वकील की सुप्रीम कोर्ट में शिकायत: हिरासत में लिए गए छात्र प्रदर्शनकारियों से मिलने के दौरान दिल्ली पुलिस ने मेरे साथ मारपीट की
Shahadat
28 July 2026 11:10 AM IST

एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट में शिकायत की कि दिल्ली पुलिस ने उनके साथ मारपीट और बदसलूकी की। यह घटना 23 जुलाई की है, जब वे निज़ामुद्दीन पुलिस स्टेशन गए। वह जंतर-मंतर पर परीक्षा पेपर लीक के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के कारण हिरासत में लिए गए छात्रों की रिहाई के लिए वहां गए।
शिकायतकर्ता वकील माणिक गुप्ता हैं, जो दिल्ली की विभिन्न अदालतों, जिनमें सुप्रीम कोर्ट भी शामिल है, उसमें प्रैक्टिस करते हैं। गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित उस रिट याचिका में दखल देने की मांग की, जिसमें प्रदर्शनकारियों पर पुलिस बल के इस्तेमाल का मुद्दा उठाया गया।
अपनी अर्जी में गुप्ता ने कहा कि 23 जुलाई की रात, हिरासत में लिए गए छात्रों से मिली मदद की गुहार के बाद वे निज़ामुद्दीन स्टेशन गए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) ने उन्हें डराया-धमकाया और दूसरे अधिकारियों को उन्हें भी हिरासत में लेने का निर्देश दिया। इसके बाद उन्हें कथित तौर पर एक कमरे में ले जाया गया, जहां एक पुलिस अधिकारी ने उनकी गर्दन पकड़ी, थप्पड़ मारा और घूंसे मारे। जब उन्होंने कहा कि वे वकील हैं तो उनके साथ बदसलूकी की गई और पुलिस अधिकारी ने कथित तौर पर कहा कि उन्हें सबक सिखाया जाएगा।
शिकायत के अनुसार, बाद में SHO ने उन्हें फोन किया और उनके खिलाफ FIR दर्ज करने की धमकी दी। फिर SHO ने वकील के पिता को फोन किया और कहा कि वे रात में सड़कों पर घूम रहे थे। उनके वकील दोस्त जब स्टेशन पहुंचे, तब उन्हें रिहा किया गया।
गुप्ता ने बताया कि बाद में वे इलाज के लिए लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज (LHMC) अस्पताल गए और वहां मेडिको-लीगल केस (MLC) रिपोर्ट तैयार की गई। उनके अनुसार, MLC रिपोर्ट, जिसमें चोटों का विवरण था, ने कस्टडी में उनके साथ हुई हिंसा की पुष्टि की। बाद में उन्होंने निज़ामुद्दीन स्टेशन पर अपने अनुभव के बारे में दिल्ली के पुलिस कमिश्नर और दिल्ली साउथ-ईस्ट के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस को शिकायत भेजी। हालांकि, उन्होंने कहा कि शिकायत में गलत तरीके से कैद करने, गंभीर चोट पहुंचाने और आपराधिक धमकी देने जैसे गंभीर अपराधों का खुलासा होने के बावजूद, आज तक कोई FIR दर्ज नहीं की गई।
इन दलीलों के साथ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि इस मामले की जांच किसी स्वतंत्र प्राधिकरण या रिटायर्ड जज की देखरेख में कराई जाए और अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की जाए। उन्होंने उस समय से संबंधित स्टेशन के CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने की भी मांग की। छात्र प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ पुलिस की कार्रवाई से जुड़ी 'शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी बनाम भारत सरकार' की रिट याचिका में पक्षकार बनने के लिए अर्ज़ी (impleadment application) दायर की गई।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) की अध्यक्षता वाली बेंच आज इस मामले पर विचार कर रही है।
यह अर्ज़ी वकील राहुल गुप्ता के ज़रिए दायर की गई।


