम्मीद है, जिससे मरीज़ों को सालाना लगभग ₹2,500 करोड़ की बचत होगी।
हलफनामे में कहा गया,
"ऐसे कदमों में सबसे महत्वपूर्ण कदम सरकार का एंटी-कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) के 30% तक सीमित करने का फैसला है, जिससे मरीज़ों को सालाना लगभग ₹2,500 करोड़ की बचत होने की उम्मीद है।"
सरकार ने ट्रेड चैनल के लिए उचित मार्जिन बनाए रखने और साथ ही अत्यधिक मार्कअप को रोकने का प्रस्ताव दिया। हलफनामे के अनुसार, यह उपाय शुरू में कैंसर के इलाज के लिए मंज़ूर सभी दवाओं पर लागू होगा, सिवाय सस्ती दवाओं के।
हालांकि, कोर्ट ने सवाल किया कि प्रस्तावित कदम सिर्फ़ कैंसर की दवाओं तक ही क्यों सीमित है।
जस्टिस मेहता ने मेडिकल डिवाइस और अन्य दवाओं में कीमत के अंतर पर ज़ोर दिया और कैंसर की दवाओं तक ही इस कदम को सीमित करने के तर्क पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा,
“एक आम भारतीय कार्डियक स्टेंट की रिटेलर को बेचे जाने वाली कीमत (PTR) ₹5,000 है, लेकिन MRP ₹25,000 है।”
उन्होंने कहा कि अगर मार्जिन को 16% तक सीमित कर दिया जाए तो मेडिकल इलाज की ज़रूरत काफी कम हो सकती है, क्योंकि डॉक्टर दवाओं और डिवाइस पर मिलने वाले मार्जिन से प्रभावित होते हैं। जस्टिस मेहता ने सेलाइन ड्रिप लाइन का उदाहरण भी दिया, जिसकी MRP ₹11 है लेकिन वह ₹270 में बेची जा रही है।
बेंच ने यह भी सवाल किया कि मैन्युफैक्चरर रिटेलर्स को सप्लाई की जाने वाली कीमत से कई गुना ज़्यादा MRP कैसे तय कर सकते हैं।
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि कीमत तय करना सरकार की पॉलिसी का सिर्फ़ एक पहलू है और किफायती दाम, उपलब्धता और बाज़ार की ज़रूरतों के बीच संतुलन बनाए रखना ज़रूरी है।
कोर्ट ने सवाल किया कि सरकार सभी तरह की दवाओं को रेगुलेट क्यों नहीं कर सकती।
भाटी ने जवाब दिया कि भारत में दवाओं की कीमतें पहले से ही बहुत कम हैं और सरकार का ज़्यादा दखल बाज़ार और दवाओं की उपलब्धता पर बुरा असर डाल सकता है।
हालांकि, कोर्ट ने केंद्र से यह बताने को कहा कि मौजूदा तरीका मरीज़ों की सुरक्षा कैसे करता है।
जस्टिस मेहता ने दवाओं की उपलब्धता के बारे में भाटी के स्पष्टीकरण पर सवाल उठाया और पूछा कि क्या ड्रग्स (प्राइसेस कंट्रोल) ऑर्डर (DPCO), 2013 के तहत तय 16% रिटेलर मार्जिन वाली दवाएं उपभोक्ताओं तक नहीं पहुँच पा रही हैं।
सॉलिसिटर जनरल ने बेंच का ध्यान केंद्र सरकार द्वारा दाखिल हलफ़नामे की ओर दिलाया, जिसमें प्रस्तावित दखल के कारणों और दूसरी दवाओं पर भी ट्रेड मार्जिन रेगुलेशन लागू करने से जुड़ी चिंताओं का ज़िक्र किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 अक्टूबर की तारीख तय की।
Case Title : Kishan Chand Jain v. Ethics And Medical Registration Board (EMRB)

