संयुक्त राष्ट्र आयोग का गंभीर आरोप: इज़राइल ने जानबूझकर फ़िलिस्तीनी बच्चों को बनाया निशाना, युद्ध अपराध और मानवता के विरुद्ध किए अपराध

Amir Ahmad

24 Jun 2026 12:42 PM IST

  • संयुक्त राष्ट्र आयोग का गंभीर आरोप: इज़राइल ने जानबूझकर फ़िलिस्तीनी बच्चों को बनाया निशाना, युद्ध अपराध और मानवता के विरुद्ध किए अपराध

    संयुक्त राष्ट्र के कब्जे वाले फ़िलिस्तीनी क्षेत्र संबंधी जांच आयोग ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला कि इज़राइली अधिकारियों और सुरक्षा बलों ने जानबूझकर फ़िलिस्तीनी बच्चों को निशाना बनाकर उनकी हत्या की और उनका बचपन नष्ट कर दिया।

    आयोग ने कहा कि गाज़ा पट्टी और पश्चिमी तट, जिसमें पूर्वी यरुशलम भी शामिल है उसमें इज़राइल युद्ध अपराधों और मानवता के विरुद्ध अपराधों के लिए जिम्मेदार है।

    इस आयोग की अध्यक्षता भारत के पूर्व हाईकोर्ट चीफ जस्टिस और वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट डॉ. एस. मुरलीधर कर रहे हैं।

    मंगलवार को रिपोर्ट जारी करते हुए डॉ. मुरलीधर ने बताया कि 100 पृष्ठों की यह रिपोर्ट 7 अक्टूबर 2023 से 31 मार्च 2026 के बीच कब्जे वाले फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में बच्चों के खिलाफ हुए कथित उल्लंघनों और अपराधों की जांच पर आधारित है।

    उन्होंने कहा,

    "आयोग को फ़िलिस्तीनी बच्चों की सुनियोजित और लक्षित हत्या के संबंध में निर्विवाद साक्ष्य मिले हैं। उन्होंने इसे बच्चों के खिलाफ अपराधों पर केंद्रित संयुक्त राष्ट्र की पहली विशेष जांच रिपोर्ट बताया।"

    रिपोर्ट में कहा गया कि इज़राइली अधिकारियों और सुरक्षा बलों ने फ़िलिस्तीनी बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाया, उनकी हत्या की और उनका बचपन छीन लिया।

    आयोग के अनुसार इज़राइल गाज़ा पट्टी में मानवता के विरुद्ध अपराधों और युद्ध अपराधों तथा पश्चिमी तट और पूर्वी यरुशलम में युद्ध अपराधों का जिम्मेदार है।

    रिपोर्ट के मुताबिक 7 अक्टूबर 2023 के बाद से 20,000 से अधिक फ़िलिस्तीनी बच्चों की मौत हुई, जबकि 44,000 से अधिक बच्चे घायल हुए हैं। समीक्षा अवधि के दौरान कुल मौतों में लगभग 30 प्रतिशत बच्चे शामिल थे।

    आयोग ने पाया कि बच्चों की मौत मुख्य रूप से भारी विस्फोटक क्षमता वाले हवाई हमलों, ड्रोन हमलों, स्नाइपर गोलीबारी और अन्य हथियारों के इस्तेमाल से हुई, जिनमें बच्चों के सिर और शरीर के ऊपरी हिस्सों को निशाना बनाया गया।

    डॉ. मुरलीधर ने कहा कि बच्चों की हत्या और उन्हें नुकसान पहुंचाने की घटनाएं व्यापक और व्यवस्थित स्वरूप की रही हैं।

    रिपोर्ट में गाज़ा में अनाथ बच्चों के बढ़ते संकट का भी उल्लेख किया गया। इसके अनुसार अक्टूबर 2023 से अक्टूबर 2025 के बीच लगभग 58,054 बच्चों ने अपने एक या दोनों माता-पिता को खो दिया।

    आयोग ने यह भी कहा कि इज़राइल ने शिक्षा व्यवस्था को व्यवस्थित रूप से बाधित किया, जिससे फ़िलिस्तीनी समाज की बौद्धिक और सामाजिक नींव को नुकसान पहुंचा है।

    रिपोर्ट के अनुसार गाज़ा के 97 प्रतिशत स्कूल या तो नष्ट हो चुके हैं या क्षतिग्रस्त हुए, जबकि 95 प्रतिशत विश्वविद्यालय प्रभावित हुए। गाज़ा के 38 में से 22 विश्वविद्यालय पूरी तरह तबाह हो गए।

    रिपोर्ट में मानवीय संकट का भी विस्तार से उल्लेख किया गया। इसमें कहा गया कि भूख और जीवन के लिए आवश्यक परिस्थितियों की कमी ने बच्चों के अस्तित्व को गंभीर खतरे में डाल दिया।

    1 अक्टूबर 2025 तक कुपोषण के कारण 151 बच्चों की मौत दर्ज की गई, जबकि अक्टूबर से दिसंबर 2023 के बीच 1,000 से अधिक बच्चों के एक या अधिक अंग काटने पड़े।

    इन तथ्यों के आधार पर आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि इज़राइली अधिकारी और सुरक्षा बल मानवता के विरुद्ध अपराधों, विशेष रूप से उत्पीड़न, तथा युद्ध अपराधों के लिए जिम्मेदार हैं।

    डॉ. मुरलीधर ने कहा,

    "आज जारी रिपोर्ट नरसंहार संबंधी हमारे पहले के निष्कर्षों को और मजबूत करती है।"

    आयोग ने कहा कि बच्चों पर हमले फ़िलिस्तीनी समाज की जनसांख्यिकीय शक्ति को कमजोर करने और उनके आत्मनिर्णय के अधिकार को प्रभावित करने के उद्देश्य से किए गए प्रतीत होते हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार फ़िलिस्तीनी बच्चों की सुरक्षा और अस्तित्व सीधे तौर पर फ़िलिस्तीनी समाज के भविष्य से जुड़ा हुआ।

    पश्चिमी तट की स्थिति पर रिपोर्ट में कहा गया कि वहां बसने वालों द्वारा की जाने वाली हिंसा इज़राइली सरकारी नीतियों को लागू करने का एक माध्यम बन चुकी है।

    आयोग का निष्कर्ष है कि सरकारी संस्थाएं और हिंसक बसने वाले समूह अवैध क्षेत्रीय विस्तार के साझा उद्देश्य की दिशा में काम कर रहे हैं।

    साथ ही आयोग ने अपनी 15 जून 2026 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि हमास ने भी गाज़ा में फ़िलिस्तीनियों के खिलाफ गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन किए, जिनमें दमन, यातना और गैरकानूनी हत्याएं शामिल हैं।

    डॉ. मुरलीधर ने उन दावों को भी खारिज किया कि अक्टूबर 2025 के युद्धविराम के बाद गाज़ा की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ। उन्होंने कहा कि आयोग के निष्कर्ष बताते हैं कि युद्धविराम के बाद भी फ़िलिस्तीनियों की मौत और उन्हें नुकसान पहुंचाने की घटनाएं जारी रहीं तथा मानवीय सहायता आवश्यक स्तर से काफी कम रही।

    रिपोर्ट में इज़राइली बलों द्वारा हिरासत में लिए गए फ्लोटिला कार्यकर्ताओं के साथ किए गए व्यवहार की भी आलोचना की गई।

    आयोग का कहना है कि यह उसके पहले के निष्कर्षों की पुष्टि करता है, जिनमें फ़िलिस्तीनी बंदियों के साथ दुर्व्यवहार, यातना और यौन उत्पीड़न के आरोप शामिल थे।

    आयोग ने कहा कि वह जवाबदेही सुनिश्चित करने, दंडहीनता समाप्त करने तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघनों के लिए राज्य और व्यक्तिगत स्तर पर जिम्मेदारी तय करने के उद्देश्य से अपना कार्य जारी रखेगा।

    गौरतलब है कि नवंबर 2025 में डॉ. एस. मुरलीधर को इस आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। आयोग के अन्य सदस्य ज़ाम्बिया की फ्लोरेंस मुंबा और ऑस्ट्रेलिया के क्रिस सिडोटी हैं।

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